आधार की प्रामाणिकता के लिए फिंगर प्रिंट और आइरिस के मामले में आ रही दिक्कतों को देखते हुए तीसरे विकल्प के रूप में चेहरे को भी शामिल कर लिया गया है। इसे 1 जुलाई, 2018 से लागू किया जाएगा।
भारतीय पहचान पत्र प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने सोमवार को इसकी घोषणा की। प्राधिकरण ने कहा है कि यह प्रामाणिकता की यह सुविधा जरूरत के आधार पर ही मुहैया कराई जाएगी। इसके अलावा यह पहले से उपलब्ध विकल्पों के साथ ही मिलेगी यानी चेहरे के साथ फिंगर प्रिंट या आइरिस या
ओटीपी में से किसी एक का होना अनिवार्य होगा।
इस नई सुविधा से उन लोगों को मदद मिलेगी जिनके उंगलियों के निशान बढ़ती उम्र या कड़ी मेहनत के कारण हल्के हो गए हैं या मिट गए हैं। उंगलियों के निशान के अलावा बुजुर्गों की आइरिस (आख की पुतलियां) से भी प्रमाणिकता में परेशानी आ रही है। ऐसे सभी लोगों के लिए अब आधार बनवाना आसान हो जाएगा।
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मालूम हो कि पिछले हफ्ते ही यूआईडीएआई ने आधार के दुरुपयोग को रोकने के लिए इसकी जगह 16 अंकों की वर्चुअल आईडी के इस्तेमाल की अनुमति दी है। अब सिम कार्ड लेने, खाता खोलने या किसी सरकारी योजना का लाभ हासिल करने के लिए आधार की जगह इस नंबर का प्रयोग किया जा सकेगा। यह सुविधा 1 मार्च से शुरू होगी और 1 जून से इसे अनिवार्य कर दिया जाएगा।
नए सॉफ्टवेयर की तैयारी
चेहरे को प्रामाणिकता के विकल्प के रूप में इस्तेमाल से पहले संबंधित सॉफ्टवेयर में बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए बायोमीट्रिक मशीनों में भी परिवर्तन करना होगा। इसके लिए सर्विस प्रोवाइडरों से बातचीत की जा रही है।