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एक्सप्लेनर: एसआईआर के बाद क्यों होने जा रहा एसएसआर, दोनों में अंतर क्या, अब कैसे अपडेट की जाएगी मतदाता सूची?

Fri, 16 Oct 2026 03:37 PM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

एसआईआर के बाद अब मतदाता सूची अपडेट करने के लिए एसएसआर यानी विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। आखिर दोनों में क्या अंतर है और इस बार मतदाता सूची में नाम जुड़वाने या सुधार कराने की प्रक्रिया कैसे होगी? जानिए इस एक्सप्लेनर में।

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एसएसआर - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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चुनाव आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची अपडेट करने के लिए विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण यानी एसएसआर कराने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत नवंबर में प्रारूप मतदाता सूची जारी होगी और जनवरी 2027 में अंतिम सूची प्रकाशित होगी।

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ऐसे में आइए समझते हैं कि एसएसआर क्या है? यह किन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में होने वाला है? इसकी प्रक्रिया क्या होगी? यह विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर से कैसे अलग है?

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एसएसआर से क्या समझते हैं?

एसएसआर का पूरा नाम स्पेशल समरी रिवीजन यानी विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करना है। इसके तहत मतदाता सूची में नाम जोड़ने, दर्ज जानकारी में सुधार करने और नियमानुसार अपात्र नामों को हटाने की प्रक्रिया अपनाई जाती है।

निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के नियम 25(1) के तहत मतदाता सूची के पुनरीक्षण के तीन तरीके बताए गए हैं।
  • गहन पुनरीक्षण
  • संक्षिप्त पुनरीक्षण
  • आंशिक गहन और आंशिक संक्षिप्त पुनरीक्षण
आयोग अब कुछ विशेष गतिविधियों के साथ संक्षिप्त पुनरीक्षण कराता है। इनमें घर-घर जाकर सत्यापन, मतदान केंद्रों का युक्तिकरण और विशेष अभियान की तारीखें तय करना शामिल है। इन्हीं विशेषताओं के कारण इसे विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कहा जाता है।

एसएसआर - फोटो : Amar Ujala

किन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में होगा एसएसआर?

आयोग ने इस चरण में कुल 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एसएसआर कराने के निर्देश दिए हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश,  छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, पश्चिम बंगाल, केरल, असम, मणिपुर, तमिलनाडु, और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप और पुदुचेरी शामिल हैं।

इस प्रक्रिया के लिए 1 जनवरी 2027 को पात्रता की तारीख तय की गई है। आयोग ने यह भी कहा है कि जिन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर चल रहा है या हाल ही में पूरा हुआ है, वहां का कार्यक्रम अलग से घोषित किया जाएगा। इनमें आंध्र प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और दिल्ली जैसे राज्य शामिल हैं।

हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में पुनरीक्षण का कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा। यहां स्थानीय मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाएगा।

एसएसआर का पूरा शेड्यूल क्या है?

  • 2 नवंबर 2026: मतदान केंद्रों के युक्तिकरण की प्रक्रिया पूरी करने की तारीख।
  • 12 नवंबर 2026: मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित होगी।
  • 11 दिसंबर 2026: दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख।
  • 28 दिसंबर 2026: दावों और आपत्तियों पर कार्रवाई पूरी करने की अंतिम तारीख।
  • 4 जनवरी 2027: अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।

एसएसआर - फोटो : Amar Ujala

एसएसआर की प्रक्रिया कैसे पूरी होगी?

एसएसआर की प्रक्रिया को मुख्य रूप से दो चरणों में बांटा गया है। पहले चरण में मसौदा मतदाता सूची जारी करने से पहले की तैयारियां होती हैं। दूसरे चरण में मसौदा सूची प्रकाशित होने के बाद दावों और आपत्तियों के आधार पर बदलाव किए जाते हैं।

पहला चरण: मसौदा सूची से पहले की तैयारी

इस चरण में चुनाव अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। बूथ स्तर अधिकारी यानी बीएलओ घर-घर जाकर सत्यापन करते हैं। इसका उद्देश्य ऐसे पात्र मतदाताओं की पहचान करना है, जिनके नाम सूची में दर्ज नहीं हैं। इस दौरान मतदाता सूची में मौजूद विसंगतियों के साथ एक से अधिक जगह दर्ज, स्थान बदल चुके और मृत मतदाताओं से संबंधित मामलों की भी पहचान की जाती है।

इसके अलावा, पतों को एक समान प्रारूप में दर्ज किया जाता है। मतदान केंद्रों का युक्तिकरण और जरूरी बदलाव किए जाते हैं। मतदाता सूची से जुड़े नियंत्रण संबंधी रिकॉर्ड अपडेट किए जाते हैं, वेबसाइट तैयार की जाती है, पूरक सूचियों को एकीकृत किया जाता है और मसौदा मतदाता सूची तैयार की जाती है।

दूसरा चरण: दावे, आपत्तियां और अंतिम सूची

12 नवंबर को मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी पात्र नागरिकों से दावे और आपत्तियां आमंत्रित करेंगे। इस दौरान लोग अपना नाम जुड़वाने या सूची में दर्ज जानकारी में सुधार कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। सूची में मौजूद किसी प्रविष्टि को लेकर आपत्ति भी दर्ज कराई जा सकती है।

अधिकारी निर्धारित प्रक्रिया के तहत इन आवेदनों की जांच करते हैं। पहले चरण में बीएलओ द्वारा पहचानी गई विसंगतियों पर भी इसी दौरान कार्रवाई की जाएगी। जांच के बाद नाम जोड़ने, हटाने और जानकारी में सुधार से जुड़े बदलाव मतदाता सूची के डेटाबेस में दर्ज किए जाएंगे। इसके बाद तय कार्यक्रम के अनुसार अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।

मतदाता सूची में पारदर्शिता कैसे रखी जाएगी?

