फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

RSS: 'संविधान का पालन न करना देश के खिलाफ', पारदर्शिता की मांग को लेकर कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष का संघ पर हमला

Tue, 16 Jun 2026 01:38 PM IST
Asmita Tripathi एएनआई, बंगलूरू

सार

कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने आरएसएस की सदस्यता, फंडिंग और पारदर्शिता पर सवाल उठाया। उन्होंने संगठन से वित्तीय और सदस्य संबंधी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। यह विवाद प्रियांक खरगे के पत्र के बाद बढ़ा है।

विज्ञापन
कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर तीखा हमला किया। उन्होंने इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठाया और इसकी सदस्यता और वित्तपोषण के स्रोतों का खुलासा करने की मांग की।

कांग्रेस अध्यक्ष ने क्या कहा?

विज्ञापन

आरएसएस संगठन के संबंध में कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे की ओर से हाल ही में की गई टिप्पणियों पर बोलते हुए हरिप्रसाद ने कहा कि प्रश्न कानूनी ढांचे के भीतर उठाए गए थे। हरिप्रसाद ने यहां पत्रकारों से कहा, 'प्रियांक खरगे और गृह मंत्री ने संविधान के दायरे में ही यह सवाल उठाया है। राष्ट्रीय तिरंगे का अनादर करना राष्ट्र के विरुद्ध कार्य है। संविधान का अनादर करना भी राष्ट्र के विरुद्ध कार्य है।'

संगठन के सभी सदस्यों के बारे में जानकारी दे
केपीसीसी प्रमुख ने आरएसएस को अपने आंतरिक विवरणों का खुलासा करने की चुनौती देते हुए, गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के रूप में इसकी स्थिति पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा, 'संगठन के सभी सदस्यों के बारे में विस्तृत जानकारी दें। आप इसे दुनिया का सबसे बड़ा गैर सरकारी संगठन कहते हैं, तो क्या आपको इसके सदस्यों के नाम भी नहीं बताने चाहिए?' संघ के वित्तीय लेन-देन को लेकर चिंता जताते हुए हरिप्रसाद ने इस बात की जवाबदेही की मांग की कि उसके संसाधनों का उपयोग कैसे किया जाता है।

पैसा कहां से आता है?

विज्ञापन

कांग्रेस नेता ने आगे कहा 'इस धनी संगठन के लिए पैसा कहां से आता है? उस पैसे का उपयोग कैसे किया जा रहा है? क्या इसका उपयोग जनसेवा के लिए किया जा रहा है या आपके निजी लाभ के लिए? इन खातों और विवरणों की मांग करना संविधान के प्रावधानों के अंतर्गत आता है। हरिप्रसाद की ये टिप्पणी सोमवार को प्रियांक खरगे  के उस बयान के बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत को लिखे अपने पत्र में कानूनी और संवैधानिक सवाल उठाए हैं जिनका जवाब दिया जाना चाहिए।

खरगे ने कहा 'मैं बिल्कुल स्पष्ट हूं। मैंने कुछ कानूनी मुद्दे उठाए हैं और कुछ संवैधानिक सवाल पूछे हैं। मोहन भगवत जवाब दें, आरएसएस जवाब दे। मैं क्यों जवाब दूं? वे खुद पंजीकृत नहीं हैं। वे पंजीकृत क्यों नहीं हो रहे हैं - मैं इसका जवाब कैसे दे सकता हूं?'

क्या है पूरा मामला?
आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में खरगे ने आरएसएस की कानूनी स्थिति, वित्तीय पारदर्शिता और संवैधानिक जवाबदेही पर स्पष्टता की मांग की। अपने खुले पत्र में खरगे ने कहा कि एक संगठन जो भारत और विदेश में 60,000 से अधिक शाखाओं और करोड़ों स्वयंसेवकों का दावा करता है। उसकी सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण उपस्थिति है और इसलिए उसे पारदर्शिता, जवाबदेही और संवैधानिक अनुपालन के उच्चतम मानकों का पालन करना चाहिए।

पारदर्शिता की मांग पर भगवत ने क्या कहा?
आरएसएस में पारदर्शिता की मांग को लेकर उठे राजनीतिक विवाद के बीच भगवत ने कहा कि उन्हें खरगे की मांगों का जवाब देने की जरूरत नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि संघ इस तरह के राजनीतिक हथकंडों का आदी है। भगवत ने तर्क दिया कि हिंदू धर्म भी पंजीकृत नहीं है। वे एक कार्यक्रम में पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे, जिसमें कर्नाटक सरकार द्वारा आरएसएस की गतिविधियों को गुप्त बताए जाने और इसके पंजीकरण की मांग पर चर्चा की गई थी।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें