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ये वो किसान नहीं जो खीर-पूड़ी खाकर बहक जाएं, किसानों के तर्क से छूटे सरकार साहब के पसीने

Fri, 04 Dec 2020 09:29 AM IST
अनवर अंसारी अमित शर्मा, नई दिल्ली

सार

शुक्रवार को 11 बजे सिंधु बॉर्डर पर बैठक कर किसान नेता तय करेंगे आगे की रणनीति
 
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किसान आंदोलन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने किसानों को 'समझाने' के लिए अपने दो महत्त्वपूर्ण मंत्रियों को मैदान में उतार दिया। मंत्रियों ने किसानों को समझाने की पूरी कोशिश भी की। उन्हें हाई-फाई प्रजेंटेशन देकर कानून की खूबियों से परिचित कराने का हर संभव प्रयास किया गया। लेकिन पूरी बैठक के दौरान किसान नेता अपनी बात पर अड़े रहे। उन्होंने सरकार से साफ कह दिया है कि पूरा कानून वापस लिए बिना कोई रास्ता निकलना मुश्किल है। यहां तक कि किसानों ने सरकार का दिया हुआ खाना भी खाने से इनकार कर दिया और कहा कि जब तक उनके बीच कोई समझौता नहीं हो जाता, वे सरकार का कोई स्वागत स्वीकार नहीं करेंगे।

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किसानों और सरकार के बीच हुई चौथे दौर की बैठक में मौजूद रही किसान नेता कविता कुरूगंती ने अमर उजाला से कहा कि सरकार को यह समझना पड़ेगा कि ये उस दौर के किसान नेता नहीं हैं जो सरकार के आवभगत से खुश होकर उसकी बातों में आकर वापस लौट जाएं। हम पूरी तैयारी के साथ आए हैं और कानून वापसी से कम हम किसी बात पर समझौता नहीं करेंगे। अगर सरकार हमारी बात नहीं मानती है तो पंजाब से 20 हजार, आंध्रप्रदेश से पंद्रह हजार और तेलंगाना से हजारों किसान और आने को तैयार बैठे हैं।


हर क्लाज का दिया जवाब
लंच के बाद बैठक के दूसरे दौर में सरकार ने एक प्रजेंटेशन देकर यह बताने की कोशिश किया कि नए कानून से किसानों को किस तरह से लाभ होगा और यह किस प्रकार उनकी आय बढ़ाने में मदद करने वाला है। प्रजेंटेशन में कानून के एक-एक क्लाज की खूबियों को उभारकर किसानों को समझाने की कोशिश की गई। लेकिन किसानों ने हर क्लाज के बाद उसकी खामियों को सरकार के सामने उभारकर रख दिया। किसानों ने बताया कि किस प्रकार नया कानून एपीएमसी मंडियों को खत्म करने की पूर्व भूमिका तैयार करता है और किस प्रकार नए कानून से एमएसपी के खत्म होने की राह तैयार हो जाती है।
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उम्मीद बंधी
कविता कुरूगंती ने कहा कि सरकार ने प्रजेंटेशन के जरिए कानून की एक-एक खूबी बताने की कोशिश करती रही, लेकिन हर क्लॉज के बाद हम उन्हें यह समझाते रहे कि उनके कानून में किस जगह पर खामी है और क्या ठीक किए जाने की जरूरत है। किसान नेता के अनुसार सरकार ने कम से कम 10 बिंदुओं पर विचार-विमर्श की आवश्यकता स्वीकार किया है। अगर सरकार हमारी परेशानियों को समझने की कोशिश करती है तो हमारे बीच अगले दौर की बैठक में कुछ बातचीत बन सकती है।

महाराष्ट्र-गुजरात के आदिवासी क्षेत्रों में काम करने वाले संगठन लोक संघर्ष मोर्चा की नेता प्रतिभा शिंदे ने अमर उजाला से कहा कि सरकार को समझना चाहिए कि यह पुराने जमाने का किसान नहीं है जो सरकार की तकनीकी बातों को नहीं समझता था। आज की बैठक में कम से कम चार किसान वकील भी थे जो कानून की बारीकियों को बहुत अच्छी तरह समझते हैं। इसलिए सरकार को जमीनी प्रयास करने पड़ेंगे और कामचलाऊ तरीके से केवल संशोधन का लॉलीपॉप देकर उन्हें अब बहकाया नहीं जा सकता।

शुक्रवार को बैठक महत्त्वपूर्ण
तेलंगाना के किसान नेता किरन कुमार विस्सा ने कहा कि सरकार से आज की होने वाली बैठक से कुछ उम्मीद जरूर उभरती है, लेकिन यह अंतिम परिणाम की तरफ जाती नहीं दिखाई देती है। आज की बैठक में हुए सभी बिंदुओं पर शुक्रवार को सभी किसान नेता 11 बजे एक बैठक करेंगे। इस बैठक में सभी बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की जाएगी और पांचवें दौर की बैठक को लेकर रणनीति तय की जाएगी।

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