चुनाव आयोग ने पुनरीक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और राजनीतिक दलों को जानकारी देने के लिए कई व्यवस्थाएं तय की हैं।
  • मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को मसौदा और अंतिम मतदाता सूची की प्रतियां मुफ्त दी जाएंगी।
  • दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि में राजनीतिक दलों को हर सप्ताह इनकी सूचियां उपलब्ध कराई जाएंगी।
  • मसौदा और अंतिम मतदाता सूची मुख्य निर्वाचन अधिकारी व जिला निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर प्रकाशित की जाएगी।
  • मतदाता सूची को निर्धारित मतदान केंद्रों और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के कार्यालय के सूचना-पट्ट पर प्रदर्शित किया जाएगा।
  • मतदाता सूची के नियमित अद्यतन के दौरान नाम जोड़ने, हटाने और उनमें सुधार की मासिक सूचियां मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर प्रकाशित की जाएगी।
  • आम नागरिक भी निर्धारित मामूली शुल्क देकर मतदाता सूची की प्रति प्राप्त कर सकते हैं।

राजनीतिक दल और उम्मीदवार कैसे हिस्सा लेंगे?

आयोग ने निर्देश दिया है कि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया के हर चरण में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। इसके लिए विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण के दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के स्तर पर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ समय-समय पर बैठकें करेंगे। इन बैठकों में उन्हें प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी।

मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल बूथ स्तर एजेंट यानी बीएलए नियुक्त कर सकते हैं। बीएलए मतदाता सूची में संभावित गलतियों या विसंगतियों की पहचान कर उनकी जानकारी दे सकते हैं। हालांकि, वे मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया या बीएलओ के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं कर सकते।

चुनाव के दौरान नामांकन की अंतिम तारीख के तुरंत बाद मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों को चुनाव संचालन के लिए मतदाता सूची की प्रति मुफ्त उपलब्ध कराई जाती है।

क्या अंतर? - फोटो : Amar Ujala

एसएसआर में अधिकारियों की क्या जिम्मेदारी होगी?

आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिया है कि मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन करने वाले अधिकारियों को पर्याप्त कर्मचारी और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। इसमें मुख्य निर्वाचन अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, बीएलओ पर्यवेक्षक, बीएलओ और अन्य संबंधित अधिकारी शामिल हैं।

मुख्य सचिवों को यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है कि जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के अधिसूचित पद खाली न रहें।

मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित होने से लेकर अंतिम सूची जारी होने तक एसएसआर से जुड़े किसी अधिकारी का तबादला आयोग की पूर्व अनुमति के बिना नहीं किया जा सकेगा। अगर इस अवधि में तबादला जरूरी हो, तो उसका पूरा कारण बताते हुए प्रस्ताव मुख्य निर्वाचन अधिकारी के माध्यम से आयोग को भेजना होगा।

संबंधित विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी की जिम्मेदारी होगी कि कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची से छूट न जाए और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो या उसमें बना न रहे। आयोग के मुताबिक, संविधान के अनुच्छेद 326 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धाराओं 16 और 19 के तहत पात्र हर व्यक्ति को मतदाता के रूप में पंजीकृत करना सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

एसएसआर और एसआईआर में क्या अंतर है?

एसएसआर में मौजूदा मतदाता सूची को अपडेट किया जाता है। इसके तहत दावे और आपत्तियों के जरिए नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं और मौजूदा मतदाताओं के विवरण में गलतियों को सुधारा जाता है। इस प्रक्रिया से युवा और पहली बार वोट देने वाले मतदाता भी अपना नाम सूची में दर्ज करा सकते हैं।

वहीं, एसआईआर में मतदाताओं के विवरण की विस्तृत जांच और गणना की जाती है। इसमें मतदाताओं की जानकारी जुटाने और उसका सत्यापन करने के बाद मतदाता सूची का प्रारूप तैयार किया जाता है। इसके बाद सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का मौका दिया जाता है। यानी एसएसआर में मौजूदा सूची को अपडेट किया जाता है, जबकि एसआईआर में गहन सत्यापन के जरिए मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
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फॉर्म - फोटो : Amar Ujala

फॉर्म 6, 7 और 8 का क्या है काम?

फॉर्म 6: मतदाता सूची में नया नाम जुड़वाने के लिए
पात्र भारतीय नागरिक इस फॉर्म के जरिए मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसका इस्तेमाल पहली बार वोटर बनने वाले लोग और वे पात्र नागरिक भी कर सकते हैं, जिनका नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं है।

फॉर्म 7: नाम शामिल करने पर आपत्ति या नाम हटवाने के लिए
इस फॉर्म के जरिए मतदाता सूची में किसी नाम को शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है या पहले से दर्ज नाम हटाने का अनुरोध किया जा सकता है। इसके आधार में संबंधित व्यक्ति की मृत्यु, एक से अधिक जगह नाम दर्ज होना या मतदाता के अपात्र होने जैसे कारण शामिल हो सकते हैं।

फॉर्म 8: मतदाता की जानकारी में सुधार या बदलाव के लिए
पहले से मतदाता सूची में दर्ज लोग इस फॉर्म के जरिए अपने पते में बदलाव, सूची में दर्ज जानकारी में सुधार या मतदाता फोटो पहचान पत्र (ईपीआईसी) बदलने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके जरिए दिव्यांग व्यक्ति (पीडब्ल्यूडी) के रूप में चिह्नित करने का अनुरोध भी किया जा सकता है।
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