कृषि कानूनों को लेकर किसान दिल्ली की सीमा पर पिछले 12 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्षी पार्टियों की तरफ से किसानों को समर्थन दिया गया है। इसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) भी शामिल है।
वहीं, शरद पवार को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री रहने के दौरान कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर 'कृषि उत्पाद विपणन समिति' (एपीएमसी) कानून में संशोधन की बात कही थी, जिससे निजी क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके। दूसरी तरफ, एनसीपी ने इन आरोपों पर सफाई पेश की है।
एनसीपी ने आरोपों पर क्या कहा
एनसीपी का इन आरोपों को लेकर कहना है, 'मॉडल एपीएमसी अधिनियम 2003 वाजपेयी सरकार द्वारा पेश किया गया था। हालांकि, कई राज्य सरकारें उस समय इसे लागू करने के लिए अनिच्छुक थीं। कृषि मंत्री के रूप में, पवार ने अधिनियम के कार्यान्वयन के लिए सुझाव आमंत्रित करके राज्य कृषि विपणन बोर्डों के बीच व्यापक सहमति बनाने की कोशिश की।' पवार की पार्टी ने कहा, 'एपीएमसी अधिनियम के अनुसार किसानों को मिलने वाले लाभ को लेकर विभिन्न राज्य सरकारों को समझाया गया और कई राज्य सरकारें इसे लागू करने के लिए आगे आईं।'
एनसीपी ने कहा, 'नए कृषि कानूनों ने एमएसपी और अन्य मुद्दों के बारे में किसानों के मन में कई संदेह और असुरक्षा पैदा की है जिन्हें सरकार संबोधित करने में विफल रही है। मोदी सरकार व्यापक आम सहमति नहीं बना सकी। सरकार किसानों और संपूर्ण विपक्ष की आशंकाओं को खत्म करने में विफल रही।'
पवार द्वारा उठाई गईं मांगों को ही एनडीए ने पूरा किया
एनसीपी द्वारा साझा की गई पवार की चिट्ठियों में देखा जा सकता है कि उन्होंने भी उन्हीं प्रावधानों में बदलाव की मांग को लेकर प्रयास किए थे, जिसे भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने किया है। एनसीपी ने आठ दिसंबर को किसानों के भारत बंद का समर्थन किया है।
शीला दीक्षित और शिवराज को लिखा था पत्र
एनसीपी द्वारा साझा किए गए पत्रों से पता चलता है कि उन्होंने तत्कालीन दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को चिट्ठी लिखी थी। इसमें उन्होंने ग्रामीण इलाकों में विकास, रोजगार और आर्थिक समृद्धि को बढ़ाने के लिए कृषि क्षेत्र की अच्छी तरह संचालित बाजार की मांग की थी। एपीएमसी कानून में संशोधन की बात कहते हुए उन्होंने कहा था कि इसके लिए कोल्ड स्टोरेज समेत विपणन ढांचे में बड़े निवेश की जरूरत होगी। इसके लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी जरूरी है जिसके लिए एक उचित नियामक तथा नीतिगत माहौल की जरूरत पड़ेगी।