चारों पदों की क्या जिम्मेदारी है?
- अध्यक्ष डूसू का प्रमुख निर्वाचित पदाधिकारी होता है। वह छात्रों का प्रतिनिधित्व करता है और विश्वविद्यालय की अकादमिक तथा कार्यकारी परिषद की बैठकों में छात्रों की बात रखता है।
- उपाध्यक्ष अध्यक्ष की सहायता करता है। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में संघ की गतिविधियों की अध्यक्षता करता है और आंतरिक समितियों से जुड़े काम देखता है।
- सचिव संघ का प्रमुख प्रशासनिक पदाधिकारी होता है। वह आधिकारिक पत्राचार और रिकॉर्ड संभालने के साथ बैठकों और संघ की गतिविधियों के आयोजन में भूमिका निभाता है।
- संयुक्त सचिव वित्तीय रिकॉर्ड, कार्यक्रमों के आयोजन, कैंपस संचार और छात्रों की शिकायतों से जुड़े दस्तावेजी काम में भूमिका निभाता है।
उम्मीदवार बनने की क्या शर्तें हैं?
डूसू चुनाव में उम्मीदवार बनने के लिए उम्र, पढ़ाई और उपस्थिति से जुड़ी शर्तें निर्धारित हैं।
- स्नातक छात्र: 17 से 22 वर्ष
- स्नातकोत्तर छात्र: 24 से 25 वर्ष तक
- शोधार्थी: अधिकतम 28 वर्ष
इसके अलावा उम्मीदवार नियमित छात्र होना चाहिए। उसके खिलाफ शैक्षणिक अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। कोई बैकलॉग, कंपार्टमेंट या फेल विषय नहीं होना चाहिए।उम्मीदवार के लिए निर्धारित अवधि में कम से कम 75 प्रतिशत उपस्थिति भी जरूरी है। केंद्रीय पद के लिए उम्मीदवार एक से अधिक बार चुनाव नहीं लड़ सकता।
चुनाव प्रचार में कितना खर्च कर सकते हैं?
एक उम्मीदवार के लिए चुनाव प्रचार खर्च की अधिकतम सीमा 5,000 रुपये है। चुनाव के बाद उम्मीदवार को अपने खर्च का ऑडिटेड हिसाब जमा करना होता है।
2026 में कौन-कौन उम्मीदवार मैदान में?
2026 के डूसू चुनाव में चार केंद्रीय पदों के लिए कुल 20 उम्मीदवार मैदान में हैं
- अध्यक्ष: सात
- उपाध्यक्ष: पांच
- सचिव: चार
- संयुक्त सचिव: चार
अध्यक्ष पद के उम्मीदवार हैं: अनन्या रतूड़ी, अश्मित कुमार, एजाज मंसूरी, समर्थ बेनीवाल, समीर कुमार, विजय शंकर मीणा और यश डबास।
उपाध्यक्ष पद पर अरण्या सिंह राठौर, दीपांशु शौकीन, इशु मौर्य, वीर छत्रथ और अक्षत शिखर उम्मीदवार हैं।
सचिव पद के लिए नम्रता चौधरी, पंकज कुमार, रिया छावड़ी और स्टैंजिन डेसक्योंग मैदान में हैं।
संयुक्त सचिव पद पर बी. पारिजात, गोपाल चौधरी, लक्ष्य राज सिंह और विशेष यादव चुनाव लड़ रहे हैं।
उम्मीदवारों की क्या है खासियत?
