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Farmers Protest: यूं टल गई किसानों और सरकार के बीच आज होने वाली वार्ता

Tue, 19 Jan 2021 05:40 AM IST
Amit Mandal हरि वर्मा, नई दिल्ली

सार

  • अब 20 को होगी बात, उसी दिन सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई
  • सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई अलग पीठ के कारण 20 पर खिसकी
  • एनआईए समन और ट्रैक्टर परेड को लेकर खींचतान जारी
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प्रदर्शन करते किसान (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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विस्तार
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सरकार और आंदोलनकारी किसान संगठनों के बीच मंगलवार को होने वाली दसवें दौर की वार्ता एक दिन और आगे खिसक गई। 19 के बजाय अब 20 जनवरी को किसान संगठनों और सरकार के बीच बात होगी। यह महज संयोग है कि उसी दिन सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई प्रस्तावित है। सुप्रीम कोर्ट में अलग पीठ के कारण सोमवार की सुनवाई बुधवार के लिए आगे खिसकी। अब मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की बनाई कमेटी की पहली रस्मी बैठक होगी। उधर, एक और मोर्चे की सुगबुगाहट के बीच लिखित माफीनामे के बाद गुरनाम सिंह चढूनी से संयुक्त किसान मोर्चा ने फिर नजदीकी बना ली है।

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वार्ता टलने से किसान नेता बेखबर
यह महज संयोग है कि मंगलवार की वार्ता की रणनीति बनाने के बाद जब किसान नेता दिल्ली-एनसीआर के बॉर्डर पर सो रहे थे कि अचानक वार्ता 19 के बजाय 20 को होने की सूचना आई। कई किसान नेता सोमवार की रात तक वार्ता स्थगित करने के सरकार से फैसले से बेखबर थे। भाकियू डकौंदा के बूटा सिंह बुर्जगिल ने भी अनभिज्ञता जताई, जबकि वह सरकार से वार्ता वाले इस शिष्टमंडल की सूची में तीसरे पायदान पर हैं।

पत्र और ट्वीट से जानकारी
कृषि एवं किसान मंत्रालय के सचिव संजय अग्रवाल ने सोमवार को 40 किसान संगठनों के नाम पर पत्र जारी किया। पत्र में लिखा है कि आंदोलनकारी किसान संगठनों के साथ केंद्र सरकार की मंत्री स्तरीय समिति की 19 जनवरी को होने वाली वार्ता बैठक अपरिहार्य कारणों से स्थगित करना आवश्यक हो गया है। अब यह बैठक 20 जनवरी को दोपहर 2 बजे से विज्ञान भवन में होगी। इस पत्र की प्रति वार्ता में शामिल सभी 40 किसान संगठनों के प्रमुखों के नाम जारी की गई। इसके बाद देर रात कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने भी ट्वीट कर वार्ता टलने की जानकारी दी।
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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टलने की वजह
26 जनवरी की किसानों की ट्रैक्टर रैली के खिलाफ दिल्ली पुलिस की याचिका पर सोमवार को सुनवाई टल गई। यह सुनवाई अब 20 जनवरी को ही होगी। उसी दिन सरकार से वार्ता भी होगी। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टलने की वास्तविक स्थिति यह रही कि चीफ जस्टिस सोमवार को जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस विनीत शरण के साथ पीठ साझा कर रहे थे जबकि किसानों से जुड़े मसले पर सुनवाई करने वाली पीठ में चीफ जस्टिस के अलावा जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम शामिल हैं। बुधवार को इस पीठ के बैठने की संभावना है। माना जा रहा है कि सोमवार की सुनवाई इसलिए टली। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कानून-व्यवस्था का मामला बनाते हुए तत्काल सरकार और पुलिस को ही फैसला लेने को कहा है।

एनआईए समन और ट्रैक्टर रैली को लेकर खींचतान
आंदोलनकारी किसान संगठनों और सरकार के बीच एनआईए समन और ट्रैक्टर रैली को लेकर खींचतान तेज हो गई है। दसवें दौर की वार्ता में संयुक्त किसान मोर्चा ने एनआईए समन का विरोध और ट्रैक्टर परेड की अनुमति मांगने का फैसला किया है। सरकार को उम्मीद थी कि सुप्रीम कोर्ट से ट्रैक्टर रैली को लेकर सोमवार को आदेश आ सकता है। इसलिए 18 की सुनवाई के अगले दिन 19 जनवरी को वार्ता तय हुई। 18 को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद अब 19 को सरकार की वार्ता भी टल गई।

सुप्रीम कोर्ट के पैनल की रस्मी बैठक
सुप्रीम कोर्ट के बनाये गए पैनल के तीन सदस्यों अनिल धनवत, अशोक गुलाटी, प्रमोद कुमार जोशी की मंगलवार को होने वाली पहली रस्मी बैठक में आगे का खाका खींचा जाएगा। इसके बाद नई तारीखें तय कर सुनवाई शुरू होगी। उससे पहले इस कमेटी में किसान संगठन का प्रतिधित्व सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय किया जाना है। संभव है इस पर 20 जनवरी की सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में विचार हो। यहां बता दें कि भाकियू मान के भूपिंदर सिंह मान ने खुद को सुप्रीम कोर्ट के इस पैनल से अलग कर लिया। ऐसे में संतुलन के लिए किसानों का प्रतिनिधित्व आवश्यक है।

अगली वार्ता में चढूनी और एनआईए समन वाले किसान नेता
ट्रैक्टर किसान रैली और एनआईए समन को लेकर सरकार से भले कड़वाहट बढ़ गई है लेकिन दसवें दौर की 20 जनवरी को होने वाली वार्ता के प्रतिनिधिमंडल में वे किसान नेता भी होंगे, जिन्हें एनआईए ने समन भेजा है। इनमें खासतौर से बलदेव सिंह सिरसा और हरमीत सिंह कादियां शामिल हैं। उधर विपक्षी दलों के साथ सियासी गठजोड़ कर नए मोर्चा की खिचड़ी पकाने वाले भाकियू चढूनी के गुरनाम सिंह चढूनी भी इस वार्ता में शामिल होंगे। चढूनी के सियासी गठजोड़ वाली बैठक के बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने उनसे दूरी बना ली थी। तीन सदस्यीय कमेटी बनाकर तीन दिनों के भीतर जांच कर निर्णय लेना था। चढूनी ने संयुक्त मोर्चा के छह सदस्यीय समिति के सामने अपनी स्थिति लिखित में साफ की और बताया कि वह निजी हैसियत से सियासी दलों की बैठक में शामिल हुए थे। इससे संयुक्त किसान मोर्चा का नाता नहीं। एकता और अनुशासन का हवाला देकर उन्होंने विवाद को खत्म करने का आग्रह किया। उन पर विश्वास जताकर संयुक्त किसान मोर्चा ने उन्हें फिर से सरकार के साथ होने वाली वार्ता का हिस्सा बनाते हुए नजदीकी बना ली।

एक और मोर्चे की सुगबुगाहट
23-24 जनवरी को सिंघु बॉर्डर पर प्रस्तावित किसान संसद की सुगबुगाहट भी जारी है। इसके लिए बकायदा आमंत्रण भेजकर सियासी दलों के अलावा सामाजिक, धार्मिक संगठनों के नामचीन हस्तियों को जुटाने का प्रयास जारी है। माना जा रहा है इस नए मोर्चे की विधिवत घोषणा जल्द की जाएगी।

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