गन्ने में शक्कर स्तर का सही पता नहीं लगने की वजह से किसानों को गन्ने का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। अगर गन्ने में शक्कर के स्तर का सही तरीके से पता लगाया जाए, तो कीमत भी अधिक मिलेगी और किसानों की आर्थिक दशा में भी सुधार होगा। शुगर केन सैंप्लर मशीन का ईजाद करने वाले जकरियास मैथ्यू ने बुधवार को गन्ने के किसानों की समस्याओं पर एक चर्चा में ये बातें बताईं।
मैथ्यू ने बताया कि पुणे स्थित वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट के सहयोग से इस मशीन की निर्माण किया गया है। इसकी खरीदारी पर भारत सरकार मिलों को 75 फीसदी की सब्सिडी देती है। फिर भी चीनी मिलें शक्कर स्तर का सही पता लगाने वाली मशीनों को नहीं लगा रही हैं। उन्होंने बताया कि चीनी मिलें किसानों को गन्ने में 9-10 फीसदी शक्कर प्राप्ति के हिसाब से गन्ने का भुगतान कर रही हैं, जबकि शक्कर प्राप्ति की असली मात्रा 12 फीसदी तक होती है।
मैथ्यू ने बताया कि गन्ने में शक्कर के 12 फीसदी स्तर के हिसाब से यदि किसी मिल में रोजाना 4,000 टन गन्ने की पेराई होती है, तो 480 टन शक्कर की प्राप्ति होगी। लेकिन मिल मालिक अमूमन इसे 400 टन शक्कर की प्राप्ति बताते हैं। उन्होंने बताया कि देश में छोटी-बड़ी लगभग 600 चीनी मिलें चल रही हैं, लेकिन किसानों को शक्कर की सही प्राप्ति के हिसाब से कीमत नहीं मिल रही है।