अनुच्छेद 370 के विवादित प्रावधानों की समाप्ति के समय नजरबंद किए गए जम्मू-कश्मीर के नेता फारूख अब्दुल्ला ने शनिवार को लोकसभा की कार्यवाही में भाग लिया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की स्थितियां लगातार बद से बदतर होती जा रही हैं। अगर उन्हें संभालना है और जम्मू-कश्मीर को भी विकास के रास्ते पर ले जाना है तो पड़ोसी देश (पाकिस्तान) से बात करनी पड़ेगी। अब्दुल्ला ने कहा कि अगर शांति के लिए भारत चीन के साथ बातचीत की कोशिश कर सकता है तो उसे पाकिस्तान के साथ बात क्यों नहीं करनी चाहिए। उनके इस बयान के बाद संसद में खूब हंगामा मचा।
उन्होंने सदन के उन नेताओं का धन्यवाद भी जताया जिन्होंने उनकी नजरबंदी के दौरान उनकी रिहाई के लिए आवाज उठाई थी। लगभग एक साल के बाद संसद की कार्यवाही में भाग लेने पहुंचे दिग्गज नेता फारूख अब्दुल्ला ने कहा कि उन्हें यह देखकर काफी खुशी महसूस हो रही है कि सेना ने यह स्वीकार किया है कि शोपियां में फर्जी मुठभेड़ की गई थी और इसके दौरान नियमों का उल्लंघन किया गया था। उन्होंने कहा कि वे इस बात की उम्मीद करते हैं कि अब इस मुठभेड़ में मारे गए तीनों परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाएगा।
जम्मू एंड कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस नेता फारूक अब्दुल्ला ने आरोप लगाया कि घाटी में हालात इस समय काफी खराब हैं। वहां तरह-तरह से लोगों को परेशान किया जा रहा है। इंजीनियर्स और अन्य पेशेवर लोगों तक को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कश्मीर को भी देश के बाकी हिस्से के साथ प्रगति की राह पर आगे चलने का अधिकार है और इसके लिए घाटी में शांति स्थापित करने की कोशिश की जानी चाहिए। उन्होंने कहा लेकिन यह कार्य पाकिस्तान से बातचीत किए बिना नहीं की जा साकता। हालांकि, उनके इस बयान के बाद सत्ता पक्ष के सांसदों ने काफी हंगामा किया।