अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्राकृतिक गैस के महंगा होने का असर भारतीय अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में दिखेगा। यूं तो इस समय भारतीय ऊर्जा परिदृश्य में प्राकृतिक गैस की भागीदारी महज 6.5 फीसदी की है, लेकिन इसकी भागीदारी जिस क्षेत्र में है, उसका असर जीवन के हर क्षेत्र में होगा। इस समय देश के 13 राज्यों में सिटी गैस परियोजना चल रही है।
मतलब इन राज्यों में पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की खाना बनाने के लिए गैस की आपूर्ति हो रही है, वहीं सीएनजी के रूप में मोटर वाहन चलाने के लिए गैस की आपूर्ति हो रही है। सिटी गैस परियोजना के लिए घरेलू गैस की आपूर्ति करीब 25 फीसदी है। मतलब 75 फीसदी के लिए आयातित गैस पर निर्भरता है। यदि आयातित गैस महंगी होगी तो पीएनजी और सीएनजी के दाम बढ़ना तय है।
रासायनिक उर्वरक भी होगा महंगा
देश में इस समय प्राकृतिक गैस का सबसे बड़ा औद्योगिक ग्राहक उर्वरक क्षेत्र ही है। इस समय करीब 35 फीसदी गैस की खपत उर्वरक क्षेत्र में ही हो रही है। जब इसका मुख्य इनपुट (प्राकृतिक गैस) ही महंगा हो जाएगा, तो रासायनिक उर्वरकों का दाम भी बढ़ेगा। सरकार चाहे तो इसके असर से किसानों को बचा सकती है, लेकिन उस सूरत में सब्सिडी बढ़ानी पड़ेगी जो राजकोषीय घाटे को बढ़ाएगा।
बिजली भी होगी महंगी
उर्वरक के बाद बिजली ऐसा क्षेत्र है, जहां प्राकृतिक गैस की सबसे ज्यादा खपत है। इस समय देश में करीब 24 गीगावाट क्षमता के बिजली घर गैस से चल सकते हैं, लेकिन इनमें से 14 गीगावाट क्षमता के बिजली घर गैस के बिना बंद हैं।
शेष 10 गीगावाट क्षमता के बिजली घर भी अपनी पूर्ण क्षमता में नहीं चलते। तब भी इस क्षेत्र में देश के कुल गैस खपत का करीब 25 फीसदी हिस्सा खर्च होता है। जब गैस महंगा होगा, तो बिजली महंगी होगी और बिजली महंगी होने का असर जीवन के हर क्षेत्र में दिखेगा।
लघु उद्योगों को भी होगी परेशानी
देश के जिन राज्यों में सिटी गैस परियोजना चल रही हैं, वहां चरणबद्ध तरीके से लघु उद्योगों को भी प्राकृतिक गैस की आपूर्ति शुरू की गई है। ऐसा इसलिए, ताकि ये उद्यमी कोयला या पेट कोक के बदले गैस का उपयोग करें और प्रदूषण पर लगाम लगे। जब गैस महंगा होगा तो इनकी इनपुट लागत बढ़ जाएगी।