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एक्सप्लेनर: ड्रग तस्करी पर कैसे लगेगी लगाम; ड्रोन, डार्कनेट और क्रिप्टो से निपटने की कैसे होगी तैयारी?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Tue, 22 Sep 2026 02:32 PM IST

सार

ड्रग तस्करी के बदलते तरीकों के बीच नई दिल्ली में 22-23 सितंबर को एएनटीएफ प्रमुखों का राष्ट्रीय सम्मेलन हो रहा है। ड्रोन, डार्कनेट और क्रिप्टो जैसे नए नेटवर्क से निपटने के लिए सरकार की क्या तैयारी है और 2026-29 का नया रोडमैप क्या कहता है? आइए जानते हैं।
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ड्रग तस्करी के खिलाफ सरकार का एक्शन प्लान - फोटो : Amar Ujala

ड्रग तस्करी के खिलाफ देश में आज से दो दिन तक बड़ा मंथन होने जा रहा है। नई दिल्ली में 22 और 23 सितंबर को एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स यानी एएनटीएफ प्रमुखों का तीसरा राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हो रहा है। 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के एएनटीएफ प्रमुख एक मंच पर जुटेंगे और चर्चा होगी कि बदलते ड्रग नेटवर्क पर कैसे शिकंजा कसा जाए। 

आखिर इस सम्मेलन में क्या खास है और भारत के सामने ड्रग तस्करी की चुनौती कितनी बड़ी है? तस्करों के खिलाफ बीते कुछ वर्षों में क्या-क्या कार्रवाई हुई है? आइए जानते हैं। 

सम्मेलन में क्या होगा?

आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस दौरान मादक पदार्थों के खिलाफ जागरुकता फैलाने वाले टीवी विज्ञापन जारी किए जाएंगे। लखनऊ और देहरादून में एनसीबी के नए जोनल कॉम्प्लेक्स की आधारशिला रखी जाएगी। बेहतर प्रदर्शन करने वाले एएनटीएफ को सम्मानित किया जाएगा और नए स्वरूप में तैयार एनसीबी की वेबसाइट भी शुरू की जाएगी।



दो दिवसीय सम्मेलन में नारकोटिक्स नियंत्रण विजन डॉक्यूमेंट 2026-29 के तहत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के एएनटीएफ के लिए तय लक्ष्यों की प्रगति पर चर्चा होगी। साथ ही ड्रग्स की आपूर्ति कम करने, नशे की मांग घटाने और इससे होने वाले नुकसान को कम करने के उपायों पर मंथन किया जाएगा।

इसके लिए आठ तकनीकी सत्र रखे गए हैं। इनमें संस्थागत व्यवस्था, ड्रग नेटवर्क और कार्टेल की कड़ियां तोड़ना, मांग में कमी, रोकथाम और पुनर्वास, कानून का प्रभावी प्रवर्तन, प्रीकर्सर और सिंथेटिक ड्रग्स, गुप्त प्रयोगशालाएं, अवैध खेती को नष्ट करना और वैकल्पिक खेती व डार्कनेट और क्रिप्टो जांच जैसे विषय शामिल हैं।

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ड्रग तस्करी के खिलाफ सरकार का एक्शन प्लान - फोटो : Amar Ujala
ड्रग तस्करी के खिलाफ देश में आज से दो दिन तक बड़ा मंथन होने जा रहा है। नई दिल्ली में 22 और 23 सितंबर को एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स यानी एएनटीएफ प्रमुखों का तीसरा राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हो रहा है। 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के एएनटीएफ प्रमुख एक मंच पर जुटेंगे और चर्चा होगी कि बदलते ड्रग नेटवर्क पर कैसे शिकंजा कसा जाए। 

आखिर इस सम्मेलन में क्या खास है और भारत के सामने ड्रग तस्करी की चुनौती कितनी बड़ी है? तस्करों के खिलाफ बीते कुछ वर्षों में क्या-क्या कार्रवाई हुई है? आइए जानते हैं। 

सम्मेलन में क्या होगा?

आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस दौरान मादक पदार्थों के खिलाफ जागरुकता फैलाने वाले टीवी विज्ञापन जारी किए जाएंगे। लखनऊ और देहरादून में एनसीबी के नए जोनल कॉम्प्लेक्स की आधारशिला रखी जाएगी। बेहतर प्रदर्शन करने वाले एएनटीएफ को सम्मानित किया जाएगा और नए स्वरूप में तैयार एनसीबी की वेबसाइट भी शुरू की जाएगी।

दो दिवसीय सम्मेलन में नारकोटिक्स नियंत्रण विजन डॉक्यूमेंट 2026-29 के तहत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के एएनटीएफ के लिए तय लक्ष्यों की प्रगति पर चर्चा होगी। साथ ही ड्रग्स की आपूर्ति कम करने, नशे की मांग घटाने और इससे होने वाले नुकसान को कम करने के उपायों पर मंथन किया जाएगा।

इसके लिए आठ तकनीकी सत्र रखे गए हैं। इनमें संस्थागत व्यवस्था, ड्रग नेटवर्क और कार्टेल की कड़ियां तोड़ना, मांग में कमी, रोकथाम और पुनर्वास, कानून का प्रभावी प्रवर्तन, प्रीकर्सर और सिंथेटिक ड्रग्स, गुप्त प्रयोगशालाएं, अवैध खेती को नष्ट करना और वैकल्पिक खेती व डार्कनेट और क्रिप्टो जांच जैसे विषय शामिल हैं।

भौगोलिक स्थिति - फोटो : Amar Ujala

भारत की भौगोलिक स्थिति कैसे है चुनौती?

एनसीबी की 2025 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत दुनिया के दो प्रमुख अवैध ड्रग उत्पादन क्षेत्रों के बीच स्थित है। एक तरफ गोल्डन क्रिसेंट है, जिसमें अफगानिस्तान, पाकिस्तान और ईरान का क्षेत्र आता है, जबकि दूसरी तरफ गोल्डन ट्राएंगल है, जिसमें म्यांमार, लाओस और थाईलैंड शामिल हैं।

भारत दोनों दिशाओं से आने वाले अवैध ड्रग प्रवाह से प्रभावित रहा है। देश की 15 हजार किलोमीटर से ज्यादा लंबी भूमि सीमा और 11 हजार किलोमीटर से ज्यादा लंबी समुद्री सीमा निगरानी की चुनौती को बढ़ाती है।

म्यांमार, नेपाल और बांग्लादेश से लगी सीमाओं के कई हिस्सों में कठिन भूभाग और अनौपचारिक रास्ते हैं। घने जंगल, पहाड़ी क्षेत्र, रेगिस्तान और नदी वाले इलाके सीमा की निगरानी को मुश्किल बनाते हैं।

चुनौती सिर्फ तस्करी के रास्तों तक सीमित नहीं है। भारत अब ड्रग्स के लिए केवल पारगमन वाला देश नहीं है, बल्कि एक बड़ा घरेलू बाजार भी है। इसके अलावा देश में बड़ा फार्मास्युटिकल विनिर्माण आधार और प्रीकर्सर केमिकल का उत्पादन होता है, जिनके गलत इस्तेमाल से सिंथेटिक ड्रग्स के अवैध उत्पादन का खतरा पैदा हो सकता है।

कौन सा राज्य बना ड्रग का सबसे बड़ा निशाना?

भारत-पाकिस्तान सीमा से लगे पंजाब के अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर और गुरदासपुर जैसे जिले ड्रोन तस्करी के सबसे बड़े हॉटस्पॉट बनकर उभरे हैं। ड्रोन से जुड़े 305 मामलों में से 298 मामले अकेले पंजाब में दर्ज किए गए। 

इनके जरिए मुख्य रूप से हाई-प्योरिटी हेरोइन और मेथामफेटामाइन की खेप भेजी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत-पाकिस्तान सीमा अब इस हवाई तस्करी का सबसे बड़ा केंद्र बन चुकी है।

ड्रग तस्करी के नए तरीके - फोटो : Amar Ujala

सीमा के साथ ऑनलाइन नेटवर्क भी बना नया रास्ता

ड्रग तस्करी के तरीके भी बदल रहे हैं। 26 जून 2026 को जारी विजन डॉक्यूमेंट में ड्रोन से ड्रग्स गिराने, समुद्री रास्ते से कंटेनर कार्गो, डार्कनेट, क्रिप्टो भुगतान, ऑनलाइन ऑर्डर-टू-डिलीवरी मॉडल और पार्सल जैसे तरीकों का जिक्र किया गया है।

यानी तस्करी का नेटवर्क अब सिर्फ जमीन या सीमा तक सीमित नहीं है। तकनीक और ऑनलाइन माध्यमों के जरिए भी ड्रग्स की खरीद, भुगतान और सप्लाई का नेटवर्क बनाया जा रहा है।

सिंथेटिक ड्रग्स की फैक्ट्रियां भी बढ़ीं

रिपोर्ट के मुताबिक, एनसीबी ने 2025 में 30 अवैध सिंथेटिक ड्रग लैब का भंडाफोड़ किया। यह संख्या पिछले तीन वर्षों के कुल मामलों से भी ज्यादा है। इन लैब में मुख्य रूप से मेफेड्रोन, एफेड्रिन और अवैध साइकोट्रॉपिक टैबलेट बनाई जा रही थीं। महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश ऐसे नेटवर्क के प्रमुख केंद्र रहे।

2021-2026 के बीच के आंकड़े - फोटो : Amar Ujala

फार्मास्यूटिकल दवाओं का भी हो रहा दुरुपयोग

  • रिपोर्ट में फार्मास्यूटिकल ड्रग डायवर्जन में भी बड़ा इजाफा दर्ज किया गया है। 
  • 2021 से 2025 के बीच इसमें 77 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 
  • इस दौरान बरामदगी 2,43,111 किलोग्राम तक पहुंची और बाद में 2,37,390 किलोग्राम रही।
  • पंजाब में 8.95 लाख से अधिक कोडीन आधारित कफ सिरप की बोतलें जब्त की गईं। 
  • इसके अलावा बुप्रेनॉर्फिन, ट्रामाडोल और अल्प्राजोलम जैसी दवाओं की अवैध सप्लाई भी बड़े पैमाने पर सामने आई।

2025 में एनसीबी ने कितनी कार्रवाई की?

  • एजेंसी ने 1,33,965 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 1,980 करोड़ रुपये थी।
  • इसी दौरान 447 मामलों में 994 ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 25 विदेशी नागरिक थे।
  • अदालतों में 131 मामलों में 265 ड्रग अपराधियों को सजा दिलाई गई। इनमें 39 को अधिकतम 20 साल की सजा मिली, जबकि 210 को 10 साल या उससे ज्यादा लेकिन 20 साल से कम की सजा मिली। इन दोषियों पर कुल 3.3 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया।
  • 2025 में एनसीबी की दोषसिद्धि दर 66.8 प्रतिशत रही, जबकि 2024 में यह 60.8 प्रतिशत थी।

बड़े ऑपरेशनों में क्या सामने आया?

  • एनसीबी की कार्रवाई में ड्रग तस्करी के अलग-अलग तरीकों का भी पता चला।
  • ऑपरेशन क्रिस्टल फोर्ट्रेस में दिल्ली से 328 किलोग्राम मेथामफेटामाइन जब्त किया गया।
  • ऑपरेशन केटामेलॉन में डार्कनेट से जुड़े ड्रग सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ। इसमें 1,127 एलएसडी ब्लॉट्स, 131.66 ग्राम केटामाइन और 70 लाख रुपये की क्रिप्टोकरेंसी जब्त की गई।
  • ऑपरेशन मेड मैक्स में चार महाद्वीपों और 10 से ज्यादा देशों में फैले अंतरराष्ट्रीय फार्मास्युटिकल ड्रग नेटवर्क का पता चला। -दिल्ली में 3.7 किलोग्राम ट्रामाडोल की बरामदगी से शुरू हुई जांच में एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म, ड्रॉप-शिपिंग और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया तक नियंत्रित दवाओं की सप्लाई का नेटवर्क सामने आया।
  • मुंबई में एक प्रोजेक्टर के अंदर छिपाकर ऑस्ट्रेलिया भेजी जा रही 200 ग्राम कोकीन भी बरामद की गई। आगे की जांच में 11.54 किलोग्राम कोकीन, हाइब्रिड कैनाबिस, टीएचसी आधारित गमीज और ड्रग तस्करी से जुड़ी रकम बरामद हुई।

