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Indian Medicine: श्रीलंका में 35 लोगों की आंखें संक्रमित, भारतीय दवा की जांच, आई ड्रॉप पर पड़ोसी ने लगाई रोक

Fri, 02 Jun 2023 06:52 AM IST
देव कश्यप परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली।

सार

शिकायत मिली है कि मिथाइल प्रेडनिसोलोन आई ड्रॉप का उपयोग करने के बाद मरीजों में बैक्टीरिया संक्रमण बढ़ा है। इसी साल मार्च में कंपनी ने आईड्रॉप के दो बड़े बैच श्रीलंका निर्यात किए, लेकिन अप्रैल में वहां के तीन बड़े अस्पतालों में करीब 30 लोगों ने दवा लेने के बाद आंखों में संक्रमण की शिकायत की।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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श्रीलंका के अस्पतालों में 35 मरीजों में आंखों का संक्रमण बढ़ने पर भारत निर्मित दवा की जांच शुरू हुई है। बृहस्पतिवार को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के सूत्रों ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि गुजरात की फार्मा कंपनी की दवा की जांच की जा रही है।

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शिकायत मिली है कि मिथाइल प्रेडनिसोलोन आई ड्रॉप का उपयोग करने के बाद मरीजों में बैक्टीरिया संक्रमण बढ़ा है। इसी साल मार्च में कंपनी ने आईड्रॉप के दो बड़े बैच श्रीलंका निर्यात किए, लेकिन अप्रैल में वहां के तीन बड़े अस्पतालों में करीब 30 लोगों ने दवा लेने के बाद आंखों में संक्रमण की शिकायत की। इसके बाद श्रीलंका की सरकार ने न सिर्फ दवा पर तत्काल रोक लगाई, बल्कि उसके खिलाफ जांच भी शुरू कर दी। इस बीच कंपनी ने भी अपनी दवाओं को वापस ले लिया। श्रीलंका सरकार ने 16 मई को पत्र लिखकर भारत से भी निष्पक्ष जांच की अपील की।

स्वास्थ्य मंत्री ने दी है चेतावनी...हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने चेतावनी देते हुए कहा कि फार्मा उद्योग देश की साख से जुड़ा है। अगर गुणवत्ता से समझौता किया जाता है तो यह देश के लिए अच्छा नहीं रहेगा और इसे कभी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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15 दिन में रिपोर्ट....स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि श्रीलंका से पत्र मिलने के बाद तत्काल जांच करने के निर्देश दिए गए। कंपनी के मौजूदा बैच को सील कर दिया गया है। नमूने केंद्रीय प्रयोगशाला भेजे हैं, जहां से 10 से 15 दिन में रिपोर्ट मिलने की संभावना है।

नौ माह में चौथा मामला
यह नौ माह में चौथा ऐसा मामला है, जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय दवाओं की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। पहले गांबिया और उज्बेकिस्तान में बच्चों की मौत के पीछे भारतीय कंपनियों के कफ सीरप को जिम्मेदार ठहराया गया, जिसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय फार्मा क्षेत्र की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हुए। इसी तरह का एक मामला मार्शल आइलैंड्स और माइक्रोनेशिया में भी सामने आया, जिसके बाद बीते अप्रैल माह में डब्ल्यूएचओ ने अलर्ट जारी किया।

जनवरी से मार्च के बीच 174 दवाओं के नमूने फेल
दवाओं की गुणवत्ता को लेकर सीडीएससीओ की एक रिपोर्ट बताती है कि भारत में इस साल जनवरी से लेकर मार्च माह के बीच करीब चार हजार दवाओं की गुणवत्ता की जांच की गई, जिनमें 174 दवाओं के नमूने फेल हुए। इनमें आयरन और मल्टीविटामिन की वे दवाएं भी शामिल हैं, जो भारतीय बाजार में सालों से हैं।

  • इस साल जनवरी में कुल 1,348 दवाओं की जांच में 67 के नमूने फेल हुए। फरवरी में 1,251 में से 59 और मार्च में 1,497 में से 48 दवाओं की गुणवत्ता खराब पाई गई।
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