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एक्सप्लेनर: उत्तर प्रदेश की सड़कों पर क्यों दौड़ रहा 308 पहियों वाला ये महाबली ट्रक, क्या है इसकी खासियत?

Fri, 02 Oct 2026 03:33 PM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

उत्तर प्रदेश की सड़कों पर दौड़ रहा 308 पहियों वाला महाबली ट्रक इन दिनों लोगों का ध्यान खींच रहा है। 150 टन से ज्यादा वजन लेकर चल रहे इस विशाल ट्रक की रफ्तार महज 5 किमी प्रति घंटा है। आखिर इतना भारी भार ले जाने के लिए इसे कैसे तैयार किया गया और इसकी खासियत क्या है? आइए जानते हैं।
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महाबली ट्रक - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश की सड़कों पर इन दिनों एक ऐसा महाबली ट्रक चल रहा है, जिसे देखकर लोगों की नजरें थम जा रही हैं। 308 पहियों वाला यह विशाल वाहन अपने ऊपर 150 टन से ज्यादा वजन की एक मशीन लेकर सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर रहा है। जहां से यह गुजरता है, लोग इसे देखने और इसकी तस्वीरें खींचने के लिए रुक जाते हैं। 

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लेकिन सवाल है कि आखिर इस मशीन को ले जाने के लिए 308 पहियों वाले इस ट्रक की जरूरत क्यों पड़ी? इसे मंजिल तक पहुंचाना इतना मुश्किल क्यों है? इसके लिए क्या-क्या इंतजाम किए जा गए हैं? आइए जानते हैं। 

कहां से आई है यह मशीन?

इस विशाल मशीन की यात्रा अप्रैल में बेल्जियम से शुरू हुई थी। इसे समुद्री रास्ते से भारत भेजा गया और करीब एक महीने के सफर के बाद यह ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुंची। इसके बाद इसे सड़क के रास्ते उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी ले जाने की तैयारी शुरू हुई। मशीन को एक खास हाइड्रोलिक ट्रेलर पर लादा गया, जिसमें बड़ी संख्या में पहिए और एक्सल लगे हैं।

यह मशीन बलरामपुर चीनी मिल लिमिटेड की कुंभी चीनी इकाई के लिए जा रही है। यहां बड़े स्तर की बायोपॉलिमर सुविधा शुरू की जा रही है, जिसमें करीब 3,080 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है।

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इस मशीन को ले जाने के लिए ऐसे ट्रक की जरूरत क्यों पड़ी?

इस पूरे सफर का सबसे अहम हिस्सा साइक्लाइजेशन रिएक्टर है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने पारादीप बंदरगाह से बलरामपुर चीनी मिल लिमिटेड, कुंभी तक इस रिएक्टर को सड़क के रास्ते ले जाने के लिए 10 अप्रैल 2026 को अधिसूचना जारी की थी।

सरकारी अधिसूचना के मुताबिक रिएक्टर का वजन 163.30 मीट्रिक टन है। इतना भारी माल सामान्य ट्रक से ले जाना संभव नहीं है, इसलिए कई एक्सल वाले खास हाइड्रोलिक ट्रेलरों का इस्तेमाल किया गया है।

308 पहिए आखिर कैसे संभाल रहे हैं इतना वजन?

इस परिवहन के लिए कुल 56 मॉड्यूलर हाइड्रोलिक ट्रेलर सूचीबद्ध किए गए हैं। इनमें गोल्डहोफर और एमएचडी के ट्रेलर शामिल हैं।

इन ट्रेलरों में अलग-अलग संख्या में एक्सल लगाए जा सकते हैं और उनके हिसाब से वजन उठाने की क्षमता भी अलग होती है। तीन एक्सल वाले ट्रेलर की क्षमता 78 टन, चार एक्सल की 104 टन, छह एक्सल की 156 टन और आठ एक्सल की 208 टन है।

मुख्य कॉन्फिगरेशन में 24 या 24.5 एक्सल का उल्लेख है। इसमें दो या तीन पंक्तियों में एक्सल और हर एक्सल पंक्ति में 12 टायर का विवरण दिया गया है। यानी 308 पहिए किसी एक सामान्य ट्रक के पहिए नहीं हैं, बल्कि कई ट्रेलरों को जोड़कर बनाए गए पूरे परिवहन तंत्र का हिस्सा हैं। इनसे मशीन का वजन अलग-अलग एक्सल पर बांटा जाता है।

वोल्वो एफएच 16 - फोटो : Amar Ujala

इसे खींचने के लिए वोल्वो वाहन का इस्तेमाल

इतने बड़े ट्रेलर तंत्र को आगे बढ़ाने के लिए सरकारी अधिसूचना में कुल 21 प्राइम मूवर सूचीबद्ध किए गए हैं और इन सभी का मेक वोल्वो दिया गया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस परिवहन में वोल्वो एफएच16 प्राइम मूवर का इस्तेमाल किया जा रहा है।

वोल्वो एफएच16, वोल्वो ट्रक्स का भारी कामों के लिए बनाया गया प्रमुख ट्रक मॉडल है। कंपनी के मुताबिक इसे कठिन और भारी परिवहन के साथ लंबी दूरी के कामों के लिए तैयार किया गया है।

वोल्वो एफएच16 की क्या खासियत है?

