जनगणना 2027 का सवाल सिर्फ 'कितने लोग हैं?' जानने तक सीमित नहीं रहेगा। स्वतंत्रता दिवस से ठीक एक दिन पहले केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने उन 40 सवालों की सूची जारी कर दी है, जिन्हें जनगणना के दौरान पूछा जाएगा। पहली बार आपको जाति से जुड़ी जानकारी भी देनी होगी। 40 में से दो सवाल जाति से ही जुड़े हैं। वहीं, सबसे ज्यादा आठ सवाल आपके रोजगार और कामकाज के बारे में हैं। जनगणना के सवालों में व्यक्ति की पहचान, परिवार, शिक्षा, रोजगार, प्रवास, महिलाओं की स्थिति, वित्तीय पहुंच और डिजिटल पहचान तक की जानकारी पूछी जाएगी। कौन हैं आप, क्या करते हैं, कहां से आए, क्यों आए और आपके पास कौन-कौन से दस्तावेज हैं, इस तरह के सवालों के जरिए आपकी जिंदगी पूरी तस्वीर जानने की कोशिश होगी। आइए जानते हैं कि इस जनगणना में पूछे जाने वाले प्रश्नों में क्या खास रहेगा...
census 2027
- फोटो : अमर उजाला
रोजगार और कामकाज के बारे में क्या जानकारी पूछी जाएगी?
इसके लिए जनगणना में आठ सवाल रखे गए हैं। इनके जरिए यह जानने की कोशिश होगी कि आपने पिछले साल काम किया या नहीं। आपकी आर्थिक गतिविधि, पेशा, उद्योग/व्यापार/सेवा, कामगार की श्रेणी, गैर-आर्थिक गतिविधि, काम की तलाश, काम की जगह तक कैसे पहुंचते हैं, ये सवाल भी पूछे जाएंगे।
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महिलाओं से जुड़े कौन से सवाल पूछे जाएंगे?
महिलाओं के लिए खास तौर पर सवाल नंबर 31, 32 और 33 हैं। इनमें यह पूछा जाएगा कि अभी कितने बच्चे जीवित हैं? जीवन में कुल कितने बच्चे पैदा हुए? पिछले एक साल में कितने बच्चे पैदा हुए?
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आपने जगह क्यों बदली?
जनगणना सिर्फ यह नहीं बताएगी कि लोग कहां रह रहे हैं, बल्कि यह भी समझने में मदद कर करेगी है कि देश के लोग क्यों एक जगह से दूसरी जगह गए। कुल पांच सवाल यानी प्रश्न 26 से 30 के बीच जन्मस्थान, पिछला निवास, प्रवास का कारण, मौजूदा जगह पर रहने की अवधि, स्थायी पते से जुड़ी जानकारी पूछी जाएगी।
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सबसे दिलचस्प बदलाव क्या है?
जनगणना किसी व्यक्ति की 'पहचान से डिजिटल पहचान' तक पहुंचती दिखाई देती है। साक्षरता के अलावा डिजिटल साक्षरता के बारे में भी सवाल पूछा जाएगा। कुल छह सवाल ऐसे होंगे, जो नागरिकों की डिजिटल-वित्तीय पहचान से जुड़े होंगे। जैसे- कुल बैंक खातों की संख्या, मोबाइल नंबर, आधार नंबर, वोटर ID नंबर, पासपोर्ट नंबर और ड्राइविंग लाइसेंस की उपलब्धता।
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इसी के साथ आपने शादी कितनी उम्र में की? पिछले साल आपने काम किया था या नहीं? कोविड-19 का टीका कहां लगावाया था, इस तरह के सवाल भी पूछे जाएंगे। महामारी के पांच-छह साल बाद भी इसे जनगणना जैसे स्थायी राष्ट्रीय दस्तावेज में शामिल करना बताता है कि सरकार कोविड टीकाकरण डेटा को दीर्घकालिक रिकॉर्ड में सुरक्षित रखना चाहती है।