प्रवर्तन निदेशालय के पूर्व प्रमुख संजय कुमार मिश्रा को बुधवार को प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) में शामिल किया गया। उत्तर प्रदेश से 1984 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) अधिकारी मिश्रा को सचिव के पद पर नियुक्त किया गया है। ईएसी-पीएम एक स्वतंत्र निकाय है जिसका कार्य प्रमुख आर्थिक मुद्दों पर प्रधानमंत्री को पूरी जानकारी प्रदान करना और सलाह देना है।
मंगलवार को जारी एक सरकारी आदेश में कहा गया कि आयकर कैडर के 1984 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) अधिकारी मिश्रा प्रधानमंत्री की ओर से उनकी नियुक्ति को मंजूरी दिए जाने के बाद ईएसी-पीएम के पूर्णकालिक सदस्य के रूप में काम करेंगे।
आदेश में कहा गया है कि मिश्रा को पदभार ग्रहण करने की तिथि से भारत सरकार के सचिव के पद और वेतन पर नियुक्त किया गया है, जो पुनर्नियोजित सरकारी अधिकारियों पर लागू सामान्य नियमों और शर्तों के अनुसार होगा।
मिश्रा के कार्यकाल के दौरान ईडी ने कई हाई-प्रोफाइल लोगों और राजनेताओं की जांच की। जिनमें कांग्रेस के सोनिया गांधी, उनके बेटे राहुल गांधी और बेटी प्रियंका गांधी के अलावा कई मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों, विधायकों और सांसदों के खिलाफ धन शोधन निरोधक कानून के तहत जांच की गई थी। इसकी विपक्षी दलों ने आलोचना करते हुए कहा था कि एजेंसी एक "उपकरण" है और भाजपा शासित केंद्र के इशारे पर काम कर रही है।
उन्हें अक्टूबर 2018 में ईडी निदेशक नियुक्त किया गया था और एजेंसी प्रमुख के रूप में उनका कार्यकाल पांच साल का था जो दूसरा सबसे लंबा कार्यकाल था। ईडी के पहले निदेशक एएम चटर्जी का कार्यकाल 1957 से 1965 के बीच लगभग 7.5 वर्षों का सबसे लंबा था। केंद्र सरकार ने मिश्रा को सचिव रैंक पर पदोन्नत किया था, जबकि वे ईडी के प्रमुख थे, जो मौजूदा सरकारी नीति के अनुसार एक अतिरिक्त सचिव का पद है।
मिश्रा केंद्रीय गृह मंत्रालय के अलावा आयकर विभाग में भी विभिन्न पदों पर कार्य कर चुके हैं। मिश्रा के कार्यकाल के दौरान ही ईडी ने वीआईपी हेलिकॉप्टर मामले के आरोपी और ब्रिटिश नागरिक क्रिश्चियन मिशेल के अलावा एक अन्य प्रमुख संदिग्ध राजीव सक्सेना को भारत प्रत्यर्पित कराया था। उन्हीं के समय विजय माल्या, नीरव मोदी और संजय भंडारी जैसे आर्थिक भगोड़ों के खिलाफ प्रत्यर्पण की कार्यवाही सुनिश्चित की गई।