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बच्चों की थाली पर सवाल: सरकारी स्कूल की रसोई में एक्सपायर्ड मसाला मिलने का दावा, दीपके ने सरकार से पूछा सवाल

Sat, 29 Aug 2026 05:12 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

अभिजीत दीपके ने सरकारी स्कूल की रसोई का वीडियो साझा कर बच्चों के भोजन में कथित तौर पर एक्सपायर्ड मसाले के इस्तेमाल का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सत्ता में बैठे लोग ऐसा खाना अपने बच्चों को खिलाएंगे। यह निरीक्षण स्कूल ठीक करो अभियान के तहत किया गया।
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एक्सपायर्ड मसाले के दावे से मचा सवाल - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने शनिवार को महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के औंढा स्थित एक सरकारी स्कूल की रसोई का वीडियो साझा कर बच्चों को कथित तौर पर एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री दिए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने अपने एक्स पोस्ट में सरकार से सवाल किया कि क्या सत्ता में बैठे लोग ऐसा खाना अपने बच्चों को भी खिलाएंगे?

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दीपके ने दावा किया कि स्कूल की रसोई में जांच के दौरान एक मसाले का पैकेट मिला, जिस पर अगस्त 2025 में पैक होने की तारीख दर्ज थी। उनके मुताबिक, इस पैकेट को फरवरी 2026 से पहले इस्तेमाल किया जाना था। दीपके ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद ऐसी सामग्री का इस्तेमाल ग्रामीण इलाकों के बच्चों के भोजन में किया जा रहा है।

क्या वीडियो में एक्सपायर्ड मसाले का पैकेट दिखाया गया?

साझा किए गए वीडियो में अभिजीत दीपके स्कूल की रसोई का निरीक्षण करते नजर आ रहे हैं। इसी दौरान वह मसाले के पैकेट की तारीख दिखाते हुए सवाल उठाते हैं। उन्होंने दावा किया कि यह खाद्य सामग्री इस्तेमाल की निर्धारित अवधि पार कर चुकी थी। दीपके ने अपने पोस्ट में कहा कि ग्रामीण भारत के बच्चों को एक्सपायर्ड खाना दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस तरह के मुद्दे उठाने पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाती है, तो भी वे कथित सच्चाई को सामने लाना बंद नहीं करेंगे।
 

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खराब फिल्टर और बाथरूम में पानी नहीं होने का आरोप

डिपके ने स्कूल की पानी की टंकी भी देखी और उसमें मौजूद पानी की जांच की। उन्होंने संबंधित अधिकारी से फोन पर बात करते हुए दावा किया कि स्कूल में फिल्टर लगा होने के बावजूद उसके काम नहीं करने के कारण छात्र बोरवेल का पानी पी रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल के बाथरूम में पानी की व्यवस्था नहीं है। डिपके ने स्कूल की अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की।

87 छात्रों के लिए सिर्फ दो कमरे होने का दावा

डिपके के अनुसार, स्कूल में 87 छात्र पढ़ते हैं, लेकिन उनके लिए केवल दो कक्षाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल में चार कक्षाओं के लिए मंजूरी है, लेकिन उपलब्ध कमरों की संख्या जरूरत के मुकाबले काफी कम है। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामीण सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।

क्या है 'स्कूल ठीक करो' अभियान?

यह निरीक्षण सीजेपी के 'स्कूल ठीक करो' अभियान के तहत किया गया। अभियान का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों में मौजूद कथित कमियों को सामने लाना और सरकार से उन पर कार्रवाई की मांग करना है। अभियान के तहत स्कूलों में केवल कक्षाओं की स्थिति ही नहीं, बल्कि बुनियादी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इनमें स्कूल की इमारत, शौचालय और बच्चों के लिए उपलब्ध अन्य जरूरी सुविधाएं शामिल हैं।

गांव में स्कूल नहीं तो बच्चों की पढ़ाई कैसे?

दीपके ने महाराष्ट्र में अभियान के तहत अपनी पहली स्कूल यात्रा का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, कई छात्रों को पढ़ाई के लिए कई किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है, क्योंकि उनके गांव में स्कूल मौजूद नहीं है। इसके अलावा, पर्याप्त परिवहन सुविधा का अभाव भी बच्चों के सामने एक समस्या है। सीजेपी का कहना है कि अभियान केवल स्कूल के अंदर की स्थिति तक सीमित नहीं है। इसमें यह भी देखा जा रहा है कि बच्चे सुरक्षित तरीके से स्कूल तक पहुंच पा रहे हैं या नहीं और वहां पहुंचने के बाद उन्हें बुनियादी सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं।

देशभर में स्कूलों का डेटा जुटाने की तैयारी

अभियान के तहत दीपके ने अभिभावकों और सरकारी अधिकारियों से स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर एक चेकलिस्ट तैयार करने की अपील की है। पार्टी महाराष्ट्र समेत देश के अलग-अलग हिस्सों के स्कूलों से जानकारी जुटाने की योजना बना रही है। इसके बाद इस जानकारी को एकत्र कर स्कूलों की स्थिति से जुड़ा डेटा तैयार किया जाएगा। हालांकि, अभियान का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि जुटाए गए आंकड़ों और जांच के आधार पर जमीन पर कितनी ठोस कार्रवाई होती है।

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