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फैक्ट चेक: पाकिस्तानी अकाउंट का प्रोपेगेंडा बेनकाब, दिल्ली प्रदर्शन का वीडियो निकला फर्जी; जानें पूरी सच्चाई

Fri, 23 Oct 2026 05:41 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी आईएएनएस, नई दिल्ली

सार

फैक्ट चेक: सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि कॉकरोच पार्टी के खिलाफ कार्रवाई में दो की मौत हुई है। सेना ने वायरल दावे को फर्जी बताया है। 
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भारतीय सेना ने खोली पोल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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भारतीय सेना ने शुक्रवार को एक 'फैक्ट चेक' जारी किया, जिसमें पाकिस्तान से जुड़े एक प्रोपेगेंडा सोशल मीडिया अकाउंट के उन दावों को खारिज किया गया है, जिनमें कहा गया था कि सेना ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' के खिलाफ कोई 'कार्रवाई' (क्रैकडाउन) की है।
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भारतीय सेना ने क्या कहा? 
इस फैक्ट चेक में, भारतीय सेना ने साफ किया कि रक्षा बलों की छवि खराब करने के लिए, उस प्रोपेगेंडा अकाउंट ने दक्षिण दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाकर्मियों की एक पुरानी तस्वीर का इस्तेमाल किया है।

सोशल मीडिया पर जारी इस फैक्ट चेक में भारतीय सेना ने कहा, 'पाकिस्तान से जुड़ा एक प्रोपेगेंडा अकाउंट झूठे आरोप फैला रहा है कि 23 अक्तूबर की सुबह भारतीय सेना ने 'कॉकरोच पार्टी' के खिलाफ कार्रवाई की, जिसमें सात युवा घायल हो गए और दो की मौत हो गई। भारतीय नाम का इस्तेमाल करने वाले इस पाकिस्तानी अकाउंट ने यह भी झूठा दावा किया है कि भारतीय सेना ने 'जेन जेड' (Gen Z) के खिलाफ रुख अपनाया है।'
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वायरल वीडियो कब का है? 
भारतीय सेना ने बताया कि असल वीडियो 17 अक्तूबर का है, जब जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ (यूनियन) की बहाली की मांग को लेकर चल रही भूख हड़ताल को सुरक्षाकर्मी संभाल रहे थे। उस घटना में किसी की जान नहीं गई थी।

जनसंपर्क विभाग के अधिकारी ने क्या बताया? 
इस बीच, जामिया मिलिया इस्लामिया के जनसंपर्क विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने 'जामिया मिलिया इस्लामिया छात्र संघ' (JMISU) का संविधान तैयार करने के लिए एक समिति गठित की है। यह कदम 'जामिया मिलिया इस्लामिया अधिनियम, 1988' की धारा 23(J) और (K) के तहत उठाया गया है।

अधिकारी ने एक बयान में कहा कि यह समिति 2006 में जेएमआईएसयू के भंग होने के कारणों, इससे जुड़े अदालती फैसलों और लिंगदोह समिति (2007) की सिफारिशों पर विचार करेगी। इस मामले की व्यापक जांच की जरूरत इसलिए पड़ी है, क्योंकि यूनिवर्सिटी में आखिरी बार छात्र संघ 2006 में भंग कर दिया गया था। बयान में कहा गया है कि पिछले दो दशकों में कई बदलाव हुए हैं, जिसके चलते मौजूदा कानूनी और संस्थागत ढांचे के संदर्भ में इस मुद्दे की फिर से समीक्षा करना जरूरी हो गया है।
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