वोल्वो एफएच16 की नई पीढ़ी को 27 फरवरी 2020 को पेश किया गया था और इसका सीरियल उत्पादन मार्च 2021 में शुरू हुआ था।

इसमें 16 लीटर का डी16के डीजल इंजन दिया गया है। यह इंजन 550 हॉर्सपावर, 650 हॉर्सपावर और 750 हॉर्सपावर की क्षमता में उपलब्ध है। 750 हॉर्सपावर वाले वर्जन में 3550 न्यूटन मीटर टॉर्क मिलता है।

इसमें आई-शिफ्ट गियरबॉक्स दिया गया है, जिसे अलग-अलग कामों के हिसाब से इस्तेमाल किया जा सकता है। भारी कामों के लिए इसमें फ्रंट एक्सल की ज्यादा लोड क्षमता और बेहतर स्टीयरिंग एंगल वाले एक्सल दिए गए हैं। कठिन कामों के लिए 38 टन का बोगी भी उपलब्ध है। वोल्वो स्वीडन की कंपनी है और इसकी स्थापना 1927 में हुई थी।

कितना बड़ा और भारी है यह पूरा परिवहन तंत्र?

सरकारी अधिसूचना के अनुसार, बिना लदे एक्सल का वजन 130 मीट्रिक टन है। 
  • रिएक्टर का वजन 163.30 मीट्रिक टन और लदे वाहन का वजन 294.10 मीट्रिक टन है। 
  • प्रति एक्सल भार 12.25 मीट्रिक टन है।
  • लदे वाहन की ऊंचाई 8.172 मीटर है।
  •  माल की लंबाई 41.13 मीटर, चौड़ाई 6.902 मीटर और ऊंचाई 6.997 मीटर है।

ट्रक की रफ्तार इतनी कम क्यों है?

सरकारी अधिसूचना में ट्रेलरों की अधिकतम गति पांच किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है। इतना भारी और बड़ा परिवहन तंत्र होने के कारण इसकी रफ्तार सामान्य भारी वाहनों की तुलना में बेहद कम रहती है। यह एक दिन में करीब 10 से 20 किलोमीटर की दूरी ही तय कर पाता है।

क्या ले जा रहा ट्रक? - फोटो : Amar Ujala

रास्ते में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है?

इतने बड़े माल को सड़क से ले जाने के लिए रास्ते को पहले से तैयार करना पड़ता है। सड़क की चौड़ाई, डिवाइडर, खंभे, पुल, बिजली की लाइन और दूसरे ढांचों को ध्यान में रखना पड़ता है।

कई जगहों पर ट्रेलर को गुजारने के लिए बिजली की लाइनों को कुछ समय के लिए हटाना पड़ा है। कुछ फुट ओवरब्रिज के हिस्सों को भी काटा या उनमें बदलाव किया गया है। इसके साथ दो क्रेन और दो अतिरिक्त ट्रेलर भी चल रहे हैं। पूरे परिवहन के साथ 60 से ज्यादा कर्मचारी भी जुड़े हैं।

चंदौली में चार दिन क्यों रुका था?

25 सितंबर को यह भारी परिवहन तंत्र चंदौली जिले के नौबतपुर बॉर्डर पर पहुंचा था। रास्ते की परिस्थितियों और वाहन के आकार के कारण इसकी रफ्तार बेहद धीमी रही। चार दिनों में यह महज 20 से 25 किलोमीटर की दूरी तय कर पाया।

इसके बाद 28 सितंबर की दोपहर इसे वाराणसी की ओर रवाना किया गया। रिंग रोड से वैकल्पिक रास्ता बनाकर इसे हाईवे पर लाया गया। इसके निकलने की खबर मिलते ही आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग और वीडियो बनाने वाले कंटेंट क्रिएटर्स भी मौके पर पहुंच गए।

ट्रक का रूट - फोटो : Amar Ujala

रास्ते में कोई बाधा आए तो क्या होगा?

