यूएफबीयू ने अपनी मांग के समर्थन में क्या आंकड़े दिए?
यूएफबीयू ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बैंकिंग क्षेत्र में कर्मचारियों की संख्या और कारोबार से जुड़े आंकड़े साझा किए। संगठन के मुताबिक, 2012-13 में बैंक कर्मचारियों की संख्या 8.86 लाख थी, जो मार्च 2025 तक घटकर 7.58 लाख रह गई। वहीं बैंकिंग कारोबार 283 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया।
यूएफबीयू ने अपने बयान में कहा कि हर 24 घंटे चलने वाली बैंकिंग सेवा के पीछे एक बैंक कर्मचारी होता है और उसके पीछे उसका परिवार होता है। संगठन के मुताबिक, मार्च 2024 में पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था पर सहमति बन चुकी थी और कर्मचारियों ने सोमवार से शुक्रवार तक ज्यादा समय काम करने पर सहमति दी थी।
पीएलआई को लेकर क्या मामला है?
हड़ताल से जुड़ा दूसरा मुद्दा प्रदर्शन से जुड़े प्रोत्साहन यानी पीएलआई का है। पीएलआई व्यवस्था 2020 के वेतन समझौते के तहत शुरू की गई थी और इसे अलग-अलग बैंकों के प्रदर्शन से जोड़ा गया था।
बाद में वरिष्ठ बैंक अधिकारियों के लिए पीएलआई की संशोधित सरकारी योजना लाई गई। इसमें चौथे स्तर और उससे ऊपर के अधिकारियों को शामिल किया गया, जबकि निचले स्तर के अधिकारियों को इससे बाहर रखा गया। इसे लेकर बैंक अधिकारियों की यूनियनों ने आपत्ति जताई और प्रोत्साहन के बंटवारे पर सवाल उठाए।
सरकार और यूनियन बैंक के बीच क्या बातचीत हुई?
22 सितंबर को नई दिल्ली में श्रम मंत्रालय के उप मुख्य श्रम आयुक्त के कार्यालय में सुलह बैठक हुई। इसमें यूएफबीयू के प्रतिनिधियों के साथ भारतीय बैंक संघ, वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग और बैंक प्रबंधन के प्रतिनिधि मौजूद थे।
यूएफबीयू ने कहा कि मार्च 2024 के समझौते में पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था लागू करने पर सहमति बन चुकी है, लेकिन इसे लागू करने को लेकर अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। इसी वजह से संगठन हड़ताल पर आगे बढ़ रहा है।
भारतीय बैंक संघ ने कहा कि पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था का मामला सरकार के विचाराधीन है और यूएफबीयू से हड़ताल टालने की अपील की। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने कहा कि सरकार बैंक कर्मचारियों के कल्याण के लिए कई कदम उठा रही है और इस व्यवस्था पर फैसला लेने से पहले दूसरे हितधारकों के विचारों को भी ध्यान में रखना होगा। वित्तीय सेवा विभाग, भारतीय बैंक संघ और बैंक प्रबंधन ने हड़ताल टालकर बातचीत जारी रखने का अनुरोध किया।
यूएफबीयू ने कर्मचारियों और अधिकारियों को हड़ताल में शामिल नहीं होने के लिए डराने, धमकाने या दबाव डालने की कोशिशों का विरोध किया। संगठन ने खास तौर पर चौथे स्तर और उससे ऊपर के अधिकारियों और परिवीक्षाधीन अधिकारियों पर बनाए जा रहे दबाव का जिक्र किया।
यूएफबीयू ने इसे औद्योगिक संबंध संहिता की धारा 84 के तहत अनुचित श्रम व्यवहार का मामला बताया। संगठन ने कहा कि ऐसी धमकी, दबाव और जबरदस्ती से बचना चाहिए।
यूएफबीयू ने यह भी कहा कि अगर पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की दिशा में कोई ठोस और सकारात्मक कदम होता है तो वह हड़ताल के फैसले पर विचार कर सकता है।
हड़ताल से किन सेवाओं पर असर पड़ेगा?
हड़ताल का असर बैंक की शाखाओं में होने वाले कामकाज पर पड़ सकता है। नकदी जमा करने और निकालने, चेक क्लियरिंग, खाते से जुड़े काम और दूसरी शाखा स्तर की सेवाओं में दिक्कत आ सकती है।
हालांकि बैंकिंग व्यवस्था पूरी तरह बंद नहीं होगी। यूपीआई, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और एटीएम जैसी सेवाएं चलती रहने की उम्मीद है। सरकार के मुताबिक तीन दिन की हड़ताल से बैंकिंग सेवाओं में व्यवधान आ सकता है, खास तौर पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शाखाओं पर इसका असर पड़ सकता है।
रविवार को भी क्यों खुले रहेंगे बैंक?
