प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन परियोजना को गति मिलने वाली है। ठाणे जिले के भिवंडी में करीब एक साल से लटके जमीन अधिग्रहण का मामला सुलझ गया है। भिवंडी के किसान अपनी 61 हेक्टेयर जमीन देने के लिए तैयार हो गए हैं। ठाणे के जिलाधिकारी राजेश नार्वेकर ने कई महीनों की मशक्कत के बाद आखिरकार किसानों को मना लिया है।
भिवंडी तालुका में बुलेट ट्रेन के लिए जमीन अधिग्रहण का मामला एक साल से लटका हुआ था। मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलाई जाने वाली बुलेट ट्रेन रेलवे लाईन के साथ ही डिपो के लिए भी जमीन अधिगृहीत की जानी है। बुलेट ट्रेन परियोजना से भिवंडी में 10 गांव के किसानों की जमीन प्रभावित हो रही है।
इन 10 गांव के किसानों की 27 हेक्टेयर जमीन रेलवे लाइन के लिए और बाकी जमीन डिपो के लिए अधिगृहीत की जानी है। राजस्व विभाग के अधिकारी ने मई महीने में ही भिवंडी में जमीन अधिग्रहण के लिए पैमाईश शुरू की थी लेकिन, मनसे के कार्यकर्ताओं ने जबरन रुकवा दिया था। किसान भी जमीन अधिग्रहण के खिलाफ थे।
किसानों के विरोध को देखते हुए जिलाधिकारी राजेश नार्वेकर ने किसानों से बातचीत के लिए भिवंडी जिले के प्रांत अधिकारी डॉ मोहन नलंदकर को जिम्मेदारी सौंपी थी। नलंदकर ने किसानों से कई दौर की वार्ता की। किसान संगठन के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में किसानों ने कुछ शर्तों के साथ अपनी जमीन देने की हामी भर दी है।