आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है कि संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में 34 सालों तक विपक्ष का कोई नेता ही नहीं था। अपने अस्तित्व में आने के बाद पहले के 17 सालों तक राज्यसभा में विपक्ष का कोई नेता नहीं था। 1977 में एक अधिनियम के माध्यम से राज्यसभा में विपक्ष के नेता का पद सृजित किया गया। इसके बाद श्याम नंदन मिश्रा उच्च सदन के पहले विपक्ष के नेता बने। वे कांग्रेस (ओ) के सदस्य थे और नरसिंह गोपालास्वामी सभा के पहले नेता थे। कांग्रेस की तरफ से सदन के पहले विपक्ष के नेता कमलापति त्रिपाठी थे। यह सभी जानकारियां इस वर्ष के उस कैलेंडर का हिस्सा हैं जिसे उच्चसदन के सभापति वेंकैया नायडू ने गुरुवार को जारी किया।
राज्यसभा का कैलेंडर जारी करते हुए नायडू ने दोनों सदनों के लिए साझा कार्यसूची की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी राष्ट्र साझा कार्यसूची के बिना अपेक्षित प्रगति नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि संसद के दोनों सदन एक दूसरे के प्रतिस्पर्धी नहीं, सहयोगी की भूमिका में ही देश के लिए बेहतर काम कर सकते हैं। इस अवसर पर उन्होंने अपने 12 पूर्ववर्ती राज्यसभा के सभापतियों को भी याद किया।
इस कैलेंडर में राज्यसभा के इतिहास के बारे में कई रोचक जानकारियां दी गई हैं। कैलेंडर में बताया गया है कि सभा के पहले नेता जो बाद में प्रधानमंत्री बने, वे लालबहादुर शास्त्री थे। प्रणव मुखर्जी इस सदन के पहले नेता थे जो बाद में राष्ट्रपति बने। जबकि प्रतिभा पाटिल पहली उप सभापति थीं जो बाद में राष्ट्रपति पद तक पहुंचीं। विपक्ष के नेता के रूप में मनमोहन सिंह का कार्यकाल अब तक सबसे लंबा रहा है जो 6 साल से भी अधिक रहा। सभा के नेता के रुप में भी उन्होंने अब तक सबसे ज्यादा 10 साल तक काम किया।