विपक्ष संसद में जनता की आवाज होता है। उसे जनता की आवाज उठाने का दायित्व मिला हुआ है। लेकिन विपक्ष अपनी यह जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहा है और यही कारण है कि किसानों को स्वयं सड़क पर उतरना पड़ा है...
किसान आंदोलन से केंद्र सरकार घिर गई है। वह कृषि कानूनों पर किसानों से बातचीत कर मामले का हल निकालने की राह तलाश रही है। इसी बीच भाजपा इसे विपक्षी दलों की साजिश बता रही है। पार्टी का आरोप है कि किसानों को गलत जानकारी देकर उन्हें भड़काया जा रहा है। पार्टी इसके लिए कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी, प्रियंका गांधी के बयान और विभिन्न राज्यों की कांग्रेस सरकारों द्वारा पास किए जा रहे कानूनों का हवाला दे रही है। वहीं किसान नेता इस आरोप को सिरे से इनकार कर रहे हैं। किसान संगठनों का कहना है कि यह उनके आंदोलन को बदनाम करने की सरकार की एक कोशिश है।
अविक साहा ने कहा कि पूरे देश का किसान इस समय सड़कों पर हैं। यूपी-बिहार, मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, केरल, उत्तराखंड से लेकर पश्चिम बंगाल तक के किसान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अगर इतना बड़ा आंदोलन करने की ताकत विपक्ष में होती तो आज वह विपक्ष में न होती। वह आज सत्ता संभाल रही होती। लेकिन विपक्षी दलों के अंदर आज यह ताकत नहीं रह गई है। यही कारण है कि किसानों को अपने अधिकारों के लिए खुद सड़कों पर उतरना पड़ा है।
वहीं, भाजपा नेता सुदेश वर्मा ने कहा कि आंदोलन के नाम पर किसानों को भड़काने की कोशिश की जा रही है। पूरे देश ने देखा है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी स्वयं पंजाब में किसान आंदोलन के नाम पर राजनीति कर रहे थे। पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकारों ने किसान कानूनों के असर को खत्म करने के लिए अपनी-अपनी विधानसभाओं में जिस प्रकार गैर-संवैधानिक तरीके से कानून बनाने की कोशिशें की हैं, उससे ही साफ हो जाता है कि इस आंदोलन के पीछे कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल हैं।
सुदेश वर्मा ने कहा कि इसके पहले भी इसी तरह की कोशिश की गई थी। लेकिन उसी बीच हुए एक सर्वे में यह बात साफ निकलकर आई थी कि देश के किसानों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विश्वसनीयता न सिर्फ बनी हुई है, बल्कि वह लगातार बढ़ भी रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को किसानों के नाम पर राजनीति नहीं करनी चाहिए।