किसान आंदोलन में आज का दिन अहम साबित होने वाला है। सरकार और आंदोलनकारी किसानों के बीच दसवें दौर की वार्ता से पहले ट्रैक्टर रैली पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई होनी है। उससे पहले दिल्ली पुलिस से फाइनल दौर की बात होगी। दसवें दौर की वार्ता से पहले अब ट्रैक्टर रैली का मामला अहम हो गया है। ट्रैक्टर रैली पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई संभव है। बुधवार की सुबह 11 बजे से विज्ञान भवन में दिल्ली पुलिस के साथ ट्रैक्टर रैली पर फाइनल दौर की बात है। मंगलवार को दिल्ली पुलिस ने किसान नेताओं के साथ ट्रैक्टर रैली पर मंत्रणा की। अभी रास्ता नहीं निकला लेकिन वैकल्पिक रोडमैप तैयार है। ऐसे में बुधवार को दिल्ली पुलिस से निर्णायक वार्ता, सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और सरकार से बातचीत से ट्रैक्टर रैली की राह खुल सकती है।
ट्रैक्टर रैली की राह
26 जनवरी की ट्रैक्टर रैली को लेकर आज का दिन अहम है। इस पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है। उससे पहले 11 बजे विज्ञान भवन में ट्रैक्टर रैली पर दिल्ली पुलिस के साथ निर्णायक चर्चा है। मंगलवार को दिल्ली पुलिस के आला अधिकारी दीपेंद्र पाठक, संजय सिंह और संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े डॉ. दर्शनपाल, योगेंद्र यादव, बलवीर सिंह राजेवाल आदि की मंत्रणा हुई। इस दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से अपील की गई कि ट्रैक्टर रैली वापस ले लें। किसान संगठन हर हाल में रैली पर अड़े रहे।
इसके बाद दिल्ली पुलिस ने वैकल्पिक रोडमैप तैयार किया। दिल्ली पुलिस ने कुंडली-पलवल-मानेसर (केएमपी) एक्सप्रेस वे पर शांति की शर्त पर ट्रैक्टर रैली की अनुमति देने पर सैद्धांतिक हामी भरी। किसान संगठनों ने शांतिपूर्ण ट्रैक्टर रैली का भरोसा तो दिया लेकिन केएमपी के बजाय आउटर रिंड रोड की ही मांग रख दी। तर्क दिया गया कि जितनी बड़ी तादाद में ट्रैक्टर और किसानों का जमावड़ा हो सकता है, उससे केएमपी पर स्थिति चरमरा जाएगी। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर तो नजर है ही, लेकिन उससे पहले बुधवार को 11 बजे से विज्ञान भवन में दिल्ली पुलिस के साथ निर्णायक चर्चा भी अहम है। दिल्ली पुलिस से बातचीत में रास्ता न निकलने या सुप्रीम कोर्ट से स्पष्ट आदेश न आने की सूरत में ट्रैक्टर रैली का मुद्दा सरकार से वार्ता के एजेंडे में भी प्रमुख हो सकता है। भाकियू डकौंदा के प्रधान बूटा सिंह बुर्जगिल को उम्मीद है कि ट्रैक्टर रैली की राह निकल आएगी। सरकार यदि रैली रोकने की बात करेगी, तो संयुक्त किसान मोर्चा लिखित मंजूरी मांगेगा। उधर, दिल्ली पुलिस ‘गड़बड़ी’ की आशंका को लेकर खासा चिंतित है। ऐसे में दिल्ली पुलिस सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रख सकती है।
एनआईए समन पर चर्चा
ट्रैक्टर रैली पर चर्चा जितनी अहम है, उससे तनिक भी कम अहम एनआईए समन का मुद्दा नहीं है। दसवें दौर की वार्ता की शुरुआत में एनआईए समन पर भी चर्चा होगी। संयुक्त किसान मोर्चा एनआईए की कार्रवाई पर सरकार से विरोध जताएगा। याद दिलाएगा कि पिछली बैठक में सरकार ने भरोसा दिया था कि आंदोलनकारी किसानों या उनके समर्थकों पर ‘कार्रवाई’ नहीं होगी। पिछली बैठक के बाद किसान नेताओं समेत कई को एनआईए ने समन भेजा गया। दिलचस्प है कि इस वार्ता का हिस्सा वे किसान नेता भी होंगे जिन्हें एनआईए का समन भेजा गया है। इनमें बलदेव सिंह सिरसा और हरमित सिंह कादियां हैं। इतना ही नहीं संयुक्त किसान मोर्चा के अंदरुनी विवादों में घिरे भाकियू चढूनी के गुरनाम सिंह चढूनी भी वार्ता में शामिल होंगे। हालांकि, मंगलवार को उन्होंने दिल्ली से दूरी बना रखी थी और सिरसा में थे।
