जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ इस्तीफा देने वाले आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथन को सरकार ने कोरोना महामारी के मद्देनजर तुरंत ड्यूटी में शामिल होने को कहा है, लेकिन गोपीनाथन ने सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है और कहा है कि वह काम फिर से शुरू नहीं करेंगे।
दरअसल, सरकार ने उनके इस्तीफे को अभी तक स्वीकार नहीं किया है, इसलिए उसने इस आधार पर गोपीनाथन को ड्यूटी में शामिल होने के लिए कहा है। गोपीनाथन ने इसे सरकार द्वारा उत्पीड़न की कार्रवाई करार दिया और ड्यूटी में शामिल होने से इनकार करते हुए कहा कि वह कोविड-19 संकट के दौरान लोगों को अपनी सेवा देने के लिए तैयार है, लेकिन एक आईएएस अधिकारी के रूप में नहीं।
पिछले साल अगस्त में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने और उसको दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजन के विरोध में गोपीनाथन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा कि मेरे इस्तीफे को आठ महीने हो चुके है। सरकार केवल उत्पीड़न करना जानती है। फिर वो चाहें लोगों का हो या अधिकारियों का।
गोपीनाथन ने गुरुवार रात ट्वीट किया, 'मैं जानता हूं कि वे मेरा उत्पीड़न करना चाहते है। लेकिन फिर भी, मैं इस कठिन समय में सरकार के लिए स्वयंसेवक के रूप में कार्य करने की पेशकश करता हूं। लेकिन मैं आईएएस के रूप में दोबारा शामिल नहीं होऊंगा।' गोपीनाथन ने ट्वीट के साथ सरकार को दी गई अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया की एक तस्वीर भी पोस्ट की।
दमन, दीव और दादरा नगर हवेली के प्रशासन के निर्देश पर सरकार द्वारा गोपीनाथन को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि इस्तीफा तब प्रभावी हो जाता है जब यह स्वीकार किया जाता है। इस प्रकार एक सरकारी कर्मचारी अपने कर्तव्य से मुक्त हो जाता है।
इसमें कहा गया है कि आपको अपने निर्धारित कार्यों में भाग लेने के लिए निर्देशित किया गया था लेकिन आज तक आपने प्रशासन के कर्तव्यों के बारे में रिपोर्ट नहीं की है। पत्र में कहा गया कि कोरोना वायरस को महामारी घोषित किया गया है और आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत भारत सरकार के सभी मंत्रालयों/विभागों, राज्य सरकारों और राज्य प्राधिकरण को देश में कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए कदम उठाने को कहा गया है। इसलिए आपको तुरंत ड्यूटी पर रिपोर्ट करने के लिए निर्देशित किया जा रहा है।