विदेश मंत्री ने कहा कि हाल के ट्रेंड बताते हैं कि आतंकी समूहों ने अपनी गतिविधियों को वित्तपोषित करने के लिए नए तरीके खोज लिए हैं। ये समूह नई गुमनाम वित्तीय और भुगतान तकनीकों को अपनाने में आगे हैं।
दो दिवसीय 'नो मनी फॉर टेरर' कॉन्फ्रेंस के अंतिम दिन विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि फर्जी दान और फर्जी गैर-लाभकारी संगठन आतंक के वित्तपोषण के स्त्रोत बन गए हैं।
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विदेश मंत्री ने आगे कहा कि हाल के ट्रेंड बताते हैं कि आतंकी समूहों ने अपनी गतिविधियों को वित्तपोषित करने के लिए नए तरीके खोज लिए हैं। ये समूह नई गुमनाम वित्तीय और भुगतान तकनीकों को अपनाने में आगे हैं।
जयशंकर ने कहा, जैश-ए-मोहम्मद या हरकत-उल-मुजाहिदीन जैसे सीमा पार के आतंकी समूह और उनके प्रतिनिधि भारत की धरती पर आंतक के बर्बर कृत्यों को अंजाम देने के लिए तय वित्तीय मदद पर फलते-फूलते हैं।
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उन्होंने आगे कहा, सीमा पार हमलों के पीछे समर्थन है। विडंबना यह है कि आतंकवाद के खिलाफ अधिकारियों की कोई भी प्रतिक्रिया उनकी भौगोलिक सीमाओं पर रुक जाती है, क्योंकि वहां उनका अधिकार क्षेत्र समाप्त हो जाता है।