केन्द्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए भविष्य की तकनीक पर काम कर रही है। यह तकनीक किसानों की इनकम बढ़ाने के साथ सटीक-सटीक मौसम के पूर्वानुमान की जानकारी भी देगी। जल्द ही ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लॉउड मशीन लर्निंग, सैटेलाइड इमेजनरी और एडवांस्ड एनालिटिक्स की मदद से छोटे और मझोले किसानों के दिन फिरने की तैयारी हो रही है।
बुवाई के सही वक्त का चलेगा पता
सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया) में एडवाइजर अन्ना रॉय के मुताबिक सरकार का उद्देश्य है कि कैसे तकनीक की मदद से किसानों की इनकम बढ़ाई जाए।
उन्होंने बताया कि सरकार ने रिमोट सेंसिंग, इमेज रिक्गनाइजेशन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स डिवाइसेज, ड्रोन और इसरो की मदद से डाटा एकत्र करने का काम शुरू कर दिया। इसका फायदा यह होगा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से किसानों को बुवाई का वक्त, कीड़ों के हमले और मौसम का सटीक-सटीक पूर्वानुमान का बहुत पहले ही पता चल जाएगा। इससे पहले इस तकनीक को कर्नाटक में लागू किया गया था, जिसके बाद वहां के किसानों की आय में 31 फीसदी का इजाफा हुआ।
10 जिलों में पायलेट प्रोजेक्ट शुरू
नीति आयोग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर पर बहुत से काम कर रहीं अन्ना रॉय ने बताया कि सरकार ने इसके लिए 10 जिलों में पायलेट प्रोजेक्ट शुरू कर दिया है। यह प्रोजेक्ट 10 एस्पीरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स असम, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान समेत अन्य राज्यों में शुरू हो चुका है। इसके लिए नीति आयोग ने आईबीएम के साथ साझेदारी की है। उन्हों बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से ने केवल कृषि में संसाधनों का सही-सही इस्तेमाल हो सकेगा, बल्कि फसल पैदावार और वैज्ञानिक तरीके खेती में भी मदद मिलेगी।
रॉय के मुताबिक इस प्रोजेक्ट का मकसद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से जलवायु आधारित कृषि तकनीक और फसल निगरानी की प्रणालियों की पहचान, कीट या रोग प्रकोप की पहले ही भविष्यवाणी करना शामिल है। उनके मुताबिक अभी डाटा एकत्र करने का काम चल रहा है और जून में खरीफ की बुवाई होगी, लेकिन जब दिसंबर में रबि की बुवाई का वक्त आएगा, तब तक यह तकनीक 100 फीसदी काम करना शुरू कर देगी। जिसके बाद इस प्रोजेक्ट को देश के दूसरे जिलों में भी लागू किया जाएगा।