मनोज जरांगे की मांग क्या है?
इस बार जरांगे की सबसे बड़ी मांग उन 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड के आधार पर पात्र मराठों को कुनबी प्रमाण पत्र देने की है, जिनका रिकॉर्ड सरकार की शिंदे समिति को मिला है। उनका कहना है कि इन रिकॉर्ड के आधार पर सभी पात्र लोगों को प्रमाण पत्र मिलना चाहिए। उन्हें आशंका है कि सरकार इस आंकड़े को कम करने की कोशिश कर रही है।
उनकी मांगों में गजट रिकॉर्ड के आधार पर कुनबी प्रमाण पत्र जारी करना, पात्र लोगों को ओबीसी से मिलने वाले लाभ उपलब्ध कराना और मराठा आरक्षण से जुड़े अन्य फैसलों को लागू करना शामिल है। वह चाहते हैं कि प्रक्रिया केवल आश्वासन तक सीमित न रहे, बल्कि सरकारी स्तर पर स्पष्ट कार्रवाई हो।
सरकार ने क्या भरोसा दिया?
- सरकार की ओर से कहा गया है कि 5 सितंबर तक कुनबी रिकॉर्ड ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश की जा रही है।
- हैदराबाद गजट के आधार पर मराठा समुदाय के पात्र लोगों को प्रमाण पत्र जारी करने की कार्रवाई भी की जाएगी।
- उन्होंने मराठवाड़ा के मराठा समुदाय के लोगों से छह सितंबर से प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करने की अपील की।
- किसी तरह की परेशानी होने पर संबंधित जिला कलेक्टर के पास आवेदन करने को कहा गया है। हर जिले में नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए जाएंगे।
सरकार के मुताबिक शिंदे समिति को अब तक 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड मिले हैं। सरकार ने ओबीसी रियायतों से जुड़े सरकारी आदेश 8 सितंबर को जारी करने, मंत्रालय में अलग मराठा आरक्षण कक्ष बनाने और अन्नासाहेब पाटिल आर्थिक विकास निगम के लिए 300 करोड़ रुपये देने की बात भी कही है। मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने जरांगे से भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की लेकिन वे नहीं माने।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का कहना है कि सरकार उन मांगों पर बातचीत के लिए तैयार है जो संविधान और कानून के दायरे में हैं। उनका स्पष्ट रुख है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करने वाली मांगों पर बातचीत नहीं हो सकती।
क्या चाहते हैं जरांगे?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
जरांगे सरकार के आश्वासन से क्यों नहीं माने?
सरकार की ओर से भरोसा दिए जाने के बावजूद जरांगे ने अनशन खत्म करने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने सरकार को 11 सितंबर तक का समय दिया है। अगर तब तक मांगें पूरी नहीं हुईं तो 12 सितंबर को मुंबई की ओर कूच करने की चेतावनी दी है।
हालांकि 3 सितंबर को भाजपा विधायक प्रसाद लाड के साथ बातचीत के बाद जरांगे पानी पीने और सलाइन लेने के लिए तैयार हुए। उनका कहना है कि इलाज कराया जा सकता है, लेकिन मांगें पूरी होने तक अनशन जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अब उनका शरीर आगे अनशन करने की स्थिति में नहीं है, इसलिए वह इसी आंदोलन में अपनी सभी मांगें पूरी करवाना चाहते हैं।
उन्होंने कुछ मंत्रियों पर मराठा समुदाय को नुकसान पहुंचाने और लोगों को अदालत जाने के लिए प्रोत्साहित करने का आरोप भी लगाया है। उनका आरोप है कि मराठा आरक्षण का मुद्दा राजनीतिक श्रेय की लड़ाई में फंस गया है।
मराठा आरक्षण का मुद्दा कितना पुराना है?
मराठा आरक्षण की मांग को समझने के लिए इसके पुराने घटनाक्रम को देखना जरूरी है। 2000 के बाद यह मांग ज्यादा मुखर हुई। 2004 में महाराष्ट्र सरकार ने मराठा-कुनबी और कुनबी-मराठा जातियों को ओबीसी सूची में शामिल किया, लेकिन केवल मराठा पहचान रखने वाले लोगों को इसमें शामिल नहीं किया गया।
इसके बाद 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण की सरकार ने सरकारी नौकरियों और शिक्षा में मराठों को 16 फीसदी आरक्षण दिया। हालांकि इसे अदालत में चुनौती मिली और यह व्यवस्था टिक नहीं सकी।
2018 में देवेंद्र फडणवीस सरकार ने सेवानिवृत्त जस्टिस एमजी गायकवाड़ की अध्यक्षता वाले आयोग की रिपोर्ट के आधार पर मराठा समुदाय को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा माना। इसके बाद सरकारी नौकरियों में 12 फीसदी और शिक्षा में 13 फीसदी आरक्षण दिया गया।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस आरक्षण को मंजूरी दी, लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 5 मई 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने मराठा आरक्षण रद्द कर दिया। अदालत ने 50 फीसदी आरक्षण की सीमा से आगे जाने को स्वीकार नहीं किया। इस मामले की सुनवाई पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने की थी।
2024 में एकनाथ शिंदे सरकार ने सेवानिवृत्त जस्टिस सुनील शुक्रे की अध्यक्षता में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग बनाया। आयोग की रिपोर्ट में मराठा समुदाय को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा माना गया। इसके आधार पर सरकारी नौकरियों और शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण देने संबंधी विधेयक पारित किया गया।
कुनबी प्रमाण पत्र की मांग क्यों महत्वपूर्ण है?