सरकारी अधिसूचना में इसके लिए भी कई नियम तय किए गए हैं। अगर रास्ते में होर्डिंग, पोल, साइन बोर्ड या ट्रांसमिशन लाइन जैसी बाधा आती है तो उन्हें हटाने या ट्रांसमिशन लाइन बंद कराने के लिए संबंधित विभागों से पहले अनुमति लेनी होगी।

इन्हें हटाने और दोबारा लगाने की लागत जेएम बक्सी को वहन करनी होगी। ट्रांसपोर्टर को प्रत्येक आवाजाही से कम से कम 10 दिन पहले संबंधित प्राधिकरण को सूचना देनी होगी और हर आवाजाही का समय संबंधित प्राधिकरण तय करेगा।

रास्ते में ऐसे ओवरहेड स्ट्रक्चर, आरओबी, आरयूबी या अंडरपास नहीं होने चाहिए, जिनसे माल को ले जाने में ऊंचाई संबंधी बाधा पैदा हो।

पुल और सड़क को लेकर क्या नियम हैं?

सड़कों और पुलों पर संबंधित विभागों की ओर से तय भार सीमा का पालन करना होगा। वाहन को सड़क पर उतारने से पहले संबंधित प्राधिकरण से अनुमति लेनी होगी। इसकी आवाजाही को सुरक्षा की दृष्टि से संबंधित राज्य, केंद्रशासित प्रदेश या राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के परिवहन विभाग से मंजूरी और निगरानी भी जरूरी होगी।

अगर किसी पुल के ऊपर या नीचे से वाहन को ले जाने की अनुमति नहीं मिलती है तो वहां से इसे नहीं ले जाया जाएगा। नदियों और नालों को पार करने के लिए संबंधित अधिकारियों की अनुमति लेकर वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी।

सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं?

इतने भारी-भरकम वाहन को तय मंजिल तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए सरकार ने कई जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 
  • ट्रेलर पर खतरे के झंडे और लाइट लगानी होंगी। 
  • भारी माल के आगे और पीछे चेतावनी वाहन चलेंगे। 
  • आगे और पीछे लाल लाइट लगानी होगी और दिन में दोनों ओर लाल झंडे लगाने होंगे। 
  • ट्रेलर के आगे और पीछे पूरी चौड़ाई में पीले और काले रंग की जेब्रा पट्टियां लगानी होंगी। 
  • साथ ही इसकी आवाजाही इस तरह करनी होगी कि सड़क पर सामान्य यातायात बाधित न हो।

सड़क या पुल को नुकसान हुआ तो?

अगर ट्रेलरों की आवाजाही से सड़क, सड़क संरचना, पुल, अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं या किसी व्यक्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष नुकसान होता है तो उसकी जिम्मेदारी ट्रांसपोर्टर की होगी। ट्रेलरों को सड़क की लंबाई में आपस में जोड़ने की अनुमति केवल इसी विशेष परिवहन के लिए दी गई है।

वाहनों या उनके हिस्सों से जुड़ी समस्या और माल के परिवहन के दौरान होने वाली किसी भी परेशानी की जिम्मेदारी भी ट्रांसपोर्टर की होगी। उसे मंत्रालय की 27 अक्तूबर 2025 की गाइडलाइन का पालन करना होगा।

इस गाइडलाइन के मुताबिक, तय मानकों से अधिक वजन या आकार वाले सामान को मॉड्यूलर हाइड्रोलिक ट्रेलर के जरिए राष्ट्रीय राजमार्गों पर ले जाने के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के पोर्टल से ऑनलाइन अनुमति लेना जरूरी है। इसके लिए अलग-अलग भार विन्यास के आधार पर अनुमति दी जाती है और निर्धारित शुल्क जमा करना होता है।
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डीजल पर भी हो रहा है बड़ा खर्च

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अब तक करीब दो करोड़ रुपये का डीजल खर्च हो चुका है। ट्रक के ड्राइवर ने बताया कि रोजाना करीब 200 लीटर डीजल की खपत हो रही है। संभावना है कि आने वाले नवरात्र तक यह ट्रक लखीमपुर के प्लांट तक पहुंच जाएगा।

कहां-कहां से होकर गुजर रहा है यह ट्रक?

पारादीप पोर्ट से बलरामपुर चीनी मिल लिमिटेड, कुंभी तक इस भारी माल के लिए विशेष रूट तय किया गया है। इसमें प्रमुख रूप से पारादीप पोर्ट, नेताजी प्रतिमा, जीरो पॉइंट, तिलारपांगा चौक, निमापाली गांव, दुबुरी चौक, दानागाड़ी गांव, खानताघर, गोपीनाथपुर जंक्शन, खिरेतांगीरी, सिंगाड़ा गांव, बिसोई शहर, बंगीरिपोसी घाट, झारपोखरिया, बहरागोड़ा, कोकपाड़ा, घाटशिला गांव, सहरबेड़ा, रामपुर रोड, रांची बाईपास, नेओरी चौक, चरण घाट, कुजू, श्री राम चौक, झारखंड बॉर्डर, शेरघाटी, औरंगाबाद, सासाराम, चंदौली और चंदौली शहर शामिल हैं।
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