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Disaster: दुनिया में आपदा से किसानों को हर वर्ष 10 लाख करोड़ का नुकसान, तीन दशक में 143 लाख करोड़ की मार

Sat, 02 Dec 2023 06:41 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एफएओ की नई स्टैटिस्टिकल ईयरबुक: वर्ल्ड फूड एंड एग्रीकल्चर 2023 के अनुसार, 1991 से 2021 के दौरान किसानों को बाढ़, सूखा, तूफान, ओला, जैसी आपदाओं के चलते फसल उत्पादन और पशुधन के रूप में करीब 316.6 लाख करोड़ रुपए का नुकसान झेलना पड़ा है।

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File Photo. - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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खेती-किसानी पर साल दर साल आपदाओं का जोखिम बढ़ रहा है। खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) की रिपोर्ट के अनुसार इन आपदाएं के चलते दुनिया भर के किसानों पर हर साल 10.2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की मार पड़ रही है। यह वैश्विक स्तर पर कृषि क्षेत्र के वार्षिक सकल घरेलू उत्पाद के करीब पांच फीसदी हिस्से के बराबर है। 
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एफएओ की नई स्टैटिस्टिकल ईयरबुक: वर्ल्ड फूड एंड एग्रीकल्चर 2023 के अनुसार, 1991 से 2021 के दौरान किसानों को बाढ़, सूखा, तूफान, ओला, जैसी आपदाओं के चलते फसल उत्पादन और पशुधन के रूप में करीब 316.6 लाख करोड़ रुपए का नुकसान झेलना पड़ा है। इन आपदाओं का सबसे ज्यादा खामियाजा भारत सहित पूरे एशिया के किसानों को भुगतना पड़ा है। इन्हें इन तीन दशकों के दौरान करीब 143.3 लाख करोड़ रुपए  का नुकसान हुआ है। अमेरिका और यूरोप अपने कृषि क्षेत्र के संबंध में आनुपातिक रूप से अधिक प्रभावित हुए हैं। यदि कृषि क्षेत्र के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लिहाज से देखें तो इन आपदाओं से अफ्रीका में किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है।

खेती में कम हुई रुचि, श्रमबल 40 से घटकर 27 फीसदी पहुंचा 
धीरे-धीरे किसानों और कृषि श्रमिकों का खेती-किसानी से लगाव घट रहा है। यही वजह है कि पिछले 21 वर्षों में कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों में गिरावट देखी गई है। जहां साल 2000 में करीब 102.7 करोड़ लोग यानी वैश्विक श्रमबल का करीब 40 फीसदी हिस्सा कृषि से जुड़ा था। यह 2021 में घटकर केवल 27 फीसदी रह गया। यानी अब केवल 87.3 करोड़ लोग अपनी जीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं।
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कीटनाशकों का उपयोग बढ़ा, घट रही है भू-उर्वरता
यदि 2000 से 2021 के बीच देखें तो कीटनाशकों के उपयोग भी तेजी से बढ़ रहा है। इन 21 वर्षों में कीटनाशकों के वैश्विक उपयोग में करीब 62 फीसदी का इजाफा हुआ है। हालांकि 2021 में दुनिया भर के आधे कीटनाशकों की खपत केवल अमेरिका में हुई थी। कीटनाशकों बढ़ते उपयोग के कारण भू उर्वरता प्रभावित हुई है।

उत्पादकता 54 फीसदी बढ़ी लेकिन पौष्टिक आहार घटा
रिपोर्ट की गई अवधि के दौरान  प्रमुख फसलों के उत्पादन में भी 54 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। यह 2021 में बढ़कर 950 करोड़ टन तक पहुंच गई है। इस उत्पादन में चार प्रमुख फसलों गेहूं, चावल, मक्का और गन्ना की करीब आधी हिस्सेदारी थी।  एफएओ की रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर खाद्य प्रणालियों की छुपी लागत करीब 1,057.7 लाख करोड़ रुपए है। इसमें भारत की हिस्सेदारी करीब 8.8 फीसदी की है। भारत में कृषि खाद्य प्रणालियों की छुपी लागत को देखें तो वो 91.6 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है। जो चीन और अमेरिका के बाद दुनिया में तीसरी सबसे अधिक है।
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