देश में कृषि कर्ज माफी बड़ा चुनावी, वोट कबाडू तथा विवादित मुद्दा रहा है। इसके समर्थन व विरोध में स्वर उठते रहे हैं। अब एक अध्ययन में पाया गया है कि कि यह किसानों की समस्याओं के खात्मे का कोई रामबाण नहीं है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कर्जमाफी को किसानों के संकट का एकमुश्त समाधान माना जाता है, जबकि कृषक कई परेशानियों से ग्रस्त हैं, जिनके कारण देश में खेती का कारोबार अव्यवहारिक बन गया है। फसल उत्पादन चक्र के कारण किसानों का कर्जमुक्त होना असंभव है। इसी तरह आय की अनिश्चिता भी उन्हें कर्ज के चक्र से बाहर नहीं निकलने देती है। इसलिए कर्ज माफी मूल मुद्दों को हल किए बगैर अस्थायी समाधान प्रदान करती है, कुछेक सालों के अंतराल में किसानों को बार-बार इसकी जरूरत महसूस होती है।
कर्जमाफी पर इस आंकड़े आधारित अध्ययन से नीति निर्माताओं, केंद्र व राज्य सरकारों व शोधार्थियों समेत सभी भागीदारों को मदद मिल सकती है। इसके आधार पर संकटग्रस्त किसानों की मदद के लिए ठोस नीति बनाने में आसानी होगी। अध्ययन का खर्च नाबार्ड ने उठाया है और भारत कृषक समाज के अधीन इसे डॉ. श्वेता सैनी, सिराज हुसैन व डॉ. पुलकित खत्री ने किया है।