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Election: दिल्ली से चुनाव लड़ेंगे विदेश मंत्री एस जयशंकर! इस बार भी बदले जाएंगे दिल्ली में भाजपा उम्मीदवार

आशीष तिवारी
Updated Sun, 11 Jun 2023 03:39 PM IST

सार

मोदी सरकार के नौ साल पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी ने जन जागरण अभियान शुरू किया है। 30 जून तक चलने वाले इस जनजागरण अभियान में देश के अलग-अलग शहरों महानगरों गांव नगर और तहसीलों में बड़े नेताओं के प्रवास के कार्यक्रम तय किए गए हैं।
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एस जयशंकर - फोटो : Twitter


भाजपा ने दिल्ली के सियासी मैदान में उतारा है विदेश मंत्री को...

मोदी सरकार के नौ साल पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी ने जन जागरण अभियान शुरू किया है। 30 जून तक चलने वाले इस जनजागरण अभियान में देश के अलग-अलग शहरों महानगरों गांव नगर और तहसीलों में बड़े नेताओं के प्रवास के कार्यक्रम तय किए गए हैं। इसी कड़ी में विदेश मंत्री एस जयशंकर को दिल्ली में जनजागरण अभियान के दौरान जनता के बीच में उतारा गया है। पार्टी की नीति के मुताबिक एस जयशंकर केंद्र सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए न सिर्फ लोगों से मुलाकात कर रहे हैं बल्कि उनके बीच जाकर मोदी सरकार के किए गए कामों के बारे में चर्चा भी कर रहे हैं। सियासी जानकार भी मानते हैं कि विदेश मंत्री एस जयशंकर को पहली दफा जनता के बीच में सीधे तौर पर डोर टू डोर अभियान के लिए मैदान में उतारा गया है। राजनीतिक विश्लेषक ओम द्विवेदी कहते हैं कि अभी तक विदेश मंत्री जनता से रूबरू तो होते थे लेकिन उसका ज्यादातर दायरा वही होता था जो विदेशी मामलों से जुड़ा हुआ हो। उनका मानना है कि विदेश मंत्री एस जयशंकर जब दिल्ली के गली मोहल्लों में लोगों से विदेश की बजाय उनकी अपनी जरूरत की समस्याओं को सुन रहे हैं तो सियासत के गलियारों में चर्चाएं होना लाजमी भी हैं।


मंदिरों और कॉलेजों में पहुंच कर कर रहे हैं जन संवाद...

विदेश मंत्री एस जयशंकर के दिल्ली प्रवास कार्यक्रम को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने बहुत मजबूती से तैयारियां की हैं। भारतीय जनता पार्टी के ऐसे कार्यक्रमों की रणनीति बनाने वाले एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि क्योंकि एस जयशंकर की पढ़ाई दिल्ली में ही हुई है। इसलिए जो कार्यक्रम तैयार किया गया उसमें वह सब कुछ शामिल था जिससे वह जनता से सीधे जुड़  सकें। यही वजह रही कि विदेशमंत्री एस जयशंकर ने साउथ कैंपस के आर्यभट्ट कॉलेज में दिल्ली विकास प्राधिकरण के कर्मचारियों, अधिकारियों और स्थानीय लोगों से मुलाकात की और कार्यक्रम को संबोधित भी किया। राजनीतिक विश्लेषक ओम कहते हैं कि अपने इस कार्यक्रम के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जिस तरह दिल्ली से अपना कनेक्ट जोड़कर डीडीए के फ्लैट में रहने वाली बात कही उससे सियासी गलियारों में इस बात के संकेत तो मिलते ही हैं कि जयशंकर आने वाले लोकसभा चुनाव में दिल्ली लोकसभा सीट से प्रत्याशी हो सकते हैं। इसके अलावा एस जयशंकर सरोजनी नगर के विनायक मंदिर भी माथा टेकने पहुंचे। जहां उन्होंने लोगों से संवाद किया।


इसलिए दिल्ली मुफीद लग रही है जयशंकर के लिए...

