फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

55 दिनों में किसानों ने चंदे से जुटाए डेढ़ करोड़ रुपये, टेंट और पानी पर हो रहा है ज्यादा खर्च

Tue, 19 Jan 2021 05:49 PM IST
Harendra Chaudhary राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • आंदोलन के दौरान अगर कोई किसान दुर्घटना में घायल होता है या उसका वाहन क्षतिग्रस्त होता है तो उसका मुआवजा संगठन ही वहन करता है
  • एकत्र हुए इस चंदे से जल्द ही शहीद किसानों के परिवारों को एक लाख रुपये मुआवजा भी दिया जाएगा
विज्ञापन
सिंघु बॉर्डर पर किसानों प्रदर्शन करते हुए - फोटो : पीटीआई (फाइल)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

नए कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का सिंघु बॉर्डर पर आंदोलन जारी है। ठंड और कोहरे के बावजूद बड़ी संख्या में किसान बॉर्डर पर जुटे हुए हैं। इन 55 दिनों में संयुक्त किसान मोर्चा ने 3,380 लोगों से करीब डेढ़ करोड़ रुपये चंदे से एकत्र किए हैं। इस चंदे का रिकॉर्ड रखने रखने के लिए 10 किसानों की टीम भी तैयार की गई है। जो रोज रात को दिन भर में आए चंदे और उससे हुए खर्च का हिसाब रखती है। आंदोलन में मोर्चे का सबसे ज्यादा खर्चा टेंट, स्पीकर और पानी पर हो रहा है। एकत्र हुए इस चंदे से जल्द ही शहीद किसानों के परिवारों को एक लाख रुपये मुआवजा भी दिया जाएगा।

विज्ञापन


चंदे का हिसाब रखने वाले किसान अमरीक सिंह ने अमर उजाला को बताया कि अभी तक करीब डेढ़ करोड़ रुपये चंदे से जुटाए गए हैं। रोज इसके हिसाब की जांच होती है। एक रजिस्टर में चंदे में मिलने वाली रकम का हिसाब व दूसरे में खर्च का हिसाब रखा जाता है। सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक नकद चंदा एकत्र किया जाता है। जो भी लोग चंदा देते हैं उन्हें संगठन की तरफ से एक रसीद भी दी जाती है। इसमें चंदा देने वाले की पूरी जानकारी होती है। एक कॉपी हम अपने रिकॉर्ड में रखते हैं।

उन्होंने आगे बताया कि रोजाना करीब 3-4 लाख रुपये चंदा एकत्र होता है। वहीं 1-2 लाख रुपये खर्च भी हो जाते हैं। सबसे ज्यादा खर्च 30 लाख रुपये तिरपाल और बड़े टेंट के किराए, लाउडस्पीकर, पानी के अलावा जत्थों की रोज की जरूरतों को पूरा करने में हो रहा है। इन सभी के अलावा बीमार किसानों के दवा आदि का खर्च भी हम वहन कर रहे हैं।

किसानों की गाड़ियों के नुकसान की भरपाई भी कर रहा संगठन

चंदे का रिकार्ड रखने वाले किसान संतोख सिंह संधू ने अमर उजाला से कहा, आंदोलन में आने-जाने के दौरान अगर कोई किसान किसी दुर्घटना में घायल होता है या उसका वाहन क्षतिग्रस्त होता है तो भी उसके नुकसान की भरपाई भी संगठन ही वहन करता है। जिस भी क्षेत्र का वाहन होता है पहले उस क्षेत्र के जत्थेबंदी का प्रधान उसकी जांच करता है कि दुर्घटना में वाहन क्षतिग्रस्त हुआ भी है या नहीं। इसके अलावा वाहन मालिक और अन्य लोगों को कितनी चोटें आई हैं और कितने लोग गंभीर रूप से घायल हैं, इसकी पड़ताल की जाती है।

विज्ञापन


उन्होंने आगे बताया कि जत्थेबंदी का प्रधान हमें फोन पर सूचना देता है। इसके बाद संबंधित व्यक्ति हमारे पास आधार कार्ड, गाड़ी के दस्तावेज और मेडिकल रिपोर्ट लेकर आते हैं। जिस पर क्षेत्र के जत्थेबंदी के दस्तखत होते हैं, इसके बाद ही हम उसे मुआवजा देते हैं। 20 जनवरी से करीब 85 शहीद हुए किसान परिवारों को एक-एक लाख रुपये देंगे। क्षेत्र के जत्थेबंदी का प्रधान शहीदों के गांव में जाकर उनके परिजनों को नकद राशि सौपेंगे।

गौरतलब है कि नए कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर किसान अड़े हुए हैं। वहीं किसान और सरकार के बीच गतिरोध भी बरकरार है। सुप्रीम कोर्ट की कमेटी वाले फैसले पर भी किसान संगठन संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। बुधवार को किसान नेताओं और केंद्र सरकार के बीच फिर से वार्ता होगी।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें