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- फोटो : amar ujala
किसान आंदोलन ने बिखरे विपक्ष को एकजुट कर दिया है। किसानों आंदोलन के कारण अब तक कांग्रेस से दूरी बनाने वाले बसपा, शिरोमणि अकाली दल और आम आदमी पार्टी भी विपक्ष के सुर में सुर मिलाती दिखी। इसी वजह से इन दलों ने भी राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार करने का फैसला किया।
कांग्रेस से दूरी के बावजूद बसपा, शिरोमणि अकाली दल और आप साथ आए
करीब दो साल बाद ये मौका आया है कि एक मुद्दे पर कई ऐसे दल भी विरोध में दिख रहा हैं जो या तो कांग्रेस के साथ खड़े होने में परहेज करते थे या फिर सरकार के समर्थन में तटस्थ रहकर अपने को अलग रखते थे। कांग्रेस के लिए सबसे सुखद शिवसेना का पहली बार खुलकर उसके साथ खड़ा होना है।
महाराष्ट्र में साथ सरकार बनाने के बावजूद कई मौकों पर शिवसेना भाजपा के इस तरह से विरोध में नहीं दिखी। महाराष्ट्र में किसान रैली में एनसीपी नेता शरद पवार के साथ शिवसेना नेता भी शामिल हुए।
कांग्रेस की विपक्षी एकजुटता में यूपी के दल सपा और बसपा लंबे समय से पलीता लगाते रहे हैं। सपा इस बार खुलकर साथ में जबकि बसपा ने 16 दलों के गठजोड़ से खुद को अलग रखा। बसपा ने विपक्ष के बहिष्कार के फैसले के बाद नफा-नुकसान का अंदाजा लगाकर शुक्रवार को अभिभाषण के ठीक पहले इसमें शामिल नहीं होने का एलान किया।