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किसान आंदोलन मामले में अब सरकार की नजर सुप्रीम कोर्ट पर

Fri, 25 Dec 2020 03:20 AM IST
देव कश्यप हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
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किसान आंदोलन (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
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किसान आंदोलन मामले में केंद्र सरकार की नजर अब सुप्रीम कोर्ट पर है। सरकार की योजना किसान संगठनों से लगातार बातचीत की पेशकश करते रहने और इस दौरान कृषि कानूनों के पक्ष में माहौल बनाने के लिए अभियान जारी रखने की है। सरकार यह संदेश देना चाहती है कि किसान संगठन वार्ता के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव की ओर से बृहस्पतिवार को फिर से वार्ता की पेशकश करना इसी रणनीति का हिस्सा है।

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उच्चपदस्थ सूत्रों ने बताया कि सरकार किसी भी सूरत में दबाव में नहीं आएगी। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी और कानून वापसी का कोई सवाल ही नहीं है। चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले की सुनवाई के दौरान बातचीत पर जोर दिया था। ऐसे में अब सरकार की निगाह शीतकालीन अवकाश के बाद इस मामले में शीर्ष अदालत की सुनवाई पर है। इस बीच सरकार किसान संगठनों से लगातार बातचीत की पेशकश करेगी और देश भर में इन कानूनों के समर्थन में अपना अभियान भी जारी रखेगी।

कोर्ट में सब कुछ सरकार के पक्ष में नहीं
सरकार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के जरिए विवाद का हल निकलने की उम्मीद है, मगर ऐसा नहीं है कि यहां सब कुछ सरकार के पक्ष में है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को बातचीत जारी रहने तक तीनों नए कानूनों को टालने का सुझाव दिया था। अदालत ने आंदोलन के राष्ट्रीय मुद्दा बन जाने की संभावना व्यक्त करते हुए अपनी चिंता जाहिर की थी। हालांकि शीर्ष अदालत ने भी इस दौरान बातचीत पर लगातार जोर दिया था।
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नए पत्र में भी नया कुछ नहीं
संयुक्त सचिव के नए पत्र में भी कुछ भी नया नहीं है। पहले की तरह सरकार ने किसान संगठनों से हर मुद्दे पर बातचीत की बात कही है। विवाद वाले मुख्य मुद्दे एमएसपी पर कानूनी गारंटी की मांग को सरकार ने अतार्किक बताया है। जबकि कानून वापसी की मांग पर इस पत्र में सरकार की ओर से कुछ नहीं कहा गया है। पत्र में इससे पहले हुई वार्ता के दौरान सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों का जिक्र किया गया है।

बढ़ते तकरार का सामना करने की तैयारी
मुख्य मुद्दों पर पेच कायम रहने के कारण सरकार और आंदोलनरत किसान संगठनों में तकरार बढ़ने के आसार हैं। हालांकि सरकार ऐसी स्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। सरकार के सूत्र का कहना है कि कानून वापसी और एमएसपी पर कानूनी गारंटी की मांग को किसी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। जबकि किसान संगठन इससे कम पर बातचीत के लिए तैयार ही नहीं है।

समर्थक संगठनों की सूची तैयार
इस बीच सरकार ने नए कृषि कानूनों का समर्थन करने वाले और वार्ता के इच्छुक किसान संगठनों की सूची तैयार कर ली है। इनकी संख्या सौ से अधिक है। सरकार इनमें से बेहतर प्रभाव रखने वाले किसान संगठनों की अलग से सूची बना रही है। सूत्रों का कहना है कि कानून समर्थक और वार्ता के इच्छुक किसान संगठनों से बातचीत हो सकती है। मगर इससे पहले सरकार फिलहाल आंदोलनरत किसान संगठनों के भावी रुख का इंतजार करेगी।

आंदोलन का दायरा न बढ़ने से सरकार को राहत
किसानों का आंदोलन बीते करीब एक महीने से चल रहा है। पहले सरकार को आशंका थी कि आंदोलन का दायरा बढ़ सकता है। हालांकि यह आंदोलन मुख्य रूप से अब भी हरियाणा, पंजाब और पश्चिम उत्तर प्रदेश तक ही सीमित है। सरकार ने अपनी ओर से इस आंदोलन का दायरा न बढ़ने देने और इसे पंजाब तक सीमित करने की रणनीति बनाई थी।

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