सरकार के साथ 10वें दौर की वार्ता में किसान आंदोलन से जुड़े नेताओं को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के नोटिस पर सरकार और किसान संगठनों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। किसान संगठनों ने आंदोलन को कुचलने के लिए सरकार पर दमन का सहारा लेने का आरोप लगाया। इस पर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आश्वासन दिया कि किसी निर्दोष को परेशान नहीं किया जाएगा।
कृषिमंत्री ने एनआईए नोटिस पर राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया। उन्होंने कहा, अगर किसी निर्दोष को एनआईए का नोटिस गया है तो किसान संगठन सरकार को ऐसे लोगों के नामों की सूची दें। हम उस पर संज्ञान लेंगे और देखेंगे कि किसी निर्दोष को मुश्किल न हो।
किसान संगठनाें और सरकार के तीनों मंत्रियों के बीच विज्ञान भवन में दोपहर करीब 2:45 बजे बैठक शुरू हुई। तीनों मंत्रियों ने किसानों को गुरुपर्व की बधाई दी। इसे बाद पहले दौर की बातचीत में जोर आजमाइश शुरू हुई।
कृषि मंत्री ने कहा, सरकार कानूनों को वापस नहीं लेगी। किसान संगठन उन प्रावधानों के बारे में सरकार से चर्चा करें, जिन पर उन्हें आपत्ति है। इस पर किसान संगठनों ने किसान नेताओं के खिलाफ एनआईए के नोटिस का मामला उठाया। सरकार पर किसान आंदोलन को बदनाम करने और डराने धमकाने का आरोप लगाया।
किसान नेताओं ने यह भी कहा कि वह इस बैठक में कानून के प्रावधानों पर नहीं बल्कि कानून वापसी पर चर्चा करने आए हैं। इस बीच दोनों पक्ष के बीच कहासुनी बढ़ी और करीब एक घंटे बाद खाने के लिए वार्ता रोक दी गई। किसानों ने लंगर खाया और फिर सरकार से बातचीत के लिए वार्ता की मेज पर पहुंचे।
सरकार ने की ट्रैक्टर रैली न करने की अपील
वार्ता के दौरान सरकार ने किसान संगठनों से गणतंत्र दिवस पर टैक्टर रैली न करने की अपील की। इसके अलावा 23 जनवरी को अगले दौर की बैठक का प्रस्ताव दिया। हालांकि किसान नेताओं ने आपस में चर्चा की और इसके बाद किसानों ने तय किया कि वह सरकार के प्रस्ताव पर बृहस्पतिवार को चर्चा के बाद 22 जनवरी को अगले दौर की बैठक के लिए आएंगे।