मोदी सरकार की नागरिकता संशोधन बिल लाने की मुख्य वजह 70 साल पहले भारत और पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की गारंटी देने वाला नेहरू लियाकत समझौता है। भारत ने जहां इस समझौते के तहत अपने अल्पसंख्यकों को बराबरी का दर्जा दिया, वहीं पाकिस्तान ने इसका लगातार उल्लंघन किया।
अगस्त 1966 में भारतीय जनसंघ के सांसद निरंजन वर्मा ने सरकार से पूछा था कि नेहरू-लियाकत समझौते की स्थिति क्या है, क्या दोनों देश समझौते का पालन कर रहे हैं और पाकिस्तान कब से समझौते का उल्लंघन कर रहा है? तत्कालीन विदेश मंत्री स्वर्ण सिंह ने उत्तर दिया, पाकिस्तान लगातार अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित कर रहा है।
राज्यसभा में 1970 में तत्कालीन विदेश मंत्री दिनेश सिंह ने भी इस समझौते पर सरकार को असहाय बताया था। उनका कहना था कि बंटवारे के 20 साल बाद तक पाकिस्तान से भारत में शरणार्थी आते रहे क्योंकि पाकिस्तान ने उनकी सुरक्षा का वादा उसने पूरा नहीं किया। लेकिन उन्होंने इस समझौते को रद्द किए जाने की किसी भी संभावना से इनकार कर दिया था।