मोटापा (Obesity) कई बीमारियों का घर माना जाता है। इसके कारण लोगों में डाइबिटीज, हाइपरटेंशन, किडनी, लीवर से संबंधित अनेक समस्याएं पैदा होने लगती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मोटापे के कारण लोगों की सेक्स लाइफ भी प्रभावित होने लगी है। कई बार यह दांपत्य संबंध टूटने का कारण तक बन रही है। अगर दंपत्ति में पुरुष और महिला दोनों ही मोटे हैं तो यह समस्या ज्यादा गंभीर हो जाती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि इस संवेदनशील स्थिति से बचने के लिए मोटापे से छुटकारा पाने की समय रहते कोशिश करनी चाहिए। क्योंकि एक बार मोटापा बढ़ने के बाद वजन कम कर पाना आसान नहीं होता। कई बार वजन कम करने के लिए बेरियाट्रिक सर्जरी कराना ही एकमात्र विकल्प बचता है।
एम्स के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉक्टर संदीप कुमार के मुताबिक सेक्स की इच्छा के लिए पुरुषों में एंड्रोजन और महिलाओं में एस्ट्रोजन नाम का हार्मोन प्राकृतिक रुप से निकलता है। हमारे शरीर में इन हार्मोन्स के रिसेप्टर होते हैं, जो इनके संपर्क में आने के बाद सेक्स की इच्छा पैदा करते हैं। लेकिन जब किसी व्यक्ति में ज्यादा वसा या फैट इकट्ठा हो जाती है, तो इन हार्मोन्स के रिसेप्टर वसा के नीचे दब जाते हैं, जिससे हार्मोन्स उन तक नहीं पहुंच पाते। इससे सहवास की इच्छा नहीं होती या बहुत कम हो जाती है।
डॉक्टर दीप गोयल के मुताबिक अगर वजन की मात्रा एक सीमा तक है, तो उसे खानपान और व्यायाम के जरिए सुधारा जा सकता है, लेकिन अगर यह एक सीमा के अधिक हो जाता है, तो बेरियाट्रिक सर्जरी करके वजन नियंत्रित किया जा सकता है। इस विधि में आंत की लंबाई कम कर दी जाती है। इससे व्यक्ति को बहुत कम खाना खाने के बाद ही पेट भरने की अनुभूति होने लगती है और ज्यादा खाने की इच्छा नहीं होती। कम खाना खाने से उसका वजन लगातार कम होने लगता है। कई मामलों में अगर मरीज डाइबिटीज की दवा ले रहा है तो उस पर भी नियंत्रण हो जाता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि अगर मोटापे पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो आने वाले समय में भारत 'मोटे लोगों की राजधानी' बन सकता है। इस समय लगभग 65 फीसदी पुरुष, लगभग 50 फीसदी महिलाएं और शहरों के 40 फीसदी बच्चे मोटापे का शिकार हैं। ज्यादा फास्ट फूड खाने, शारीरिक गतिविधि कम होने और बदलती जीवन शैली के कारण यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।
दरअसल, हमारे शरीर में ग्रेलिन नाम का हार्मोन हमारे अंदर खाने की इच्छा जागृत करता है। लेकिन बचपन से ही हमें ज्यादा खाने के लिए प्रेरित किया जाता है। इस तरह कम उम्र ज्यादा खाना तो चल जाता है क्योंकि व्यक्ति खेलकूद में सक्रिय होता है। लेकिन बाद में जब उसकी शारीरिक गतिविॆधि कम होने लगती है, तो यही भोजन उसके लिए ज्यादा हो जाता है। आंत में ज्यादा खाने की जगह एक बार बन चुकी होती है, इसलिए बाद में शरीर की जरुरत भर का खाना खाने के बाद भी हमें भूख का अहसास होता रहता है। इसके कारण हम जो भी अतिरिक्त खाते हैं, वह मोटापे का कारण बनता है।