कितने मामले सामने आए? - फोटो : Amar Ujala

ड्रग्स को नष्ट करने पर भी जोर

एनसीबी ने 2025 में 77,773 किलोग्राम मादक पदार्थ नष्ट किए, जिनकी कीमत करीब 3,889 करोड़ रुपये थी। इसके अलावा 26 जून को शुरू किए गए ऑनलाइन ड्रग्स विनष्टीकरण पखवाड़े के तहत 2,09,500 किलोग्राम मादक पदार्थ, जिनकी कीमत 6,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई गई, नष्ट करने का लक्ष्य रखा गया था।

2004 से 2026 के बीच कार्रवाई के आंकड़े

गृह मंत्रालय के मुताबिक, 2004 से 2014 के बीच 40,000 करोड़ रुपये कीमत के 26 लाख किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए गए। 2014 से 2026 के बीच यह आंकड़ा 1,84,000 करोड़ रुपये कीमत के 1 करोड़ 18 लाख किलोग्राम रहा।

मादक पदार्थों को नष्ट करने के मामले में 2004 से 2014 के बीच 8,000 करोड़ रुपये कीमत के 3,26,000 किलोग्राम ड्रग्स नष्ट किए गए। 2014 से 2026 के बीच यह आंकड़ा 89,896 करोड़ रुपये कीमत के 42,47,000 किलोग्राम रहा।

अवैध अफीम की खेती के खिलाफ कार्रवाई में 2020 में 10,000 एकड़ और 2025 में 42,282 एकड़ अवैध अफीम की फसल नष्ट की गई।

इसी अवधि में 2004 से 2014 के बीच 1,73,000 मामले दर्ज हुए और 1,95,000 गिरफ्तारियां हुईं। 2014 से 2026 के बीच 8,75,000 मामले दर्ज हुए और 10,97,000 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

अब अगले तीन साल की रणनीति क्या है?

नारकोटिक्स नियंत्रण विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 में ड्रग तस्करी से निपटने के लिए अगले तीन साल का रोडमैप तैयार किया गया है। इसका फोकस सिर्फ तस्करों को पकड़ने पर नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई, सिंथेटिक ड्रग्स और प्रीकर्सर केमिकल पर नियंत्रण, नशे की मांग कम करने और एजेंसियों की क्षमता बढ़ाने पर है।

डार्कनेट और क्रिप्टो के लिए क्या है अलग व्यवस्था?

4 अगस्त को लोकसभा में गृह मंत्रालय ने बताया कि एनसीबी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, एन्क्रिप्टेड संचार और डार्कनेट के जरिए होने वाली ड्रग तस्करी की पहचान के लिए साइबर विशेषज्ञों की मदद ले रहा है।

अधिकारियों को डिजिटल फॉरेंसिक, डार्कनेट निगरानी और क्रिप्टोकरेंसी जांच की ट्रेनिंग दी गई है। 2026-29 के विजन डॉक्यूमेंट में सभी एएनटीएफ में डार्कनेट और क्रिप्टोकरेंसी सेल बनाने व आधुनिक तकनीक और एआई आधारित विश्लेषण के इस्तेमाल की योजना बताई गई है।

सिर्फ सप्लाई नहीं, नशे की मांग घटाने पर भी जोर

विजन डॉक्यूमेंट में नशे की मांग कम करने के लिए ड्रग-फ्री जोन, जागरूकता अभियान और माता-पिता, शिक्षकों, शैक्षणिक संस्थानों तथा युवाओं की भागीदारी पर जोर दिया गया है।

लोकसभा में दिए जवाब के मुताबिक शैक्षणिक संस्थानों के आसपास 500 मीटर तक ड्रग-फ्री कैंपस बनाने और केंद्रीय वित्त पोषित उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र कल्याण कार्यक्रम के तहत सहमति आधारित स्क्रीनिंग की प्रस्तावित व्यवस्था भी विजन डॉक्यूमेंट में शामिल है।
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