दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने प्रचंड जीत हासिल की। 70 विधानसभा सीटों में से 62 पर आप के विधायक चुने गए। वहीं, भाजपा के हिस्से में आईं सिर्फ आठ सीटें। यानी 2015 के मुकाबले केवल पांच सीटें अधिक। कांग्रेस का तो खाता भी नहीं खुला। लेकिन एक ट्विटर पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें हार के बाद आंकड़ों को लेकर फर्जी जानकारी दी गई है।
इस पोस्ट में यह दावा किया जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी को जिन सीटों पर हार मिली है उनमें से 36 सीटों पर हार का मत प्रतिशत 2000 वोटों से भी कम है।
अमर उजाला ने इस ट्वीट और वायरल मैसेज की पड़ताल की तो कुछ और ही सच्चाई सामने आई। कानपुर से भारतीय जनता पार्टी के सांसद सत्यदेव पचौरी ने हार को लेकर यह ट्वीट किया था। उन्होंने लिखा कि आठ विधानसभा सीटों पर भाजपा 100 वोटों के अंतर से हारी है। 19 सीटों पर 1000 वोटों का अंतर, नौ सीटों पर 2000 वोटों का अंतर रहा। साथ में जीती हुई आठ सीट भी जोड़ लो। सभी मिलाकर 44 सीट हो जाती हैं, अगर तीन फीसदी मतदान ज्यादा होता तो पूरा खेल बदल सकता था।
ट्वीट वायरल होने पर इसे डिलीट कर दिया गया, लेकिन तब तक इसके स्क्रीनशॉट डिजिटल दुनिया में पहुंच चुके थे। अब हम आपको बताते हैं कि ट्वीट में दिए गए आंकड़े कितने सच हैं। आंकड़ों की जांच के लिए हमने भारतीय चुनाव आयोग की वेबसाइट से दिल्ली चुनाव के परिणामों को जांचा।
आयोग की रिपोर्ट से पता चला कि दिल्ली की बिजवासन विधानसभा सीट में जीत का अंतर सबसे कम 753 मतों का था। इसके बाद लक्ष्मीनगर विधानसभा सीट में 880 मतों के अंतर से आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी को जीत मिली।
हमारी पड़ताल में यह सिद्ध हो गया कि ट्वीट में लिखे गए आंकड़े पूर्णतया असत्य हैं। हम अपनी बात को पुख्ता करने के लिए आपको चुनाव आयोग की वेबसाइट पर दिए गए दिल्ली के चुनाव परिणाम की टेबल के स्क्रीनशॉट दिखा रहे हैं। इसमें देखकर पूरा सच आप खुद ही समझ जाएंगे।
इन आंकड़ों को आप यहां देख सकते हैं