सिंघु बॉर्डर पर कथित शूटर पकड़े जाने के बाद किसान संगठन बॉर्डर की सुरक्षा को लेकर मुस्तैद हो गए हैं। किसानों ने 26 जनवरी को निकलने वाली ट्रैक्टर परेड को देखते हुए सिंघु और गाजीपुर बॉर्डर पर अजनबी लोगों की निगरानी तेज कर दी है। वहीं मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों से भी अनजान आदमी पर कार्रवाई करने के लिए कहा है।
किसान संगठनों का आरोप है कि सरकार किसानों को बदनाम कर रही है। हमारा कोई भी व्यक्ति इस तरह की कोई हकरत नहीं करेगा। आरएसएस के लोग हमारे खिलाफ हैं, वे भी इस तरह की हरकत कर सकते हैं। इस मामले में संघ का कहना है कि हमारी संस्कृति और व्यवहार ऐसा नहीं हैं। ये वामपंथियों की ही संस्कृति है। वे ही इस तरह की घटनाएं करते आए हैं।
किसान नेता राकेश टिकैत ने अमर उजाला को बताया कि 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड की तैयारी जारी रही है। हजारों किसान अभी से बॉर्डर पर जुटने लगे हैं। शूटर के पकड़े जाने के बाद हमने अपने लोगों को भी निगाह रखने के लिए कह दिया है। जो भी व्यक्ति कोई गलत हरकत करते पाया जाएगा, तो हमारे लोग उसे सीधे पुलिस के हवाले कर देंगे।
किसान संगठनों ने पुलिस से भी सभी पर निगरानी रखने के लिए कहा है। हजारों किसानों को देश में बदनाम करने के लिए ये सरकार और प्रशासन ने ये प्लान बनाया था। कुछ लोग पैसे लेकर इस तरह की हरकत करते हैं। इसी तरह का काम कुछ लोगों ने हरियाणा में भी किया था। सरकार इस आंदोलन को बिगाड़ना चाहती है। इसलिए इस तरह के काम कर रही है।
किसान नेता हन्नान मौला ने बताया कि ट्रैक्टर परेड कैसे होगी और उसकी सुरक्षा कैसी होगी इसे लेकर किसान संगठन के नेता बैठक कर रहे हैं। आंदोलन खत्म करने के लिए सरकार कई तरह की साजिश रच रही है। किसान नेताओं पर एनआईए की जांच बैठाई गई और उन्हें कई तरह से डराया जा रहा है। कोई भी बाहरी तत्व आकर यहां कुछ गलत कर देगा ताकि लाखों किसान बदनाम हो जाएं।
उन्होंने आगे बताया कि ठंड और बारिश में किसान दो महीने से अपनी मांगों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। क्यों किसान खुद को बदनाम करने के लिए इस तरह की हरकत करेगा। आरएसएस के लोग भी हो सकते हैं वे लोग आंदोलन के खिलाफ हैं। आंदोलन को बिगाड़ने के लिए वे भी ऐसी हकरतें कर सकते हैं। आज आंदोलन को दो माह पूरे हो गए हैं।
इतिहास में कभी भी इतना शांतिपूर्ण आंदोलन हुआ नहीं। ये पूरा देश देख रहा है। पुलिस और सरकार भी इस बात को मान रही है। हमने शुरू से नारा दिया है कि शांति होगी तभी हम जीतेंगे और अशांति होगी तो मोदी जीतेंगे।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े संगठन भारतीय किसान संघ के महामंत्री बद्रीनारायण चौधरी ने आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि हमारी संस्कृति और व्यवहार ऐसा नहीं है। ये वामपंथियों की संस्कृति है। किसान संगठनों ने जिस मोड़ पर लाकर वार्ता को छोड़ा है इसकी हम निंदा करते हैं।