इन दिनों यूपी के पांच जिलों में एक अफवाह ने हड़कंप मचाया हुआ है। जिसमें बताया जा रहा है कि उत्तराखंड की सीमा पर बसे सहारनपुर और बिजनौर को इस पहाड़ी राज्य में शामिल किया जा रहा है। दावा ये भी है कि इन दोनों जिलों के अलावा मुजफ्फरनगर, शामली और मेरठ को पडोसी राज्य हरियाणा में शामिल किया जाएगा, जिसका प्रस्ताव तीनों राज्यों की ओर से केंद्र सरकार को भेजा जा चुका है और दो महीने पहले प्रधानमंत्री मोदी भी इसे हरी झंडी दे चुके हैं।
वेस्ट यूपी में हड़कंप मचा देने वाली इस खबर पर जब अमर उजाला ने जांच पड़ताल की इसमें कोई सच्चाई नजर नहीं आई। काफी हद तक यह सारा मामला फर्जी निकला।
मामले में जब प्रदेश शासन में प्रमुख सचिव जितेन्द्र कुमार से बात की गई तो उन्होंने इस तरह की किसी भी जानकारी से इंकार किया। उन्होंने जानकारी दी कि फिलहाल इस तरह का कोई प्रस्ताव सरकार के पास नहीं है। शासन के अन्य सूत्रों से भी इस संबंध में जानकारी की गई, वहां से भी इस तरह के किसी प्रस्ताव के सरकार के पास होने की बात से इंकार किया गया है।
पढ़ें- बाबरी विध्वंस की 25वीं बरसी पर अलर्ट, केन्द्र सरकार ने राज्यों को जारी की एडवायजरी
ये था मामला
यूपी
बीते कुछ दिनों से वेस्ट यूपी के कई जिलों में फेसबुक और सोशल मीडिया पर एक मैसेज वायरल हो रहा था, जिसमें दावा किया जा रहा था कि केंद्र की भाजपा सरकार यूपी के पांच जिलों को हरियाणा और उत्तराखंड में करना चाहती है। मैसेज में उसके पीछे कई वजहें बताई जा रही थी। दावा किया जा रहा था कि इसके पीछे केंद्र की भाजपा सरकार एक तीर से कई निशाने साधना चाहती है, सबसे पहला, इस फैसले से यूपी के और विभाजन की मांग खत्म हो जाएगी।
पांच जिले हटने से वेस्ट यूपी और हरित प्रदेश का मु्द्दा भी खत्म हो जाएगा। ऐसा होने पर हाईकोर्ट बेंच की मांग भी ठंडी पड़ जाएगी। इसके अलावा एक राजनीतिक पहलू भी है, इस कदम से भाजपा सरकार, सपा और बसपा जैसी क्षेत्रीय पार्टियों को भी बड़ी राजनीतिक चोट पहुंचा सकेगी। इन दोनों ही पार्टियों का वेस्ट में बड़ा जनाधार है खासकर बसपा का। यूपी के ये पांच जिले दलित और मुस्लिम बाहुल्य हैं।
ऐसे में यहां सपा और बसपा की गहरी पैठ है। ये भी एक तथ्य है कि यूपी में सरकार बनवाने में पांचों जिले महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके हरियाणा और उत्तराखंड में जाने से भाजपा की टेंशन भी दूर हो जाएगी। इसके अलावा अजित सिंह की जाट राजनीति पर भी असर पड़ेगा।
मैसेज के अनुसार जाट लॉबी के नाम पर अजित सिंह हमेशा से सोदेबाजी करते रहे हैं, अगर शामली, मेरठ और मुजफ्फनगर हरियाणा में चले जाते हैं, तो उत्तर प्रदेश से अजित सिंह की जाट राजनीति खत्म हो जाएगी। दावा किया जा रहा है कि इस मुद्दे पर तीनों राज्यों और केंद्र सरकार की ओर से फैसला लिया जा चुका है जो 31 मार्च तक सामने आ जाएगा।