इस बार के उम्मीदवारों में अंतरराष्ट्रीय स्तर के टेनिस खिलाड़ी, एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैंडबॉल खिलाड़ी, दृष्टिबाधित छात्र और पहली बार लद्दाख से कोई छात्र भी शामिल है।
एबीवीपी का पैनल
अध्यक्ष पद के उम्मीदवार यश डबास कंझावला, दिल्ली के रहने वाले हैं। वे अंतरराष्ट्रीय स्तर के टेनिस खिलाड़ी हैं और स्पेन, ऑस्ट्रेलिया व सर्बिया में आईटीएफ प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय का विश्वविद्यालय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिनिधित्व किया है और खेलो इंडिया व अखिल भारतीय विश्वविद्यालय खेलों में भी हिस्सा लिया है।
संयुक्त सचिव पद के उम्मीदवार लक्ष्य राज सिंह एशियाई खेलों और विश्व चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार इशु मौर्य कैंपस लॉ सेंटर में पढ़ते हैं और 2021 से एबीवीपी से जुड़े हैं। वे सत्यवती कॉलेज मॉर्निंग इकाई के अध्यक्ष और स्टूडेंट्स फॉर सेवा के सह-संयोजक रह चुके हैं।
सचिव पद की उम्मीदवार रिया छावड़ी श्री अरविंदो कॉलेज की चौथे वर्ष की बीए कार्यक्रम की छात्रा हैं। वे बादरपुर के किसान परिवार से आती हैं और अंतर-महाविद्यालय स्तर पर बास्केटबॉल खेल चुकी हैं।
एनएसयूआई का पैनल
एनएसयूआई के चारों उम्मीदवार बौद्ध अध्ययन में एमए कर रहे हैं। अध्यक्ष पद के उम्मीदवार विजय शंकर मीणा और संयुक्त सचिव पद के उम्मीदवार गोपाल चौधरी राजस्थान से हैं और दोनों प्रथम वर्ष के छात्र हैं। उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार वीर छत्रथ दिल्ली से हैं और प्रथम वर्ष में हैं। सचिव पद की उम्मीदवार नम्रता चौधरी दूसरे वर्ष की छात्रा हैं। एनएसयूआई ने किफायती आवास, बेहतर बुनियादी ढांचे और छात्र सुरक्षा को अपने प्रमुख मुद्दों में रखा है। एनएसयूआई, कांग्रेस का छात्र संगठन है और इसकी स्थापना 1971 में हुई थी।
आइसा-एसएफआई गठबंधन
आइसा-एसएफआई गठबंधन 'नया, छात्र-नेतृत्व वाला डूसू' बनाने की बात कह रहा है। गठबंधन ने पैसे और बाहुबल की राजनीति के खिलाफ तथा सुलभ और किफायती दिल्ली विश्वविद्यालय के मुद्दे को उठाया है।
अध्यक्ष पद की उम्मीदवार अनन्या रतूड़ी यौन उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव से जुड़े अभियानों में शामिल रही हैं। उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार अक्षत शिखर ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के बाद हुए प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था। बाद में वे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में आइसा के 23 दिन के अनशन में भी शामिल हुए।
सचिव पद की उम्मीदवार स्टैंजिन डेसक्योंग हिंदू कॉलेज में एमएससी गणित की प्रथम वर्ष की छात्रा हैं और लेह से हैं। गठबंधन के अनुसार वह डूसू चुनाव लड़ने वाली पहली लद्दाखी छात्रा हैं। स्नातक की पढ़ाई के दौरान वे रामजस कॉलेज छात्र संघ की उपाध्यक्ष रही थीं।
संयुक्त सचिव पद के उम्मीदवार बी. पारिजात हंसराज कॉलेज में एमए अंग्रेजी की पढ़ाई कर रहे हैं और पीजीडीएवी कॉलेज की साहित्यिक सोसायटी के अध्यक्ष रह चुके हैं।
वहीं आम आदमी पार्टी के छात्र संगठन एएसएपी अध्यक्ष पद के लिए अश्मित कुमार पवार और सचिव पद के लिए पंकज कुमार को उतारा है। इस पैनल से उपाध्यक्ष और संयुक्त सचिव पद के लिए कोई उम्मीदवार नहीं है।
डूसू की कहानी कहां से शुरू हुई?
डूसू की कहानी 1954 के पहले चुनाव से भी पहले शुरू हो गई थी। 6 अगस्त 1947 को दिल्ली विश्वविद्यालय की कार्यकारिणी की बैठक में छात्रों के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर प्रतिनिधि संगठन बनाने का प्रस्ताव सामने आया था। उस समय कुलपति ने बताया था कि छात्रों का एक प्रतिनिधि समूह विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए यूनियन बनाना चाहता है।
इसके संविधान और कामकाज की प्रक्रिया तैयार करने के लिए समिति बनाने का प्रस्ताव रखा गया। यानी देश की आजादी से ठीक पहले ही दिल्ली विश्वविद्यालय में एक साझा छात्र प्रतिनिधि संस्था बनाने की सोच सामने आ चुकी थी।
1949 में डूसू का औपचारिक उद्घाटन
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ का औपचारिक उद्घाटन 9 अप्रैल 1949 को हुआ। इसका उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने किया था।
डूसू का पहला चुनाव 1954 में हुआ। इसी चुनाव में गजराज बहादुर नागर डूसू के पहले अध्यक्ष चुने गए। गजराज बहादुर नागर ने दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई की थी। बाद में उन्होंने मुख्यधारा की राजनीति में कदम रखा। हरियाणा विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक वे 1977 में मेवला महाराजपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए और बाद में हरियाणा सरकार में खाद्य व आपूर्ति मंत्री रहे।
1954 का चुनाव आज जैसा नहीं था
आज डूसू के केंद्रीय पदों के लिए छात्र सीधे मतदान करते हैं, लेकिन शुरुआती वर्षों में व्यवस्था अलग थी। 1972 तक कॉलेज पहले अपने प्रतिनिधि यानी काउंसलर चुनते थे। इसके बाद यही काउंसलर डूसू के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव करते थे। यानी उस समय डूसू का चुनाव अप्रत्यक्ष व्यवस्था से होता था। छात्रों ने केंद्रीय पदों के लिए सीधे मतदान की मांग उठाई। 1972-73 में लंबे आंदोलन के बाद चुनाव व्यवस्था में बदलाव हुआ और 1973 से डूसू में प्रत्यक्ष मतदान शुरू हुआ।
डूसू से निकले बड़े नेता
- फोटो : Amar Ujala
डूसू से निकले प्रमुख राजनीतिक चेहरे कौन-कौन रहे?