मनोज जरांगे के मौजूदा आंदोलन का एक बड़ा हिस्सा कुनबी प्रमाण पत्र से जुड़ा है। इसका संबंध ओबीसी आरक्षण से है। जरांगे का तर्क है कि पुराने रिकॉर्ड और गजट में जिन मराठा परिवारों की पहचान कुनबी के रूप में मिलती है, उन्हें दस्तावेज और वंशावली के आधार पर कुनबी प्रमाण पत्र दिया जाए। इससे पात्र लोगों को ओबीसी श्रेणी के तहत मिलने वाले लाभ मिल सकते हैं।
यही वजह है कि 58 लाख पुराने कुनबी रिकॉर्ड इस आंदोलन में महत्वपूर्ण हो गए हैं। सरकार इन्हें आगे प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में इस्तेमाल करने की बात कह रही है, जबकि जरांगे चाहते हैं कि पात्र लोगों को बिना देरी प्रमाण पत्र मिले।
अब तक कितनी बार अनशन कर चुके हैं जरांगे?
मनोज जरांगे पाटिल ने 2023 से 2026 के बीच 10 बार अनशन किया, जिनकी कुल अवधि करीब 76 दिन रही। मौजूदा आंदोलन उनका 11वां अनशन है। जरांगे के आठ अनशन अंतरवाली सराटी में और दो मुंबई में हुए। सबसे लंबा अनशन 17-17 दिन के दो मौकों पर रहा।
पूरे अनशन की टाइमलाइन
- पहला अनशन: 29 अगस्त से 14 सितंबर 2023: 17 दिन
- दूसरा अनशन: 25 अक्तूबर से 2 नवंबर 2023: 9 दिन
- तीसरा अनशन: 26 और 27 जनवरी 2024: 2 दिन
- चौथा अनशन: 10 से 26 फरवरी 2024: 17 दिन
- पांचवां अनशन: 8 से 13 जून 2024: 6 दिन
- छठा अनशन: 20 से 24 जुलाई 2024: 5 दिन
- सातवां अनशन: 17 से 25 सितंबर 2024: 9 दिन
- आठवां अनशन: 25 से 30 जनवरी 2025: 6 दिन
- नौवां अनशन: 29 अगस्त से 2 सितंबर 2025: 5 दिन
- दसवां अनशन: 30 मई 2026 सुबह 10 बजे से 31 मई रात करीब 1 बजे तक: करीब 15 घंटे
- ग्यारहवां अनशन: 29 अगस्त से शुरू हुआ और सितंबर में जारी है।
2025 में क्या हुआ था, जब मुंबई तक पहुंचा आंदोलन?
2025 में जरांगे ने 29 अगस्त को मुंबई के आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया। उनकी मुख्य मांग थी कि मराठों को कुनबी मानकर ओबीसी आरक्षण का लाभ दिया जाए और पुराने हैदराबाद व सतारा गजट के आधार पर पात्र लोगों को कुनबी प्रमाण पत्र मिले।
2025 में कैसे-कैसे बढ़ा था आंदोलन?
- 29 अगस्त: जरांगे समर्थकों के साथ मुंबई पहुंचे और आजाद मैदान में अनशन शुरू किया था।
- 30 अगस्त: सरकार से बातचीत शुरू हुई, लेकिन समाधान नहीं निकला। जरांगे ने मराठवाड़ा के मराठों को कुनबी घोषित करने के लिए तुरंत सरकारी प्रस्ताव की मांग की थी।
- 31 अगस्त: बातचीत जारी रही, लेकिन जरांगे ने कहा कि सिर्फ आश्वासन नहीं, लिखित फैसला चाहिए।
- 1 सितंबर: कैबिनेट उपसमिति ने मांगों पर चर्चा की और समाधान की दिशा में बातचीत आगे बढ़ी।
- 2 सितंबर: सरकार ने आठ में से छह प्रमुख मांगें मानने पर सहमति जताई थी । इनमें हैदराबाद गजट लागू करना, पात्र मराठों को रिकॉर्ड और वंशावली के आधार पर कुनबी प्रमाण पत्र देना, पुराने मामलों को वापस लेना, मृत आंदोलनकारियों के परिवारों को मुआवजा व नौकरी, 58 लाख रिकॉर्ड के आधार पर प्रमाण पत्र की प्रक्रिया और गांव स्तर पर जांच समितियां बनाने जैसी मांगें शामिल थीं। इसके बाद मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ड्राफ्ट जीआर लेकर पहुंचे। जरांगे ने इसे स्वीकार किया और जूस पीकर पांच दिन पुराना अनशन खत्म कर दिया था।
फिर विवाद क्यों नहीं खत्म हुआ?
2025 में सरकार के लिखित प्रस्ताव के बाद अनशन खत्म हो गया था, लेकिन कुनबी प्रमाण पत्र और मराठा आरक्षण से जुड़ी सभी मांगों का समाधान नहीं हुआ। इसी को लेकर जरांगे ने फिर आंदोलन शुरू किया है।