होमवर्क में डायलॉग से डेडलॉक तक
दसवें दौर की वार्ता से एक दिन पहले मंगलवार को किसान संगठनों ने होम वर्क किया। ट्रैक्टर रैली और एनआईए समन सबसे अहम है। डायलॉग में संभावना है कि एनआईए समन पर सरकार थोड़ा नरम पड़ेगी तो ट्रैक्टर रैली पर किसान संगठन। डेडलॉक की स्थिति यह है कि संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से फिर तीनों कृषि कानूनों की वापसी और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी गारंटी के अलावा कोई विकल्प मंजूर नहीं का संदेश। पिछली बैठक में सरकार ने छोटी कमेटी बनाने या सुप्रीम कोर्ट के पैनल में आपत्ति दर्ज कराने का जो प्रस्ताव दिया था, उसे भी नकारने की तैयारी है। जाहिर है ऐसे में गतिरोध कम होने के आसार नजर नहीं आ रहे।
मंगल का 'मंगल'
मंगलवार को जहां ट्रैक्टर रैली को लेकर दिल्ली पुलिस के साथ किसान नेताओं की थोड़ी बात हुई, वहीं सुप्रीम कोर्ट के विशेष पैनल की पहली औपचारिक बैठक भी हुई। समिति के अनिल धनवट ने अशोक गुलाटी और प्रमोद जोशी के साथ चर्चा कर 21 जनवरी से कामकाज शुरू करने का फैसला लिया। 20 की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट इस पैनल के एक सदस्य भाकियू मान के भूपिंदर सिंह मान के अलग होने के बाद की स्थिति पर संज्ञान ले सकता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने मंगलवार को ही किसी और मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति किसी मसले पर अपनी राय व्यक्त कर चुका है तो वह उसी मामले को लेकर गठित होने वाली कमेटी का सदस्य बनने के लिए अयोग्य नहीं हो जाता। चीफ जस्टिस ने कहा कि कमेटी के सदस्य जज नहीं होते हैं और उनकी राय में भली-भांति बदलाव आ सकता है।
जाहिर है कि मामला दूसरा था लेकिन इसे किसानों के मसले के हल के लिए बनाये गए सुप्रीम कोर्ट के पैनल से जुड़े सदस्यों पर उठाए जा रहे सवाल से जोड़कर भी देखा जा सकता है। किसान संगठनों ने इन सदस्यों पर सवाल उठाए थे कि इनके लेख-विचार अखबारों और बहस के साथ-साथ नजरिया सरकार के पक्ष में रहे हैं, इसलिए ये भरोसे के लायक नहीं। उधर सुप्रीम कोर्ट के इसी पैनल के अनिल धनवट ने पहली रस्मी बैठक के बाद साफ किया कि आंदोलनकारी किसानों को वार्ता के लिए मनाना चिंता और चुनौती दोनों है।
आज की वार्ता का सिक्सर फार्मूला
किसान
1. ट्रैक्टर रैली की इजाजत मिले
2. एनआईए के समन-दमन बंद हों
3. तीनों कृषि कानून वापस हों
4. न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी मिले
5 सुप्रीम कोर्ट के पैनल पर भरोसा नहीं
6. कोई वैकल्पिक कमेटी मंजूर नहीं
सरकार
1. तीनों कृषि कानूनों के अमल पर रोक, जिद छोड़ें
2. न्यूनतम समर्थन मूल्य की लिखित गारंटी
3. सरकार या सुप्रीम कोर्ट की कमेटी में बिंदुवार रखें अपना पक्ष
4. छोटी कमेटी बनाकर हर आपत्तियों पर चर्चा
5. कुछ और विकल्प सुझाएं तो संशोधन को तैयार
6. सर्दी, कोरोना को देखते हुए ट्रैक्टर रैली व आंदोलन का विचार त्यागें, जांच में दें सहयोग