सूखे की मार झेल रहे बुंदेलखंड के किसानों को सरकारों से खास राहत नहीं मिल रही है। बुंदेलखंड के उत्तर प्रदेश वाले हिस्से में सिर्फ 6 फीसदी गांवों को फसल नुकसान का मुआवजा मिला है। जबकि मध्य प्रदेश वाले हिस्से के सिर्फ पांच फीसदी गांवों में मनरेगा का काम चल रहा है। सोमवार को स्वराज अभियान के बैनर तले योगेंद्र यादव व अनुपम सिंह ने एक रिपोर्ट जारी करते हुये इसका खुलासा किया।
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले तीन महीने में दोनों राज्यों के बुंदेलखंड के तीन चौथाई गांवों में पीने का पानी मुहैया कराने में सरकारें निष्क्रिय रही हैं। बीते एक महीने में यूपी के बुंदेलखंड में 59 फीसदी गांवों के हर गांव के करीब 10 से ज्यादा परिवारों को दो जून का भोजन नहीं मिल रहा है। वहीं, 41 फीसदी गांवों में भुखमरी से हर गांव में करीब 10 से ज्यादा पशुओं की मौत हुयी है।
सरकारी आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट बताती है कि बावजूद इसके आपदा की इस स्थिति में भी दोनों राज्य सरकारों का काम निराशाजनक है। यूपी के प्रभावित जिलों के 29 फीसदी व मध्य प्रदेश में पांच फीसदी गांवों में मनरेगा के तहत काम चल रहा है। दूसरी तरफ मध्य प्रदेश में तीस फीसदी व यूपी के छह फीसदी गांवों के किसानों को ही सूखे से फसलों के बर्बाद होने का मुआवजा मिला है।
राजेंद्र सिंह के साथ पदयात्रा पर निकलेंगे योगेंद्र यादव
योगेंद्र यादव के मुताबिक, सूखा प्रभावित यूपी के सात जिलों और मध्य प्रदेश के माह जिलों के आंकड़े हैं। सर्वे 6-8 मई के बीच किया गया। इसमें यूपी के 79 व एमपी के 43 गांवों को शामिल थे। दोनों राज्यों के बुंदेलखंड का सूखा संकट अकाल की ओर बढ़ रहा है। समाज का निचला तबका भूख और गरीबी की कगार पर हैं। पशुओं के लिए भुखमरी की स्थिति है। अफसोसजनक यह कि दोनों राज्य सरकारों ने इस नाजुक मौके पर आंख मूंद रखी है।
स्वराज अभियान मराठवाड़ा व बुंदेलखंड में 21 मई से 31 मई तक नेशनल अलायन्स ऑफ पीपल्स मूवमेंट (एनएपीएम), एकता परिषद् और जल बिरादरी के साथ लातूर से महोबा तक की पदयात्रा पर निकल रहा है। इसमें योगेंद्र यादव के साथ राजेंद्र सिंह, मेधा पाटकर व पीवी राजगोपालन भी होंगे।
इन जिलों में किया गया सर्वे
यपू का बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर व महोबा और एमपी का टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना व दतिया। दूसरे प्रमुख आंकड़े-पिछले तीन महीने में यूपी के 72 फीसदी और एमपी के 74 फीसदी गांवों में सरकार की तरफ से कोई काम नहीं हुआ है। यूपी के बुंदेलखंड के 59 फीसदी व एमपी के 35 फीसदी गांवों में 10 से ज्यादा परिवारों को दो समय का भोजन भी नहीं मिल रहा है।
पशुचारा न होने से यूपी के 78 फीसदी और एमपी के 62 फीसदी गांव से पशुओं को छोड़ दिया गया है। वहीं पशुओं की असामान्य मौत भी हो रही है। 40 फीसदी गांवों में से हर गांव चालू चापाकलों की संख्या घटकर 0, 1 या 2 रह गयी है। उत्तर प्रदेश की स्थिति बेहतर है। यहां 55 फीसदी गांव 10 से ज्यादा चालू चापाकल की सीमा रेखा के ऊपर हैं। लेकिन यूपी में भी 14 फीसदी गांवों में दो या उससे भी कम चापाकल चालू हैं।