तीन दिन की देशव्यापी बैंक हड़ताल को देखते हुए सरकार ने ग्राहकों की सुविधा के लिए 27 सितंबर यानी रविवार को भी सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक खुले रखने का फैसला किया है। दरअसल, हड़ताल से ठीक पहले 26 और 27 सितंबर को सप्ताहांत की छुट्टी है। ऐसे में लगातार पांच दिनों तक बैंक शाखाओं के बंद रहने से ग्राहकों को परेशानी न हो, इसलिए 27 सितंबर को सामान्य रूप से बैंकिंग सेवाएं जारी रखने का फैसला किया गया है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने भी 27 सितंबर 2026 को सभी बैंक शाखाओं, कार्यालयों, एटीएम से जुड़ी शाखाओं और करेंसी चेस्ट को पूरी तरह संचालित रखने की मंजूरी दे दी है। सरकार ने कहा है कि बैंक ग्राहकों की सुविधा और उनकी जरूरी बैंकिंग जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए यह कदम उठाया गया है।
30 सितंबर की तारीख क्यों अहम है?
30 सितंबर बैंकों के लिए छमाही समापन यानी हाफ ईयरली क्लोजिंग की तारीख है। इस दौरान मिलान, प्रावधान, कोष प्रबंधन और बाजार से जुड़े काम होते हैं। ऐसे में तीन दिन की हड़ताल और छमाही समापन की तारीख एक साथ आने से बैंकिंग कामकाज प्रभावित हो सकता है।
ग्राहकों को बैंक क्या संदेश दे रहे हैं?
भारतीय स्टेट बैंक, यूनियन बैंक, पीएनबी और अन्य बैंक ग्राहकों से कह रहे हैं कि हड़ताल शुरू होने से पहले अपने जरूरी बैंकिंग काम पूरे कर लें। खासकर जिन ग्राहकों को नकदी की जरूरत है, उन्हें पहले से एटीएम या एडीब्ल्यूएम से पैसे निकालने की सलाह दी गई है।
बैंकों ने ग्राहकों को शाखाओं के काम के लिए कस्टमर सर्विस सेंटर का इस्तेमाल करने और डिजिटल बैंकिंग के लिए इंटरनेट बैंकिंग, योनो, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई और दूसरे डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।
बैंकों की ओर से कहा गया है कि हड़ताल की अवधि में जरूरी बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने की पूरी कोशिश की जाएगी। साथ ही ग्राहकों से संभावित असुविधा को देखते हुए जरूरी काम पहले ही पूरा करने और सहयोग करने की अपील की गई है। इसके अलावा एसबीआई बैंक रविवार को खुले रहेंगे।
हड़ताल का कार्यक्रम क्या?
- फोटो : अमर उजाला
क्या हड़ताल से आपकी सैलरी आने में देरी होगी?
हड़ताल के दौरान बैंकिंग लेनदेन में संभावित दिक्कत को देखते हुए केंद्र सरकार ने सितंबर की सैलरी और पेंशन पहले जारी करने का फैसला किया।
वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने 23 सितंबर को कार्यालय ज्ञापन जारी कर बताया कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स की सितंबर 2026 की सैलरी, मजदूरी और पेंशन 25 सितंबर 2026 को ही जारी की जाएगी। इसका मकसद 28 से 30 सितंबर की बैंक हड़ताल के दौरान भुगतान में संभावित परेशानी से बचना है।
डाक विभाग ने भी 23 सितंबर को संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि सैलरी और पेंशन से जुड़े भुगतान की जरूरी प्रक्रिया पूरी कर इन्हें 25 सितंबर तक बैंकों को भेज दिया जाए।
वहीं प्राइवेट सेक्टर में अगर आपकी कंपनी 28 सितंबर से पहले ही सैलरी की प्रक्रिया पूरी कर देती है, तो पैसा समय पर आपके खाते में आ सकता है। लेकिन जिन कंपनियों में सैलरी की प्रक्रिया 28 से 30 सितंबर के बीच होती है, वहां भुगतान में देरी हो सकती है। यानी प्राइवेट कर्मचारियों की सैलरी समय पर आएगी या नहीं, यह उनके नियोक्ता की सैलरी प्रक्रिया और बैंकिंग व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
आगे का कार्यक्रम क्या है?
इससे पहले यूएफबीयू अपनी मांगों को लेकर 11 सितंबर को भी हड़ताल कर चुका है। फिलहाल यूएफबीयू ने 28, 29 और 30 सितंबर की तीन दिन की हड़ताल का आह्वान किया है। अगर मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा तो 26 अक्तूबर 2026 से लगातार और अनिश्चितकालीन हड़ताल की भी घोषणा की गई है।