वहीं, मध्यप्रदेश में किसान आंदोलन के दौरान जून 2017 में हुए मंदसौर गोलीकांड के मुद्दे को भी हवा लग गई है। भाजपा सरकार ने किसानों में बढ़ते असंतोष को दबाने के लिए भावांतर और कृषक प्रोत्साहन जैसी योजनाएं लागू की है। कांग्रेस भी इस मुद्दे को भुनाने में दिख रही है, जिसके चलते राहुल मंदसौर दौर पर भी गए थे।
राजस्थान के सीकर में भी संपूर्ण कर्ज माफी और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने सहित विभिन्न मांगों को लेकर किसान आंदोलन पर उतरे थे। हजारों किसानों ने यहां मंडी में सभा के बाद कलक्ट्रेट पहुंचकर गिरफ्तारी दी थी। उस समय सीकर में ऐसा लगा मानों कि किसानों की अगस्त क्रांति की शुरुआत हो गई हो।
वहीं बुधवार हुई किसानों की रैली रामलीला ग्राउंड से शुरू होकर रणजीत सिंह फ्लाईओवर, टॉलस्टॉय मार्ग होते हुए संसद मार्ग पहुंची। इस दौरान किसानों ने कहा कि सरकार की नीतियां गलत हैं। सरकार को किसानों, मजदूरों और गरीबों को लेकर अपनी नीतियों को बदलने की जरूरत है। अगर सरकार अपनी नीतियां नहीं बदलेगी तो हम सरकार बदल देंगे।
उन्होंने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों को नहीं माना गया तो ये आंदोलन और भी व्यापक होगा। उनका कहना है कि अगली बार देशभर से किसान आएंगे और पूरी राजधानी का घेराव करेंगे। रैली में हिस्सा ले रहे किसान संगठन ने बताया कि नवंबर महीने में देश के 200 से ज्यादा किसान संगठन अपनी मांगों को लेकर दिल्ली का घेराव करेंगे।
किसानों की इस रैली में सीपीआई (एम) सीताराम येचुरी भी शामिल हुए हैं। इस दौरान उन्होंने मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार ने जनता को धोखा दिया है। सरकार के प्रति जनता के अंदर काफी रोष भरा हुआ है और इसीलिए लाखों की संख्या में किसान अपनी मांगों को लेकर दिल्ली पहुंचे हैं।
उन्होंने कहा कि अगर जिंदगी को बचाना है तो मोदी सरकार को हटाना है, क्योंकि अच्छे दिन तभी आएंगे जब ये सरकार जाएगी। उन्होंने कहा कि 2019 में किसान विरोधी इस सरकार को हटाने की हम पूरी कोशिश करेंगे, ताकि एक बेहतर भारत बनाया जा सके। इस दौरान उन्होंने देशव्यापी आंदोलन का भी ऐलान किया।
ये है किसानों की मांग?
इस चार्टर में मांग की गई है कि रोज बढ़ रही कीमतों पर लगाम लगाई जाए, खाद्य वितरण प्रणाली की व्यवस्था को ठीक किया जाए, मौजूदा पीढ़ी को उचित रोजगार मिले, सभी मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी भत्ता 18,000 रुपया प्रतिमाह तय किया जाए। इसके अलावा इसमें ये बी कहा गया है कि मजदूरों के लिए बने कानून में मजदूर विरोधी बदलाव न किए जाएं, किसानों के लिए स्वामीनाथन कमिटी की सिफारिशें लागू हों, गरीब खेती मजदूर और किसानों का कर्ज माफ हो।