अब सियासी गलियारों में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या विदेश मंत्री एस जयशंकर के लिए दिल्ली सियासी तौर पर मुफीद हो सकती है या नहीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विदेश मंत्री जैसे बड़े मंत्रालय को संभालने वाले बड़े नेता एस जयशंकर के लिए दिल्ली मुफीद क्यों नहीं हो सकती। वैसे भी राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी प्रयोग के तौर पर लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी बदलती भी है। ऐसे में अगर विदेश मंत्री एस जयशंकर को दिल्ली की किसी लोकसभा सीट से टिकट मिलता है तो इसमें कोई हैरानी जैसी बात नहीं होगी। राजनैतिक जानकार विजय अहलूवालिया कहते हैं दिल्ली में 2019 के लोकसभा चुनावों में भी भारतीय जनता पार्टी ने कुछ सीटों पर नए प्रत्याशी ही उतारे थे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस बार भी लोकसभा के चुनावों में कुछ सीटों पर फेरबदल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। यानी दिल्ली की कुछ लोकसभा सीटें ऐसी होंगी जिन पर प्रत्याशी बदले जा सकते हैं।


विदेशों में एस जयशंकर की नीति का किया जा रहा है गुणगान...

सियासी जानकारों का मानना है बीते कुछ समय में जिस तरह विदेश नीति में बदलाव दिखा है उसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ विदेश मंत्री एस जयशंकर को भी दिया जा रहा है। विदेशी मामलों के जानकार वरिष्ठ पत्रकार आर सुंदरम कहते हैं कि यूक्रेन में फंसे हुए छात्रों को वापस लाने के लिए चलाया गया ऑपरेशन गंगा हो या श्रीलंका में बदहाल हालातों में फंसे भारतीयों को मदद पहुंचाने की प्रक्रिया, अफगानिस्तान में सत्ता बदलने के बाद भारतीय पक्ष को मजबूती के साथ रखने का मामला हो या फिर अमेरिका, रूस और ब्रिटेन जैसे देशों से राजनयिक रिश्तों की बेहतरी के साथ ही जी- 20 के सफल आयोजन की तैयारियां, हर मोर्चे पर जयशंकर ने बेहतर काम किया है। सुंदरम कहते हैं कि माना यही जाता है कि विदेशी मामलों को बेहतर तरीके से समझने के लिए एक विशेष वर्ग के लोगों की समझ और जानकारी जरूरी होती है। इस लिहाज से विदेश मंत्री एस जयशंकर के इन कामों को देश की राजधानी दिल्ली की जनता के सामने रखकर सियासी दांव तो चला ही जा सकता है।


लेकिन राज्यसभा का वक्त तो बाकी है...

विदेश मंत्री एस जयशंकर के राज्यसभा का कार्यकाल अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों के बाद भी एक साल का बाकी रहेगा। ऐसे में सवाल ये उठता है क्या एस जयशंकर लोकसभा के चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने के लिए सियासी मैदान में उतारे जाएंगे। राजनीतिक विश्लेषक दामोदर ठाकुर कहते हैं कि यह तो राजनीतिक पार्टी के ऊपर निर्भर करता है कि वह क्या फैसला लेते हैं। दामोदर कहते हैं कि क्योंकि भारतीय जनता पार्टी प्रयोग करने के लिए जानी जाती है इसलिए इस बात को सिरे से खारिज नहीं किया जा सकता है कि एस जयशंकर दिल्ली में चुनाव नहीं लड़ सकते। वह कहते हैं कि दिल्ली में जिस तरीके से एस जयशंकर के लिए भारतीय जनता पार्टी ने योजना अनुरूप जन जन तक पहुंचने की तैयारियां की है उसके सियासी मायने निश्चित तौर पर निकाले ही जाएंगे। उनका तर्क है कि ब्यूरोक्रेट से राजनेता बने जयशंकर को पहली बार इस तरह के चुनावी अभियान में दिल्ली की सड़कों पर उतारा गया है।


बदलेंगे इस बार दिल्ली के टिकट ! 

भारतीय जनता पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि 2024 में लोकसभा के चुनावों में इस बार कुछ सीटों पर प्रत्याशी बदले जाने की सुगबुगाहट हो रही है। सूत्र के मुताबिक इनमें से जिन सीटों के टिकट बदले जाने हैं उन लोकसभा के प्रत्याशियों इसका आभास भी है। यही वजह है कि नए प्रत्याशियों की तलाश भी भारतीय जनता पार्टी उतनी ही शिद्दत से कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का भी यही मानना है कि अमूमन जिन लोकसभा सीटों पर प्रत्याशी बदले जाते हैं तो वहां पर किसी बड़े चेहरे को उतारने से पहले भूमिका बनाई जाती है। इसी कड़ी में विदेश मंत्री एस जयशंकर के दिल्ली में जनता से सीधे जुड़ने की प्रक्रिया को आने वाले लोकसभा चुनावों के नजरिए से ही देखा जा रहा है।
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