यह लोगों के विश्वास का सम्मान है। देश ने मन बना लिया है कि तीसरी बार एनडीए की सरकार बनानी है। जब देश ने मन बना लिया है, तो काम करने लिए समय की बर्बादी क्यों करनी। हमारे पास 100 दिनों का एक्शन प्लान पहले से है, जिस पर काम जारी है। इसमें मैंने 25 दिन और जोड़ दिए हैं। मुझे देशभर के युवाओं के संदेश मिल रहे हैं। जिसमें वो अगले 5 वर्ष और अगले 25 वर्षों के रोडमैप पर अपने सुझाव दे रहे हैं। मैंने तय किया है कि 100 दिनों के अलावा 25 दिन युवाओं के सुझाव पर अमल के होंगे।
हमारा एक्शन प्लान एक लंबी एक्सरसाइज के बाद तैयार हुआ है। इसमें हमने मंत्रियों, विशेषज्ञों और लाखों लोगों की राय ली है। हमारा लक्ष्य 2047 तक विकसित भारत का निर्माण है। इसके लिए एक-एक पल कीमती है। मैं अभी यह कह सकता हूं कि 10 साल में विकास के जो काम हुए हैं, उसके स्केल और स्पीड में अभूतपूर्व बढ़ोतरी होने वाली है।
2047 तक विकसित भारत का संकल्प
नई सरकार के सामने बड़े काम होंगे। एक राष्ट्र-एक चुनाव पर सहमति बनाना, नारी वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा व राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण पर अमल और 2026 में होने वाला परिसीमन। इन प्राथमिकताओं पर क्या कहेंगे?
आप जिन कार्यों की बात कर रहे हैं, वह हमारा दायित्व है। हमारी सरकार इन सभी विषयों को अंतिम परिणाम तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी सरकार कानूनों को पास करा कर ठंडे बस्ते में नहीं डालती है। कांग्रेस सरकार सिर्फ नाम करने के लिए कानून बनाती थी, लेकिन उन्हें नोटिफाई करने में दशकों लग जाते थे।
हमने जो कानून बनाए हैं, उनके परिणाम अगले 5 वर्षों में आपको दिखने लगेंगे। नारी शक्ति वंदन अधिनियम देश की महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में बहुत बड़ा कदम है। यह अधिकार पाने के लिए आधी आबादी को लंबा इंतजार करना पड़ा। सामाजिक न्याय की बात करने वालों ने इसे रोककर रखा था। लेकिन भाजपा की सरकार ने इसे संभव कर दिखाया। हम हर वो काम करने वाले हैं, जिससे देशवासियों का जीवन सुगम हो और 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को शक्ति मिले।
भाजपा के एजेंडे में राम मंदिर, अनुच्छेद-370 और समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दे थे। दो वादे आपने पूरे कर दिए। अब समान नागरिक संहिता कब तक?
देश के कई राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू है। उत्तराखंड की भाजपा सरकार ने अपने यहां समान नागरिक संहिता को लागू कर दिया है। इससे वहां किसी को कोई परेशानी नहीं है। विपक्ष भी इसके खिलाफ नहीं बोल पा रहा। यूसीसी संविधान की भावना के अनुरूप है। हमारे संविधान निर्माता भी चाहते थे कि देश में एक तरह की नागरिक संहिता हो। समान नागरिक संहिता हमारे संकल्प पत्र का हिस्सा है और इसे लेकर हम प्रतिबद्ध हैं। मुझे आशा है कि जब हम सदन में इसे लेकर आएंगे तो विपक्ष इसका समर्थन करेगा।