देश में वकीलों की सबसे बड़ी संस्था बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने फर्जी मोटर बीमा दावे दायर करने वाले उत्तर प्रदेश के 28 वकीलों को कदाचार के आरोप में निलंबित कर दिया। घोटाले के खुलासे के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विशेष जांच दल (एसआईटी) को जांच सौंपी थी, जिससे बीमा कंपनियों को 300 करोड़ रुपये से अधिक की चपत लगने से बच गई।
फर्जी मोटर बीमा दावा मामले की एसआईटी छह साल से कर रही जांच
उत्तर प्रदेश में फर्जी मोटर बीमा दावा दायर करने के फर्जीवाड़े की जांच छह साल से एसआईटी कर रही है। 2015 में मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने आया था। विभिन्न बीमा कंपनियों ने अलग-अलग अदालतों में फर्जी बीमा दावे का आरोप लगाते हुए मामले दर्ज किए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने सात अक्तूबर 2015 को प्रदेश सरकार से एसआईटी गठित कर जांच करवाने के आदेश दिए थे।
सबसे अधिक मामले सहारनपुर के
फर्जी दावों के सबसे अधिक 12 मामले सहारनपुर में दर्ज हैं। मेरठ में नौ, मुरादाबाद सात, अलीगढ़ छह, गाजियाबाद-हापुड़ पांच-पांच, रायबरेली में तीन, इटावा व लखनऊ में दो-दो, अयोध्या, मैनपुरी, मुजफ्फरनगर व उन्नाव में एक-एक मामले दर्ज हैं।
प्रदेश काउंसिल से सहयोग नहीं
बीसीआई के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि यूपी बार काउंसिल की मदद नहीं मिल रही है। पीठ ने एसआईटी को फर्जीवाड़े में शामिल वकीलों के नाम सीधे बीसीआई को भेजने के निर्देश दिए। एसआईटी ने उसी दिन ई-मेल से नाम उपलब्ध करा दिए। 19 नवंबर को बीसीआई ने वकीलों को निलंबित कर दिया।