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EXCLUSIVE- पीएम मोदी की शाहजहांपुर में गन्ना किसानों के लिए की गई घोषणा पर अमल शुरू

Wed, 25 Jul 2018 02:26 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शाहजहांपुर रैली में गन्ना किसानों के संबंध में की गई घोषणा पर अमल शुरू हो गया है। केंद्र सरकार ने देश भर के चीनी मिल प्रबंधन से एथेनॉल प्लांट लगाने के प्रस्ताव मांगे हैं। एथनॉल प्लांट लगाने पर केंद्र सरकार प्लांट की लागत पर बैंक ब्याज का 50 फीसदी या 20 करोड़ (दोनों में जो कम हो) तक की सब्सिडी भी देगी। अब तक चीनी मिलें किसानों से खरीदे गए गन्ने से केवल चीनी बनाती हैं। देश भर में चीनी की उत्पादकता मांग से अधिक है। बाजार में चीनी के रेट गिरने से चीनी मिल प्रबंधन घाटे की दुहाई देकर किसानों के गन्ने का बकाया रोक लेते हैं।

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चीनी बनने के बाद गन्ने के जूस का जो शीरा बचता है, बाजार में उसकी डिमांड न के बराबर है। चीनी मिलें शीरे का भंडारण नहीं कर पा रहीं। दूसरी ओर समय पर बकाया न मिल पाने से किसान परेशान होकर धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करते हैं। सरकार ने चीनी मिलों से बकाया भुगतान किसानों को तुरंत दिलाने के लिए अहम कदम उठाते हुए गन्ने के जूस से चीनी के अतिरिक्त एथेनॉल बनाने की कार्ययोजना तैयार की है। इसके लिए चीनी मिलों से 19 अगस्त तक एथेनॉल प्लांट लगाने के लिए ऑनलाइन प्रोजेक्ट मांगे गए हैं। बरेली में द्वारिकेश ग्रुप के अलावा अन्य चीनी मिल समूह एथेनॉल प्लांट लगाने के लिए प्रोजेक्ट भेजने की तैयारी कर रहे हैं।

घाटे से उबरेंगी चीनी मिलें
प्रगतिशील किसान और चीनी मिल सलाहकार अनिल साहनी का मानना है कि पहले शीरा पांच रुपये प्रति किलो बिकता था, जिसे अल्कोहल कंपनियां शराब बनाने के लिए खरीदती थीं। गन्ने की उत्पादकता बढ़ने से चीनी मिलों में क्षमता से अधिक चीनी और शीरे का उत्पादन हो गया। इसके चलते शीरे के भंडारण की समस्या उत्पन्न हो गई। बीते सीजन में चीनी मिलों को अपने गोदामों से शीरा बेचने के लिए शराब कंपनियों को भाड़ा तक अपनी जेब से देना पड़ा। शराब कंपनियों ने एक रुपये प्रति लीटर के बिल मजबूरी में काटे। क्योंकि बिना बिल काटे शीरा एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया नहीं जा सकता।
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एथेनॉल बनाने से होगा भारी मुनाफा
अगर चीनी मिलें गन्ने के जूस या शीरे से इथेनॉल बनाती हैं तो एक क्विंटल शीरे से 22 लीटर एथेनॉल बनेगा। इथेनॉल के बाजार में रेट 41 रुपये प्रति लीटर हैं। एथेनॉल बनाने से चीनी मिलों को भारी मुनाफा होगा। इसके चलते गन्ना किसानों का भुगतान समय पर होगा। किसानों को गन्ना बिक्री का भरपूर बाजार मिलेगा। इससे वह आर्थिक रूप से समृद्ध हो सकेंगे। 

क्या है एथेनॉल
एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है। इसे पेट्रोल में मिलाकर गाड़ियों में फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। एथेनॉल का उत्पादन गन्ने के जूस से होता है। हालांकि शर्करा वाली अन्य फसलों से भी एथेनॉल का उत्पादन किया जा सकता है। एथेनॉल से खेती और पर्यावरण दोनों को फायदा है। ब्राजील में करीब 40 फीसदी गाड़ियां सौ फीसदी एथेनॉल से दौड़ती हैं। बाकी गाड़ियों में भी 24 फीसदी एथेनॉल मिलाकर इंधन का प्रयोग किया जाता है। कनाडा सरकार भी एथेनॉल पर सब्सिडी दे रही है। भारत में प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद इसकी शुरूआत की जा रही है।

केंद्र सरकार ने चीनी मिलों से 30 दिन के अंदर एथेनॉल के प्लांट लगाने के प्रस्ताव मांगे हैं। चीनी मिलों को इस संबंध में सरकार की मंशा से अवगत करा दिया गया है। कुछ चीनी मिलें प्रस्ताव भेज भी रही हैं।  सत्येंद्र सिंह, गन्ना उपायुक्त, बरेली मंडल

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