फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मोटापा के कारण घट रही संभोग की इच्छा, टूटने की कगार पर पहुंचे वैवाहिक संबंध

Fri, 27 Sep 2019 08:46 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला
विज्ञापन
मोटापा
विज्ञापन

मोटापा (Obesity) कई बीमारियों का घर माना जाता है। इसके कारण लोगों में डाइबिटीज, हाइपरटेंशन, किडनी, लीवर से संबंधित अनेक समस्याएं पैदा होने लगती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मोटापे के कारण लोगों की सेक्स लाइफ भी प्रभावित होने लगी है। कई बार यह दांपत्य संबंध टूटने का कारण तक बन रही है। अगर दंपत्ति में पुरुष और महिला दोनों ही मोटे हैं तो यह समस्या ज्यादा गंभीर हो जाती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि इस संवेदनशील स्थिति से बचने के लिए मोटापे से छुटकारा पाने की समय रहते कोशिश करनी चाहिए। क्योंकि एक बार मोटापा बढ़ने के बाद वजन कम कर पाना आसान नहीं होता। कई बार वजन कम करने के लिए बेरियाट्रिक सर्जरी कराना ही एकमात्र विकल्प बचता है।

विज्ञापन


सामान्य तौर पर एक युवा स्वस्थ जोड़े को हफ्ते में दो से तीन बार सहवास की इच्छा होती है, जो किसी-किसी जोड़े में पंद्रह दिनों में एक बार भी हो सकती है। लेकिन अगर कई महीनों तक सहवास की इच्छा जागृत नहीं होती है, तो स्वास्थ्य विज्ञान की दृष्टि से यह चिंता का विषय होना चाहिए।

बीएलके अस्पताल के डॉक्टर दीप गोयल ने अमर उजाला को बताया कि उनके पास ऐसे भी मरीज आ रहे हैं, जिन्हें साल-साल भर से दांपत्य सुख हासिल नहीं हुआ है। इसका कारण उनके शरीर का बेतरतीब वजन बढ़ जाना है। स्वाभाविक रुप से इसका असर उनके मनोविज्ञान और व्यवहार पर भी पड़ रहा है। कई बार इससे उनका परिवार भी टूटने की कगार पर पहुंच रहा है।

क्यों घट जाती है सेक्स की इच्छा?

एम्स के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉक्टर संदीप कुमार के मुताबिक सेक्स की इच्छा के लिए पुरुषों में एंड्रोजन और महिलाओं में एस्ट्रोजन नाम का हार्मोन प्राकृतिक रुप से निकलता है। हमारे शरीर में इन हार्मोन्स के रिसेप्टर होते हैं, जो इनके संपर्क में आने के बाद सेक्स की इच्छा पैदा करते हैं। लेकिन जब किसी व्यक्ति में ज्यादा वसा या फैट इकट्ठा हो जाती है, तो इन हार्मोन्स के रिसेप्टर वसा के नीचे दब जाते हैं, जिससे हार्मोन्स उन तक नहीं पहुंच पाते। इससे सहवास की इच्छा नहीं होती या बहुत कम हो जाती है।

क्या है उपाय

डॉक्टर दीप गोयल के मुताबिक अगर वजन की मात्रा एक सीमा तक है, तो उसे खानपान और व्यायाम के जरिए सुधारा जा सकता है, लेकिन अगर यह एक सीमा के अधिक हो जाता है, तो बेरियाट्रिक सर्जरी करके वजन नियंत्रित किया जा सकता है। इस विधि में आंत की लंबाई कम कर दी जाती है। इससे व्यक्ति को बहुत कम खाना खाने के बाद ही पेट भरने की अनुभूति होने लगती है और ज्यादा खाने की इच्छा नहीं होती। कम खाना खाने से उसका वजन लगातार कम होने लगता है। कई मामलों में अगर मरीज डाइबिटीज की दवा ले रहा है तो उस पर भी नियंत्रण हो जाता है।

विज्ञापन


इस तरह की सर्जरी के बाद व्यक्ति को विशेषज्ञ की सलाह के हिसाब से कुछ दिनों तक आहार लेना पड़ता है, जिससे उसमें कमजोरी का अहसास न हो। बाद में व्यक्ति सामान्य तौर पर अपने हिसाब से भोजन का चयन कर सकता है।

भारत में मोटापे की स्थिति

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि अगर मोटापे पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो आने वाले समय में भारत 'मोटे लोगों की राजधानी' बन सकता है। इस समय लगभग 65 फीसदी पुरुष, लगभग 50 फीसदी महिलाएं और शहरों के 40 फीसदी बच्चे मोटापे का शिकार हैं। ज्यादा फास्ट फूड खाने, शारीरिक गतिविधि कम होने और बदलती जीवन शैली के कारण यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।

ज्यादा खाने की इच्छा क्यों?

दरअसल, हमारे शरीर में ग्रेलिन नाम का हार्मोन हमारे अंदर खाने की इच्छा जागृत करता है। लेकिन बचपन से ही हमें ज्यादा खाने के लिए प्रेरित किया जाता है। इस तरह कम उम्र ज्यादा खाना तो चल जाता है क्योंकि व्यक्ति खेलकूद में सक्रिय होता है। लेकिन बाद में जब उसकी शारीरिक गतिविॆधि कम होने लगती है, तो यही भोजन उसके लिए ज्यादा हो जाता है। आंत में ज्यादा खाने की जगह एक बार बन चुकी होती है, इसलिए बाद में शरीर की जरुरत भर का खाना खाने के बाद भी हमें भूख का अहसास होता रहता है। इसके कारण हम जो भी अतिरिक्त खाते हैं, वह मोटापे का कारण बनता है।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें