लालकिले की हिंसा से आहत किसानों ने वापसी शुरू कर दी है। सिंघु और गाजीपुर सरीखे प्रमुख मोर्चों से किसानों के पलायन पर किसान नेता सकते में हैं। अब उन्होंने किसानों का मान मनौव्वल शुरू कर दी है।
भीड़ जुटाने के लिए हर जिले से दस ट्रैक्टर लाने की रणनीति पर काम शुरू
किसानों को बनाए एक साथ रखने और मोर्चों पर हर जिले से 10 ट्रैक्टर और 100 किसान लाने व ब्लॉक स्तर से किसानों की भीड़ जुटाने की रणनीति पर काम शुरू हो गया है। किसानों के आंदोलन छोड़कर जाने पर संयुक्त किसान मोर्चा के जोगिंदर सिंह उगरहां ने कहा, ज्यादातर किसान 26 जनवरी के लिए आए थे, इसलिए वह वापसी कर रहे हैं। लेकिन हिंसा के चलते किसानों में नाराजगी है।
उन्होंने कहा, लाल किले की हिंसा से आंदोलन को धक्का लगा है, हालांकि जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी और किसान फिर वापस आएंगे। भारतीय किसान यूनियन ने कहा, वह हालात पर नजर रखे हैं। किसान आंदोलन रुकेगा नहीं, चलता रहेगा।
भारतीय किसान यूनियन के महासचिव युद्धवीर सिंह ने कहा, हिंसा ने आंदोलन की कमर तोड़ दी है। 60 दिन से शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा आंदोलन सरकार पर दबाव बनाने में भी कामयाब रहा था, किंतु अब स्थितियां अलग हैं। हालांकि हमने उम्मीद नहीं छोड़ी है।
तिरंगे का अपमान आंदोलन का मकसद कभी नहीं था
गाजीपुर से लौट रहे किसान स्वर्णदीप ने कहा, मंगलवार को ट्रैक्टर रैली के नाम पर हुई हिंसा और तिरंगे का अपमान किसान आंदोलन का मकसद नहीं था। इसलिए अब यहां रुकने का कोई फायदा नहीं दिख रहा है।
सिंघु, गाजीपुर बॉर्डर पर तेजी से कम हो रहे किसान
किसानों का सबसे ज्यादा पलायन सिंघु और गाजीपुर सीमा से हो रहा है, जबकि आंदोलन के आगाज के साथ ही सिंघु बॉर्डर पर कम से कम 25 से 30 हजार और गाजीपुर में करीब 10 से 15 हजार की संख्या में किसान मौजूद रहते थे, जो कि इस घटना के बाद से लगातार घट रहे हैं, अब इन दोनों ही मोर्चों पर महज पांच से सात हजार किसान रह गए हैं।