डूसू को लंबे समय से छात्र राजनीति के अहम मंच के तौर पर देखा जाता है। यहां से छात्र राजनीति शुरू करने वाले कई लोग आगे चलकर दिल्ली और राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हुए। इनमें कुछ ने केंद्र सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी संभाली, तो कुछ विधायक, सांसद और संगठन के बड़े पदों तक पहुंचे।
अरुण जेटली
एसआरसीसी के छात्र रहे अरुण जेटली 1974 में एबीवीपी के टिकट पर डूसू अध्यक्ष चुने गए थे। आपातकाल के दौरान उन्होंने छात्र आंदोलनों में हिस्सा लिया और जेल भी गए। बाद में वे भाजपा में सक्रिय हुए और केंद्र में वित्त मंत्री, रक्षा मंत्री तथा राज्यसभा में सदन के नेता जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे।
अजय माकन
हंसराज कॉलेज से पढ़ाई करने वाले अजय माकन ने 1985 में 21 साल की उम्र में डूसू अध्यक्ष का चुनाव जीता था। छात्र राजनीति के बाद वे दिल्ली विधानसभा पहुंचे और आगे चलकर केंद्र सरकार में खेल मंत्री तथा आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्री रहे।
अलका लांबा
अलका लांबा 1995 में एनएसयूआई की ओर से डूसू अध्यक्ष चुनी गई थीं। छात्र राजनीति के बाद उन्होंने मुख्यधारा की राजनीति में कदम रखा। वे चांदनी चौक से दिल्ली विधानसभा की सदस्य रहीं और कांग्रेस संगठन में भी जिम्मेदारी संभाली। वर्तमान में वे ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।
रेखा गुप्ता
दौलत राम कॉलेज की छात्रा रेखा गुप्ता 1995-96 में डूसू महासचिव और 1996-97 में अध्यक्ष रहीं। इसके बाद उन्होंने भाजपा संगठन में काम किया और दिल्ली नगर निगम की राजनीति में सक्रिय रहीं। वे दक्षिण दिल्ली नगर निगम की मेयर भी रहीं। 2025 में शालीमार बाग से विधायक चुने जाने के बाद उन्हें दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाया गया।
और कौन-कौन से नाम?
डूसू की छात्र राजनीति से आगे बढ़ने वाले अन्य चर्चित चेहरों में गजराज बहादुर नागर, सुभाष चोपड़ा, विजय जॉली, विजय गोयल, सुधांशु मित्तल, आशीष सूद, रागिनी नायक, अमृता धवन और नूपुर शर्मा शामिल हैं।
इनमें गजराज बहादुर नागर 1954-55 में डूसू के पहले अध्यक्ष रहे और बाद में हरियाणा सरकार में मंत्री बने। सुभाष चोपड़ा ने आगे चलकर दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष और दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। विजय गोयल केंद्र सरकार में मंत्री और सांसद रहे, जबकि विजय जॉली दिल्ली की राजनीति में सक्रिय रहे।
सुधांशु मित्तल ने भाजपा में राष्ट्रीय स्तर पर संगठनात्मक और राजनीतिक जिम्मेदारियां संभालीं। आशीष सूद डूसू अध्यक्ष रहने के बाद दिल्ली की राजनीति में सक्रिय हुए। सूद अभी दिल्ली सरकार में मंत्री हैं। रागिनी नायक और अमृता धवन ने छात्र राजनीति के बाद कांग्रेस संगठन में काम किया। नूपुर शर्मा डूसू अध्यक्ष रहने के बाद भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता रहीं।