ललितपुर के खेतों से सूखे के कारण भले ही फसलें पैदा न हो पाई हों, लेकिन हर सूखे खेत से कर्ज की बेल जरूर निकली, जिसमें फंसकर किसानों का दम निकल गया। ग्राम खड़ोवरा की नन्हीं दुलैया ने अपने सुहाग को खोकर अभी हिम्मत जुटाकर जीना शुरू किया था कि उसका जवान बेटा भी साहूकारों के तकादे व सूखी फसल का दबाव नहीं झेल पाया और उसने आत्महत्या कर ली। इतना सब होने के बाद भी प्रशासन ने पीड़ितों की सुध नहीं ली है। पीड़ित ने शासन-प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।
उस महिला की स्थिति किस तरह से बयां की जाए, जिसने एक साल में ही पहले अपना सुहाग खोया था। अब उसका जवान बेटा संसार छोड़कर चला गया। जिला मुख्यालय से 12 किमी. दूर स्थित ग्राम खड़ोवरा की नन्हीं दुलैया बताती हैं कि लगातार पड़ रहे सूखे ने उनके पूरे परिवार को ही निगल लिया। लगातार फसल बर्बादी के कारण उनके पति जंडैल सिंह ने केसीसी से एक लाख रुपए कर्ज लिया और साहूकारों से डेढ़ लाख रुपए कर्ज लिया। लगातार ब्याज बढ़ने से कर्ज चार लाख रुपए हो गया। चौथी बेटी की शादी व दो बेटों के भविष्य की चिंता ने चिता का रूप रख लिया।
तंगहाली में भी परिवार को ढांढस बंधाने वाले जंडैल सिंह 12 जून 2014 को हिम्मत हार बैठे और आत्महत्या कर जीवन खत्म कर लिया। पिता की मौत के बाद घर की जिम्मेदारी बड़े पुत्र गजेंद्र पर आ गई। गजेंद्र ने परिवार को संभालने की कोशिश की और पिता का लिया गया कर्ज काफी हद तक चुका दिया। लेकिन चौथी बहन की शादी के लिए उसे भी कर्जदार बनना पड़ गया।
बहन की शादी निपटाकर उसने किसान क्रेडिट कार्ड का कर्ज चुकाने के लिए साहूकारों से कर्ज लिया। उसे उम्मीद थी कि इस बार अच्छी फसल की पैदावार से कुछ कर्ज चुका पाएगा, लेकिन मौसम की मार ने उसकी मटर की फसल को बर्बाद कर दिया। बर्बाद फसल और कर्ज के बोझ से दबे गजेंद्र ने इसी साल फरवरी 2016 में आत्महत्या कर ली।
पिता-पुत्र की मौत के बाद गांव के साहूकार सांत्वना जताने आते तो हैं, लेकिन अपने कर्ज के बारे में पूछना नहीं भूलते। पिछले चार महीने से उनका राशन कार्ड भी जमा है और कोई सरकारी मदद भी नहीं मिली है। नन्हीं दुलैया कहतीं है कि सरकार कुछ रहम करे, प्रशासन उनकी सहायता करे। अब केवल एक बेटा ही बचा है, जिसकी उम्र अभी खेतों पर काम करने लायक नहीं है।
किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट खत्म होने के बाद साहूकारों का सहारा ही किसानों के लिए आखिरी सहारा बन रहा है। साहूकार भी दस से बीस फीसदी ब्याज दर का कर्ज वसूलने के लिए हर रास्ता अपनाने को तैयार हैं।