फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

IBA: आईबीए ने बैंकों को दी सिस्टम बदलने की चेतावनी, कहा- नहीं तो रुक सकता है विदेश से रुपयों का लेनदेन

Sun, 20 Jul 2025 03:23 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारतीय बैंक संघ (आईबीए) ने देश के सभी बैंकों को आगाह किया है कि वे जल्द से जल्द एसडब्ल्यूआईएफटी के नए अंतरराष्ट्रीय भुगतान सिस्टम (आईएसओ) 20022 को अपनाएं। अगर बैंक ऐसा नहीं करते हैं तो अंतरराष्ट्रीय लेनदेन में बाधा, तकनीकी समस्याएं और ग्राहकों का भरोसा खोने जैसी गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

विज्ञापन
बैंक - फोटो : Adobe Stock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारतीय बैंक संघ (आईबीए) ने सभी बैंकों को एसडब्ल्यूआईएफटी के नए अंतरराष्ट्रीय भुगतान सिस्टम (आईएसओ) 20022 जल्द से जल्द अपनाने के लिए आगाह किया है। इसके तहत आईबीए ने चेतावनी दी है कि अगर वे जल्द ही एसडब्ल्यूआईएफटी के नए आईएसओ 20022 मानकों को नहीं अपनाते, तो उन्हें अंतरराष्ट्रीय लेन-देन (क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स) में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। आईबीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अतुल कुमार गोयल ने हाल ही में सभी बैंकों को पत्र लिखते हुए कहा है कि बैंकों को अगस्त 2025 तक इस नए सिस्टम की ओर माइग्रेशन शुरू कर देना चाहिए, ताकि इसे समय रहते सुचारू रूप से लागू किया जा सके।

विज्ञापन


ये भी पढ़ें:- GST: 15851 करोड़ रुपये की फर्जी आईटीसी धोखाधड़ी का खुलासा, पकड़ी गईं 3558 फर्जी कंपनियां

क्या है एसडब्ल्यूआईएफटी आईएसओ 20022?
बता दें कि यह एक नया अंतरराष्ट्रीय सिस्टम है, जिसकी मदद से बैंक एक-दूसरे को पैसे भेजने और लेनदेन से जुड़ी जानकारी साझा करने का काम और भी तेज, सुरक्षित और कम खर्च में कर सकेंगे। इससे धोखाधड़ी की आशंका घटेगी और बैंकिंग सिस्टम पहले से ज्यादा स्मार्ट और पारदर्शी तरीके से काम करेगा। मामले में आईबीए ने साफ तौर पर कहा कि जो बैंक समय रहते नया सिस्टम नहीं अपनाएंगे, उन्हें तकनीकी परेशानी, ग्राहक का भरोसा खोना और सेवा में रुकावट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें:- Sanctions on Russia: EU के प्रतिबंध से वैश्विक आपूर्ति-खरीद में अड़चन नहीं; फैसले के समर्थन में दूत ने दी दलील
 
भारत में कितने बैंक तैयार हैं?
बात अगर इस नए सिस्टम के अपनाने की करें तो  अभी सिर्फ तीन भारतीय बैंक ही इस सिस्टम को 85% तक अपनाने में सफल हुए हैं। बाकी बैंक नवंबर 2025 की आखिरी तारीख के पास जाकर बदलाव की सोच रहे हैं, जो आईबीए के मुताबिक खतरनाक हो सकता है। हालांकि बैंक अगर इस नए सिस्टम को सही समय पर लागू नहीं करते हैं तो इसके असर से बैंक से लेनदेन रुक सकते हैं, मैसेज रिजेक्ट हो सकते हैं। ग्राहक को परेशानी हो सकती है। साथ ही बैंकों को जुर्माना या अतिरिक्त खर्च झेलना पड़ सकता है। 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें