कैराना-नुरपूर उपचुनाव में भाजपा को मिली हार ने योगी मंत्रिमंडल का विस्तार फिलहाल टाल दिया है। पहले उपचुनाव के तत्काल बाद विस्तार की तैयारी थी़। अब सूबे में पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन चुके गठबंधन की काट ढूंढने और हार पर विस्तृत मंथन के बाद ही मंत्रिमंडल विस्तार होगा। इस क्रम में सूबे के दोनों सहयोगियों सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और अपना दल को भी विश्वास में लिया जाएगा।
राज्य संगठन में अहम भूमिका निभा रहे एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक दरअसल उपचुनाव के नतीजे के बाद पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने विस्तार से पहले व्यापक समीक्षा का मन बनाया है। समीक्षा के क्रम में ही महागठबंधन की हार का तोड़ ढूंढा जाएगा। फिर इसी फार्मूले के आधार पर क्षेत्रवार सोशल इंजीनियरिंग के खांचे में फिट बैठने वाले नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह देने के साथ ही कुछ चेहरों को सरकार से संगठन में भेजा जाएगा। निश्चित तौर पर विस्तार से पूर्व एक बार फिर से राज्य में पार्टी के दोनों सहयोगियों से बातचीत होगी। ऐसे में विस्तार तत्काल संभव नहीं है।
उपचुनाव के नतीजों के संदर्भ में उक्त वरिष्ठ नेता का कहना था कि फूलपुर-गोरखपुर की तरह ही नूरपुर कैराना में भी पार्टी अपने समर्थकों का उम्मीद के अनुरूप वोट नहीं करा पाई। हालांकि कैराना में ओबीसी बिरादरी पार्टी के पक्ष में रही मगर जाट बिरादरी बंट गई। यह बिरादरी शामली में तो पार्टी से जुड़ी रही मगर नुकुर और गंगोह में ऐसा नहीं हो पाया। इसके अलावा कैराना में दलित-मुस्लिम बिरादरी ने विपक्ष के उम्मीदवार के पक्ष में जम कर वोट डाला।
राजभर ही नहीं अपना दल भी नाखुश
सूबे में सुहेलदेव पार्टी ही नहीं अपना दल भी कई मुद्दों पर नाखुश है। हालांकि अपना दल ने अपनी नाखुशी ओमप्रकाश राजभर की तर्ज पर सार्वजनिक नहीं की है। सूत्रों के मुताबिक अपना दल केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल को कार्यालय और काम न देने के अलावा बड़े कार्यक्रमों की सूचना न दिए जाने से खफा है। इसके अलावा पार्टी राज्य में अपने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा से भी खफा है।