कृषि कानूनों के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली के दौरान हुए बवाल के बाद दिल्ली में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा के संबंध में दिल्ली पुलिस ने अब तक 22 प्राथमिकी दर्ज की हैं। इनमें से ईस्टर्न रेंज में 5 एफआईआर दर्ज की गई हैं, आज भी दिल्ली में कई रास्ते बंद हैं। वहीं दूसरी ओर अब किसान संगठन आंदोलन से पीछे हटने लगे हैं। आइए जानते हैं अब तक किन संगठनों ने आंदोलन की राह छोड़ने का फैसला लिया है।
1. राष्ट्रीय किसान मजदूर संघर्ष समन्वय समिति
ऑल इंडिया किसान संघर्ष समन्वय समिति के नेता वीएम सिंह ने आंदोलन से नाम वापस ले लिया है और साथ ही राकेश टिकैत व अन्य किसान नेताओं पर कई आरोप लगाए हैं। वीएम सिंह ने कहा कि जिन लोगों ने भड़काया उन पर सख्त कार्रवाई हो।
वीएम सिंह ने कहा कि, सरकार की भी गलती है जब कोई 11 बजे की जगह 8 बजे निकल रहा है तो सरकार क्या कर रही थी। जब सरकार को पता था कि लाल किले पर झंडा फहराने वाले को कुछ संगठनों ने करोड़ों रुपये देने की बात की थी तो सरकार क्या कर रही थी।
वीएम सिंह आगे बोले, हिंदुस्तान का झंडा, गरिमा, मर्यादा सबकी है। उस मर्यादा को अगर भंग किया है, भंग करने वाले गलत हैं और जिन्होंने भंग करने दिया वो भी गलत हैं। आईटीओ में एक साथी शहीद भी हो गया। जो लेकर गया या जिसने उकसाया उसके खिलाफ पूरी कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने राकेश टिकैत पर आरोप लगाते हुए कहा कि टिकैत अलग रास्ते से जाना चाहते थे। अपने बयान पर वीएम सिंह ने स्पष्टीकरण भी दिया है कि आंदोलन से अलग होने का निर्णय राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन और उसके सभी पदाधिकारियोंं का है न कि अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति का है।
2. भारतीय किसान यूनियन : चिल्ला बॉर्डर से खत्म होगा आंदोलन
भारतीय किसान यूनियन का भानु गुट भी किसान आंदोलन से अलग हो गया है। संगठन के मुखिया भानु प्रताप सिंह ने कहा कि जो आरोपी हैं उनके खिलाफ कार्रवाई हो। उन्होंने चिल्ला बॉर्डर से धरना खत्म करने का एलान किया है।
हालांकि भाकियू के भानु गुट को संयुक्त किसान मोर्चा ने पहले ही अपने आंदोलन से अलग कर दिया था क्योंकि इसने शुरुआत में ही सरकार के मंत्रियों से मिलने के बाद आंदोलन खत्म करने की बात कही थी। हालांकि आम किसानों की भावनाओं को देखते हुए आंदोलन जारी रहा था।