दरअसल, 19 जुलाई को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर फैसला सुनाते हुए प्रदेश के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को निशुल्क आजीवन सरकारी आवास की सुविधा के प्रावधान को अवैधानिक करार देते हुए एक महीने में कार्रवाई करने के आदेश दिए थे।
कोर्ट के इस फैसले के मद्देनजर प्रदेश सरकार ने चार पूर्व मुख्यमंत्रियों के बंगलों का आवंटन निरस्त कर दिया था। कोर्ट के आदेश के बाद शिवराज सरकार ने दिग्विजय सिंह समेत चारों पूर्व मुख्यमंत्रियों से वाजिब वजह के साथ बंगले फिर से आवंटित करने की अपील का आह्वान किया था। जिसके बाद बीजेपी के तीनों नेताओं ने बंगले फिर से आवंटन की मांग की थी लेकिन दिग्विजय सिंह ने ऐसी मांग नहीं की थी।