किसानों के चक्का जाम के दौरान कई जगह सड़कें जाम की गईं तो कई जगह सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। दिल्ली में इक्का दुक्का जगहों पर किसानों के समर्थन में प्रदर्शन भी हुए। वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के संसदीय क्षेत्र मुरैना में किसानों ने चार जगह चक्का जाम किया।
हाईवे जाम के आंदोलन के बाद किसान संगठन आगे की रणनीति बनाने के लिए जुट गए हैं। अगले सप्ताह फिर से किसान संगठन नए आंदोलन के साथ मैदान में उतरेंगे। किसान संगठनों का अब पूरा जोर सिंघू और गॉजीपुर बॉर्डर पर किसानों को जुटाने पर होगा।
किसान नेता हन्नान मौला ने अमर उजाला को बताया कि हर राज्य में हमने 120 से ज्यादा जगहों पर किसाानों ने प्रदर्शन किया। पंजाब और हरियाणा के अलावा पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र में भी चक्का जाम का असर देखने को मिला है।
मध्यप्रदेश में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के संसदीय क्षेत्र में चार जगह किसानों ने चक्का जाम किया। जल्द ही सभी किसान संगठन मिलेंगे और आगे आंदोलन की रणनीति तय करेंगे। किसान आंदोलन को कमजोर पड़ता देख संगठन फिर से संक्रिय हो गए हैं।
संगठन का पूरा फोकस हम गॉजीपुर और सिंघू बॉर्डर पर पहले जैसे भीड़ जुटाने को लेकर है। इसे लेकर संगठन ने सभी राज्य किसान इकाई को निर्देश जारी किया है कि हर गांव से किसान दिल्ली की सीमाओं पर जुटे और आंदोलन में शामिल हो।
ऑल इंडिया किसान फेडरेशन के अध्यक्ष प्रेम सिंह भंगू ने अमर उजाला को बताया कि गणतंत्र दिवस की हिंसा के बाद बॉर्डर पर आने वाले लोगों की संख्या कम हो गई है। लगातार हम संगठनों से दोबारा भीड़ जुटाने की अपील कर रहे हैं। इस हफ्ते से लोग दोबारा जुटना शुरु हो जाएंगे।
पंजाब और हरियाणा के किसान संगठनों ने हर गांव से करीब 100 से 150 लोगों को लाने के तैयारी की है। संगठन ने हर परिवार से एक व्यक्ति को दिल्ली आंदोलन में चलने की अपील की है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी कैंपेन चलाया जा रहा है कि वे आंदोलन से जुड़ें और किसानों को समर्थन दें।